विधानसभा सत्र के दौरान जनता के सवालों पर सरकार का घेराव करेगी माले

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पटना – भाकपा-माले राज्य सचिव कुणाल ने बयान जारी कर कहा है कि आगामी विधानसभा सत्र (20-26 जुलाई) के दौरान हमारी पार्टी जनता के ज्वलंत सवालों पर विधानसभा के अंदर और बाहर सरकार का घेराव करेगी. आज धान रोपने का समय बीत रहा है. अधिकांश जिलों में औसत से भी काफी कम वर्षा हुई है लेकिन सरकर का इस पर कोई ध्यान नहीं है. दक्षिण बिहार में जहां लोग पानी के लिए तरस रहे हैं, वहीं उत्तर बिहार पहली ही बारिश में बाढ़ की चपेट में है. सरकार के बाढ़ पूर्व तैयारी की हकीकत एक बार फिर सामने आ गई है. नहरों में पानी मांगने पर यह सरकार किसान नेताओं पर फर्जी मुकदमे लादकर परेशान कर रही है.

उन्होंने कहा कि सोन सहित तमाम नदियों से बालू बंदी के कारण राज्य के हजारों नाविकों व बालू मजदूरों के सामने भूखमरी की स्थिति पैदा हो गई है. पहले तो नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने जलजीवों के प्रजनन काल का बहाना बनाकर 3 महीने सोन की धार से बालू निकासी पर रोक लगाई और अब यह कहकर कि नदी का पूरा बालू ठीकेदार का है – नाव से बालू निकासी नहीं करने दी जा रही है. इसके खिलाफ 24 जुलाई को विधानसभा के समक्ष बालू मजदूरों का प्रदर्शन होगा.

25 जुलाई को किसानों की मांग (गेहूं-मक्का की खरीद, नहरों में पानी व बंद नलकूपों को चालू करने, दाना नहीं आने से प्रभावित मक्का किसानों को मुआवजा, गन्ना किसानों को गन्ना का बकाया भुगतान, तमाम किसानों पर से सरकारी व महाजनी कर्ज की मंसूखी और लागत का डेढ़ गुना फसलों की कीमत) पर विधानसभा के भीतर सरकार का घेराव किया जाएगा और बाहर प्रदर्शन किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि शराबबंदी कानून के तहत गिरफ्तार तमाम दलित-गरीबों की रिहाई, समुचित मुआवजा व पुनर्वास की मांग पर पूरे राज्य के जिला मुख्यालयों पर विधानसभा सत्र के दौरान ही विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा. हमारी पार्टी शराबबंदी कानून के ड्रैकोनियन प्रावधानों को वापस लेने की मांग करते रही है लेकिन सरकार उसे अनसुना ही करते रही. आज शराबबंदी के नाम पर डेढ़ लाख से ज्यादा दलित-गरीब विभिन्न जेलों में बेहद अमानवीय जीवन जी रहे हैं जबकि शराब माफियाओं की चंादी है. हम मांग करते हैं कि शराबबंदी की आड़ में दलित-गरीबों की जब्त की गई संपत्ति वापस करने, उनके पुनर्वास और वैकल्पिक रोजगार की व्यवस्था का प्रबंध किया जाए.

उन्होंने आगे कहा कि आज बिहार सरकार गर्दनीबाग पटना सहित स्मार्ट सिटी के नाम पर शहरों में गरीबों को उजाड़ने का अभियान चला रखी है. गर्दनीबाग जैसे खूबसूरत इलाके को सरकार तबाह-बर्बाद कर देना चाहती है और उसे माॅलों के अधीन कर देना चाहती है. 23 से 26 जुलाई तक इसके खिलाफ विधानसभा के समक्ष अनशन का कार्यक्रम लिया गया है. पूरे राज्य में ग्रामीण इलाके में भी गरीबों को उजाड़ा जा रहा है. जमुई व बेगूसराय में आवास की लड़ाई लड़ रहे माले नेताओं व आंदोलनकारियों पर फर्जी मुकदमे लाद दिए. सरकार आज गरीबों को बसाने की बजाए उनका दमन कर रही है. इसके खिलाफ 26 जुलाई को विधानसभा में सवाल उठाया जाएगा और भाजपा-जदयू से जवाब मांगा जाएगा.

मुजफ्फरपुर रिमांड होम, गया सामूहिक बलात्कार कांड, सारण सामूहिक बलात्कार कांड सहित बिहार में हाल के दिनों में महिलाओं पर अपराध की बढ़ती घटनाओं को भी आगामी विधानसभा सत्र में एजेंडा बनाया जाएगा. आज बिहार महिला उत्पीड़न का केंद्र बन गया है. बलात्कारियों-अपराधियों की मौज है और सरकार नाम की कोई चीज नहीं रह गई है.