विधायकों का सवाल- मुखिया का फंड एक करोड़ तो फिर हमारे लिए सिर्फ 2 करोड़ क्यों ?

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Patna: Bihar Chief Minister Nitish Kumar speaks at the closing program of Physiotherapy & Occupational Therapy week at Bihar College of Physiotherapy & Occupational Therapy in Patna on Sunday. PTI Photo (PTI9_11_2016_000097A)

पटना: बिहार विधानमंडल का बजट सत्र 23 फरवरी से शुरू होने जा रहा है। इस बार बजट में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को सतापक्ष के विधायकों का ही भारी विरोध झेलना पड़ सकता है। सत्ताधारी महागठबंधन के विधायक समेत दूसरे विधायक फंड बढ़ाने की मांग को लेकर मोर्चा खोल चुके हैं।

महागठबंधन के कुछ विधायकों ने अपनी विधायक फंड बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। इनमें से कुछ विधायक तो राजद सुप्रीमो लालू यादव के करीबी भी हैं। इन विधायकों ने साफ कर दिया है कि महंगाई के इस दौर में 2 करोड़ का विधायक फंड ऊंट के मुंह में जीरे जैसा है। अगर विधायक फंड नहीं बढ़ा तो सदन के अंदर अपनी ही सरकार के खिलाफ खड़े हो सकते हैं।

राजद विधायक राहुल तिवारी का कहना है कि मेरे विधानसभा में लगभग 200 गांव हैं। विधायक फंड के रूप में उन्हें 2 करोड़ मिलते है। सामुदायिक भवन में करीब दस लाख लग जाते हैं। पोखर बनाने में भी लाखों रूपये खर्च हो जाते हैं। 2 करोड़ के फंड से हमलोग कुछ ही गांवों में काम करा पाते हैं।

राजद के एक और विधायक भाई वीरेंद्र का कहना है कि विधायक फंड बढ़ना चाहिए। अगर फंड नहीं बढ़ता है तो विधायकों को प्रेशर बनना चाहिए। राजद विधायक भोला यादव का कहना है कि फंड बहुत कम हैं। आप एक पंचायत के मुखिया को एक करोड़ देते हैं जबकि 37 से 45 पंचायतों के जनप्रतिनिधि को सिर्फ 2 करोड़ रूपये दे रहे हैं। महंगाई को देखते हुए फंड बढ़ना चाहिए।

वहीं जदयू के विधायक श्याम रजक ने भी यही माना है कि विधायक फंड बढ़ना चाहिए।
बिहार सरकार के वित्त मंत्री अब्दुल बारी सिद्दीकी का कहना है कि इसमें मैं कुछ नहीं कर सकता हूं। मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि विधायकों के सुझाव प्राप्त हुए हैं और सरकार उनकी मांगों पर विचार कर रही है।

एक तो शराबबंदी के बाद 5 हजार करोड़ के राजस्व का नुकसान, ऊपर से अपने ही विधायकों की ये मांग सरकार की मुश्किलें बढ़ने वाली है।