विश्व की अनूठी संस्कृति भारतीय संस्कृति : चिदात्मन जी महाराज

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नालंदा- सर्वमंगला आध्यात्मिक ज्ञानपीठ शिविर का उद्घाटन ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। राजगृह के मलमास मेला क्षेत्र के गढ़ महादेव मंदिर के पास आयोजित शिविर का उद्घाटन करते हुए। उन्होंने कहा कि राजगीर प्राचीन काल से ही सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रधान केन्द्र रहा है। उन्होंने कहा कि अध्यात्म से ही जीवन में सुख और शांति मिल सकती है।

इस अवसर पर परमहंस स्वामी चिदात्मन जी महाराज उर्फ फलाहारी बाबा ने अपने आशीर्वचन में कहा कि भारतीय संस्कृति का आधार वेद है। वेद संपूर्ण विश्व के लिए अनुपम उपहार है। वेद जानने के बाद मनुष्य का जीवन सफल हो जाता है। जीवन में केवल आनंद ही आनंद और शांति की प्राप्ति होती है। वेद के छठे अंग जिससे ज्योतिष कही जाती है। इसे तीसरी दृष्टि के नाम से भी जाना जाता है। इसी तीसरी दृष्टि को पुरुषोत्तम मास कहते हैं। कुंभ के समय प्रयागराज का जितना धार्मिक महत्व और महत्ता है। पुरुषोत्तम मास में राजगीर का भी वही धार्मिक महत्व और महत्ता है। स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने कहा भौतिकवाद का जहां अंत होता है। वहीं से धर्म शुरू होता है।

भारतीय संस्कृति विश्व की अनूठी संस्कृति है। इसका विधिवत सेवन करने से लाभ मिलता है। उन्होंने कहा भागवत भाग्यशाली को ही प्राप्त होता है। मनुष्य का अस्तित्व जन्म के बाद और मृत्यु के पूर्व ही है। राजगीर के आध्यात्मिक इतिहास की चर्चा करते हुए फलाहारी बाबा ने कहा कि राजगृह का यह पावन क्षेत्र अनेकता में एकता के लिए सुप्रसिद्ध रहा है। इसकी सिद्धि और प्रसिद्धि अंतर्राष्ट्रीय पटल पर है। उन्होंने कहा कि देश और दुनिया में 350 संप्रदाय हैं, जिसमें देव संप्रदाय पर कभी आंच नहीं आई है। उन्होंने कहा वास्तविक सुख मनुष्य के अंदर छिपा है। अपने अंदर झांक कर देखें तो वह सुख उन्हें मिल सकता है।

पुरुषोत्तम श्रीराम और भगवान श्रीकृष्ण की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम ने जो किया उसका अनुसरण मनुष्य को अपने जीवन में करना चाहिए। लेकिन भगवान कृष्ण ने जो किया वह नहीं करना चाहिए। उनके द्वारा गीता में कही हुई बातों का अनुसरण करनी चाहिए। इसीलिए गीता को वेदों का सार कहा गया है। उन्होंने कहा कि यह कलयुग है। कलयुग का 5117 वर्ष बीत चुका है। वह 5118 वें वर्ष में प्रवेश किया है। भारतीय संस्कृति की गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डालते हुए स्वामी चिदात्मन जी महाराज ने कहा की गुलामी के बाद भारतीय संस्कृति छिन्न- भिन्न हो गई थी। फिर से भारतीय संस्कृति को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर उन्होंने जोर दिया।

उन्होंने कहा राजगृह का मलमास मेला विशुद्ध रूप से धार्मिक मेला है। लेकिन इस मेले में धर्म पर व्यवसाय भारी पड़ते जा रहा है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की प्रशंसा करते हुए उन्होंने कहा कि मलमास मेला फिर से अपनी गौरव और गरिमा को हासिल करे, इसीलिए मुख्यमंत्री ने राजगीर के मलमास मेला को राजकीय मेला का दर्जा प्रदान किया है। इसके लिए उन्हें कोटि-कोटि साधुवाद। इस अवसर पर विधायक रवि ज्योति कुमार, डॉ जयनन्दन पाण्डेय, राजगीर तपोवन तीर्थ रक्षार्थ पंडा कमेटी के पूर्व अध्यक्ष बृजनंदन उपाध्याय, पार्षद मीरा कुमारी समेत कई प्रमुख लोग उपस्थित थे।