वीकेंड पर बनाइए याहां का प्लान, अभी तो बाकी है छुट्टी

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देखते ही देखते रंगों का त्यौहार होली और गुड फ्राइडे बीत गया। सरकार ने इस बार छह दिनों की लंबी छूट्टी जो दे दी है। लोग इन छुट्टियों को बिताने के लिए देश के विभिन्न शहरों में जा रहे है। अगर आप इन छुट्टीयों में घर बैठे बोर हो रहे है तो आइए आप को बिहार में ही कुछ जगहों की सैर कराते है।

मनेर :

मनेर जो पटना से महज 30 किमी की दूरी पर स्थित है।मनेर शरीफ ऐतिहासिक अतीत के अवशेषों से भरा हुआ है। मनेर शरीफ में दो बहुत प्रसिद्ध मकबरे हैं। एक शाह दौलत या मखदूम दौलत का, जिसे छोटी दरगाह भी कहते हैं। दूसरा मकबरा शेख याहिया मनेरी या मखदूम याहिया का है, जिसे बड़ी दरगाह कहते हैं।

मखदमू दौलत ने सन् 1608 में मनेर शरीफ में अंतिम सांस ली थी। सन् 1616 में उनके शिष्य और बिहार के राज्यपाल इब्राहिम खान ने उनके मकबरे का निर्माण पूरा करवाया। मनेर शरीफ की यह एक अद्भुत इमारत है। इस इमारत की दीवारों पर बड़ी ही जटिल डिजाइन की गई है। उपर एक बड़ा सा गुंबद है, जिसकी छत पर पवित्र कुरान के शिलालेख हैं। पहले मनेर का नाम मनियार पठान मठान था। जिसका मतलब संगीतमय शहर होता है।

मनेर शरीफ में आपको जहांगीर के समय की वास्तुकला की विशेषताएं भी मिलेंगीं। पूर्वी भारत में मुगल काल के स्मारकों में से सबसे श्रेष्ठ स्मारक मनेर शरीफ में है। मनेर शरीफ के परिसर में आपको इब्राहिम खान द्वारा सन् 1619 में बनवाई मस्जिद भी मिलेगी।

राजगीर :

राजगीर को मंदिरों और मठों से भरी जगह कहा जाता है। राजगीर घाटी में बसी जगह है और इसके आसपास के स्थान बहुत सुंदर हैं। आसपास के जंगल राजगीर की सुंदरता को और बढ़ाते हैं। पाटलीपुत्र के गठन से पहले राजगीर मगध महाजनपद की राजधानी था। यह क्षेत्र भगवान बु़द्ध और बौद्ध धर्म से लंबे समय तक संबंधित रहा है। बुद्ध ने अपने जीवन का लंबा समय यहां बिताया।

इसी शहर में पहली बार बौद्ध परिषद के रुप में कार्य किया। आज के समय में राजगीर बौद्ध धर्म का सबसे प्रमुख धर्म स्थल है। साथ ही जैन धर्म का भी एक लोकप्रिय तीर्थस्थल है।

धर्म का केन्द्र होने के अलावा राजगीर एक लोकप्रिय स्वास्थ्य रिसोर्ट भी है। राजगीर के गर्म पानी के तालाबों में त्वचा संबंधी बीमारियां ठीक करने के गुण भी हैं। यहां विश्व शांति स्तूप को घुमना नहीं भूलें। इसके अलावा रोप-वे भी बड़ा आकर्षण है।

 बोधगया :

पटना से 100 किमी की दूरी पर स्थित बुद्धनगरी बोधगया है। जहां पछियों के मीठे कलख के बीच बुद्धम् शरणम गच्छामि की गुंज लोगों को आनंदित कर देता है। यह वो जगह है जहां भगवान बुद्ध को ज्ञान प्राप्त हुआ था। गया कई पवित्र धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है जिनमें से एक विष्णुपद मंदिर है।

इस प्राचीन शहर का हिंदुओं और बौद्ध धर्म के लोगों के लिए बहुत महत्व है। वर्ष 2002 में युनेस्को दूारा इस शहर को विरासत स्थल घोषित किया गया। इस शहर में देखने के लिए कई पवित्र मंदिर है। जिसे जरुर देखना चाहिए। बोधगया रेल व सड़क मार्ग दोनों से जा सकते है।

पटना साहिब :

पटना साहिब उनलोगों के बेहतर विकल्प है जो ज्यादा दूर नहीं जाना चाहते है। पटना साहिब सिखों के दसवें गुरु गुरु गोबिंदसिंह जी के जन्मस्थान के रूप में प्रचलित है। भारत और पाकिस्तान में मौजूदा कई गुरुद्वारों की तरह ही इस गुरुद्वारे का निर्माण भी महाराजा रणजीत सिंह द्वारा पटना में स्थित गंगा नदी के तट के समीप किया गया था।

इस पवित्र स्थान का सिख धर्म के पहले गुरु श्री गुरु नानक देव जी और नौंवे गुरु श्री गुरु तेग बहादुर जी ने भी दौरा किया था। गुरुद्वारा पटना साहिब भारत के पूर्व क्षेत्र में धर्म के प्रचार का एक केन्द्र भी माना जाता है।

दसवें गुरु गुरु गोबिंदसिंह जी के कुछ ऐतिहासिक अवशेष और लेख भी इस गुरुद्वारे में संभाल कर रखे गए हैं जैसे कि गुरु गोबिंदसिंह जी द्वारा हस्ताक्षर की हुई गुरु ग्रंथ साहिब, गुरु गोबिंदसिंह जी की तलवार, लोहे का तीर, चकरी और कंघा आदि।

सिख वस्तुकला का अदभुत नमुना है पटना साहिब गुरुदूारा। इसकी बनावट गुंबदनुमा है। यह गुरुदूारा सिखों के पांच पवित्र तख्त में से एक है। सिख के अलावा सभी धर्मावलंबियों के लिए यह जगह बहुत ही पवित्र माना जाता है।