वीर कुंवर सिंह की विरासत को सहेजने पर राज्य सरकार लगातार काम कर रही है – मुख्यमंत्री

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भोजपुर – बाबू वीर कुँवर सिंह के विजयोत्सव के 160 वर्ष पूरा होने के अवसर पर उनके जन्मस्थल भोजपुर जिले के जगदीशपुर गाँव में तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस आयोजन में आज सुबह सबसे पहले दिन शिवपुर घाट से जगदीशपुर किले तक हाथी-घोड़ों के साथ शोभायात्रा निकाली गई, उसके बाद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार जगदीशपुर किला मैदान में झंडातोलन किये और वीर कुँवर सिंह ग्राम स्थित आयोजन स्थल पहुंचकर दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किये।

भोजपुर में तीन दिवसीय बाबू वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव की शुरूआत बड़े ही धूम-धाम से किया गया। विजयोत्सव का उद्घाटन बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने संयुक्त रूप से किया। मुख्यमंत्री समेत सभी आगत अतिथियों का स्वागत केन्द्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री व आरा सांसद आरके सिंह द्वारा किया गया। इस दौरान मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री वीर कुंवर सिंह के पैतृक गांव जगदीशपुर किला मैदान पहुंच कुंवर सिंह के प्रतिमा पर माल्यार्पण कर राष्ट्रीय ध्वज को फहराया।

किला मैदान से मुख्यमंत्री दुलौर स्थित सभा स्थल पहुंचे और वहां दीप प्रज्वलित कर विजयोत्सव के दरम्यान तीन दिनों तक होने वाले खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ किये। भोजपुर जिला प्रशासन द्वारा मुख्यमंत्री को तैलचित्र व बुके देकर सम्मानित भी किया गया। वहीं मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आम सभा मंच से 11 करोड़ 86 लाख रुपए की कई योजनाओं का शिलान्यास किया और जनता को संबोधित करते हुए कहा कि बाबू वीर कुंवर सिंह इस देश के महान योद्धा थे उनके कुशल नेतृत्व और वीरता की गाथा को देश के युवाओं को आत्मसात करना चाहिए।

बिहार वह नगरी है जहां कई महापुरुषों का जन्म हुआ और यहां की धरती पर उनका पदार्पण हुआ सरकार उन सभी महापुरुषों के वीरगाथा में कोई कमी नहीं लाना चाहती जिसके लिए बिहार मैं हाल के दिनों में कई आयोजन हुआ है। वीर कुंवर सिंह की विरासत को सही तरिके से सहेजने के प्रयास में राज्य सरकार लगातार काम कर रही है। आरा हाउस हो या किला हर जगह को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि 1857 की क्रांति में बाबू वीर कुँवर सिंह ने फतह हासिल किए थे। इसी वर्ष चंपारण सत्याग्रह के भी 100 साल पूरे हुए है 10 अप्रैल को बापू पटना आये थे। इस अवसर पर हमने राजकीय कार्यक्रम का आयोजन किया था जिसमें देशभर से विभिन्न क्षेत्रों में कार्य कर रहे लोगों को सम्मानित किया था।

जिस तरह से उस उम्र में भी बाबू वीर कुँवर सिंह लगभग 2300 किलोमीटर की यात्रा कर देश के लिए लड़ाई लड़े थे। 1857 का जो विद्रोह था, उस समय ईस्ट इंडिया कंपनी शासन करती थी। बिहार के बाहर जो बाबू वीर कुँवर सिंह के योगदानों की चर्चा देश में नहीं है इसीलिए देश भर में वीर कुँवर सिंह के योगदानों को देश भर में पहुंचाने के लिए हमने 160 वां विजय उत्सव को बड़े धूमधाम से मनाने का निर्णय लिए थे। हम पटना में वीर कुंवर सिंह के कार्यों के ऊपर संगोष्ठी का आयोजन किया जाएगा जिसका वीडियो कर रेकार्ड रखा जाएगा और किताब का प्रकाशन किया जाएगा ताकि बच्चों को भी पता चले कि आजादी की लड़ाई में बिहार की क्या भूमिका रही है।

जब इसी साल डावां गाँव गया था हमको पता चला था कि इसी गाँव में उज्जैन के राजा बाबू वीर कुंवर सिंह के किले में रुके थे। 80 साल के उम्र में भी वो घुटना टेकने के लिए मजबूर नहीं हुए और अंत में उन्होंने विजय हासिल की। यही समाज के लिए सबसे बड़ा संदेश है। समाज के उत्थान के लिए सभी वर्ग के लोगों का साथ आना जरूरी है। आज हमने जगदीशपुर में संग्रहालय का उद्घाटन किया है इसी तरह आरा हाउस का भी हम विकास करेंगे। बाबू वीर कुँवर सिंह के रास्ते पर चलने की जरूरत है।