शराबबंदी का वैज्ञानिक विश्लेषण हो तो इसका प्रभाव और बढ़ेगा तथा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में सहायक होगा: मुख्यमंत्री

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पटना, 29 जुलाई 2016: मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार ने कहा है कि शराबबंदी से वातावरण बेहतर हुआ है। गरीब परिवारों की स्थिति सुधर रही है। इसका वैज्ञानिक विश्लेषण हो तो इसका प्रभाव बढ़ेगा तथा सामाजिक कुरीतियों को दूर करने में सहायक होगा। मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार आज बिहार विधान परिषद के उप भवन सभागार में नाॅबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी के सम्मान में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुये अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज गौरव का क्षण है कि अपने देश के ऐसे व्यक्ति को हम सभी सुनने के लिये इकट्ठा हुये हैं, जिनके काम और असर को हमलोगों ने देखा है। उन्होंने कहा कि श्री कैलाश सत्यार्थी को नाॅबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित होने से हमलोग गौरवान्वित हुये हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार के हजारों बच्चों को इनके द्वारा मुक्त कराया गया है। यहाॅ के बच्चों को बाल मजदूरी, टैªफिकिंग के लिये लगाये जाने पर या जो बच्चे गायब होते थे, उन्हें श्री कैलाश सत्यार्थी जी और उनके अभियान में लगे लोगों द्वारा बच्चों को मुक्त कराया गया है। आज भी इस तरह की घटना होती है तो लोग इनके कार्यालय को फोन करते हैं। अब तक हजारों बच्चों को इनके माध्यम से मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि श्री कैलाश सत्यार्थी द्वारा बिहार के साथ-साथ देश एवं विदेश में बाल श्रम के विरूद्ध विभिन्न कार्य किये गये हैं और इनके परार्मश पर संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी कई नीतियाॅ बनायी है।

मुख्यमंत्री ने बच्चों के भविष्य के लिये शिक्षा पर जोर देते हुये कहा कि जब तक बच्चों को पढ़ाया नहीं जायेगा, तब तक उनका भविष्य उज्ज्वल नहीं होगा। उन्होंने मुक्त बच्चों के पुनर्वास पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि कई बार गरीबी के कारण माता-पिता बच्चों का सौदा कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार न्याय के साथ विकास यानि विकास का लाभ हर इंसान तक पहुॅचे, इसी लक्ष्य पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि यही समावेशी विकास है। न्याय के साथ विकास के लक्ष्य पर काम करने से हरेक गरीब के घर तक विकास का लाभ पहुॅचेगा तो कोई भी माता-पिता अपने बच्चों को कहीं भेज देने के लिये राजी नहीं होगा, यह एक बहुत बड़ा सामाजिक अभियान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि बाल श्रमिकों के मुक्ति के लिये एक नेटवर्क कायम किया गया है, जिसे चाइल्ड लेवर टैªंिकग सिस्टम कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जो बच्चे मुक्त कराये जाते हैं, उनका नाम दर्ज किया जाता है। मुक्त कराये गये बच्चों को 25 हजार रूपये की सहायता देने का प्रावधान पहले से है, यह पर्याप्त नहीं है। इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट ने भी दिशा-निर्देश दिये हैं, जिसका अमल होगा किन्तु राज्य सरकार ने उससे भी आगे जाकर ऐसे मुक्त कराये गये बच्चों को 25 हजार रूपये अतिरिक्त देने का प्रावधान किया है। यह राशि मुख्यमंत्री राहत कोष से प्रदान की जायेगी। श्रम संसाधन विभाग को इस संबंध में दिशा-निर्देश दिया गया है कि वे एक कार्ययोजना बना लें ताकि कोई भी इस परिधि में आने वाला बच्चा नहीं छूटे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी से वातावरण बेहतर हुआ है। गरीब परिवारों की स्थिति सुधर रही है। उन्होंने कहा कि मैं दूसरे राज्यों में भी जाकर यह कहता हूॅ कि आप अपने स्तर से बिहार के किसी भी गाॅव को चुन लें। शराबबंदी के बाद गाॅव में लड़ाई, झगड़ा, घरेलू हिंसा इत्यादि में कमी आयी है अथवा नहीं, इसे स्वयं देखा जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह एक बहुत बड़ा सामाजिक कार्य है। जिस पैसे का दुरूपयोग शराब या नशे में होता था, अब उस पैसे का उपयोग परिवार के हित में हो रहा है, इससे न केवल आर्थिक स्थिति सुधरेगी बल्कि बहुत सारे व्यापार का विस्तार होगा और इससे अर्थव्यवस्था विकसित होगी। उन्होंने कहा कि शराबबंदी से पाॅच हजार करोड़ रूपये का सालाना राजस्व प्राप्त होता था। कुछ लोगों का कहना है कि पाॅच हजार करोड़ रूपये का नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि मैं इसे नुकसान नहीं मानता। यह सही है कि वह राशि सरकार के खजाने में नहीं आया किन्तु दस हजार करोड़ रूपये की बचत हो रही है। उन्होंने कहा कि प्रमण्डल स्तर पर जीविका की दीदीयों के साथ शराबबंदी पर आयोजित बैठकों में कुछ अनुभव साझा करने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि जीविका की दीदीयों के द्वारा अपना अनुभव सुनाते हुये बताया गया कि पहले पति शराब पीकर आते थे और मारपीट करते थे। अब शाम में बाजार से सब्जी खरीदकर लाते हैं और उनके चेहरे से प्रेम टपकता है तथा इतना ही नहीं अब देखने में भी वे अच्छे लगते हैं। उन्होेंने कहा कि इस पर वृतचित्र बनाकर लोगों को दिखाया जाना चाहिये। उन्होंने कहा कि इसका असर बच्चों पर भी पड़ेगा और बच्चों को बाहर भेजने की प्रवृति में कमी आयेगी।

मुख्यमंत्री ने नाॅबेल शांति पुरस्कार विजेता श्री कैलाश सत्यार्थी से अनुरोध किया कि आपलेाग प्रतिष्ठित लोग हैं। शराबबंदी का अध्ययन करें तो इसके अच्छे परिणाम निकलेंगे। उन्होंने कहा कि जिनलोगों ने अंधविश्वास, पाखंड के खिलाफ आवाज बुलंद की, वे सभी लोग शराबबंदी के पक्ष में थे। इसमें डाॅ0 भीमराव अंबेडकर, महात्मा गाॅधी, राम मनोहर लोहिया, जयप्रकाश नारायण सभी इसके पक्ष में थे। उन्होंने कहा कि इसमें राजनैतिक विभेद तो हो ही नहीं सकता, यह तो सामाजिक चीज है और इसका वैज्ञानिक अध्ययन कर नतीजे पर पहुॅचना चाहिये।

मुख्यमंत्री ने श्री कैलाश सत्यार्थी के संबंध में कहा कि युवा काल से ही बचपन बचाओ अभियान की शुरूआत की। सौ से अधिक देशों में इनका प्रभाव है। संयुक्त राष्ट्र संघ ने इनके विचारों को अपनाया। उन्होंने कहा कि बच्चों को इतना अधिकार अवश्य होना चाहिये कि उन्हें दो जून की रोटी के लिये या पारिवारिक कारणों से कोई बाल श्रम न करना पड़े, वह खुद खेले, दौड़े और बचपन का हर आनंद ले। उन्होंने कहा कि बच्चों के भविष्य के लिये श्री कैलाश सत्यार्थी जी द्वारा चलाये जा रहे अभियान में नीति एवं क्रियान्वयन के स्तर पर बिहार सरकार एवं बिहार के लेागों की ओर से पूर्ण सहयोग किया जायेगा।

इस अवसर पर नाॅबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि बिहार से उनका गहरा संबंध है। उन्होंने कहा कि यह एक ऐसी धरती है, जिससे पूरे देश और पूरी दुनिया ने प्रेरणा ली है। वैशाली पर गर्व किये बिना हम लोकतंत्र की बात नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि नालंदा के बिना उत्कृष्ट ज्ञान की कल्पना नहीं की जा सकती। उन्होंने कहा कि 1973 में किसी व्यापक मुद्दे पर बातचीत के लिये जयप्रकाश नारायण के पास नहीं आता तो मुझे यह प्रेरणा नहीं मिलती। उन्होंने कहा कि बिहार की धरती का नमन करते हुये उन बच्चों के प्रति नमन है, जिन्हें मैंने आजाद कराया।

श्री कैलाश सत्यार्थी ने बिहार के संबंध में तीन बातों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि पहले पन्द्रह साल तक आते-आते लड़कियाॅ स्कूल दूर होने या छेड़खानी इत्यादि के डर से स्कूल छोड़ देती थी। अब मैंने नजदीक से देखा है कि गाॅव में समूह में लड़कियाॅ साइकिल चलाते हुये जाती हैं और उनके सशक्तिकरण एवं आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि हुयी है। उन्होंने कहा कि मुक्त कराये गये बच्चों को मुख्यमंत्री राहत कोष से 25 हजार रूपये मिलने से इसका लाभ हजारों बच्चों को मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री की यह योजना अभिनंदन योग्य है और इसके लिये उन्होंने मुख्यमंत्री को बधाई दी। श्री कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि शराबबंदी के वैज्ञानिक विश्लेषण के मुख्यमंत्री के सुझाव को मैं स्वीकार करता हूॅ और उन्होंने कहा कि इस पर वैज्ञानिक अध्ययन करायेंगे। उन्होंने कहा कि बिहार के प्रति, यहाॅ के मुक्त कराये गये बच्चों, उनके माता-पिता के प्रति ऋणी हूॅ और सरकार के साथ जो भी संभव होगा, मिलकर काम करने के लिये तैयार हैं।

इस अवसर पर बिहार विधान परिषद के सभापति श्री अवधेश नारायण सिंह एवं अध्यक्ष बिहार विधानसभा श्री विजय कुमार चैधरी ने भी श्री कैलाश सत्यार्थी के सम्मान में उद्गार व्यक्त किये।

मुख्यमंत्री ने श्री कैलाश सत्यार्थी एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती सुमेधा कैलाश को प्रतीक चिह्न, बुके एवं शाल भेंटकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री श्री तेजस्वी प्रसाद यादव, ग्रामीण विकास एवं संसदीय कार्य मंत्री श्री श्रवण कुमार, विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष श्री सुशील कुमार मोदी, उप सभापति बिहार विधान परिषद श्री हारून रसीद सहित राज्य सरकार के कई मंत्रीगण, विधान पार्षदगण, विधायकगण, विशिष्ट अतिथिगण एवं गणमान्य व्यक्ति तथा बच्चे उपस्थित थे। मंच संचालन बिहार विधान परिषद के वरीय सदस्य श्री केदारनाथ पाण्डेय ने किया।