शिक्षकों के वरीयताक्रम में हुई अनिमियतता

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मोतिहारी में बिश्वबिद्यालय को लेकर अनशन एवम धरना पर बैठने के कारण हंगामा मच्चा हुआ है तो दूसरी तरफ पूर्व से विवादित मोतिहारी स्थित केन्द्रीय बिश्वविद्यालय अपनी करतूतों से बाज नही आ रहा है।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय में शिक्षकों के वरीयताक्रम में हुई अनिमियतता, यूजीसी और विश्वविद्यालय के ऑर्डिनेंस को ताक पर रखकर की गई नए अधिशासी परिषद और अकादमिक परिषद का गठन।

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के बाद 3 अक्टूबर को नए शिक्षकों की नियुक्ति हुई। विश्वविद्यालय के ओएसडी के द्वारा 26-12-2016 को एक नोटिस निर्गत किया गया और उसमें शिक्षकों की वरीयता सूची बनाने के लिए नियमों का उल्लेख किया गया जो की किसी भी विश्वविद्यालय शिक्षक के लिए लागू नही होता। विश्वविद्यालय ओएसडी के द्वारा उस नियम की आपत्ति जताने के लिए 10 दिनों का समय दिया गया और मनमानी तरीके से दिनांक 27-12-2016 को अपने करीबी लोगों को प्राथमिकता देते हुए वरीयता सूची प्रकाशित कर दी गई ताकि विश्विद्यालय में भारी पैमाने पर भ्रष्टाचार किया जा सके।विवाद स्पद एवम फर्जी डिग्री धारी कुलपति अरविंद अग्रवाल की विदाई के बाद भी इस मामले को सुधारा नही गया। वर्तमान कुलपति की नियुक्ति के बाद भी वरीयता सूची को नियमों के खिलाफ ताक पर रखकर दिया गया। नए कुलपति के समय में दिनांक 17-10-2019 को विश्विद्यालय के वर्तमान ओएसडी डॉ पद्माकर मिश्रा ने एक नया नोटिस जारी किया गया एवम उसमे भी पुनः वरीयता कर्म बनाने के लिये के नियम को जिक्र किया गया और 18-11-2019 तक आपत्ति उठाने का समय दिया गया। मगर बहुत सारे शिक्षकों के शिक़ायतपत्र भेजने के बाद भी ओएसडी नव तानाशाही रवैया अपनाते हुए एवंम बिना अंतिम तिथि के इंतजार करते हुए फर्जी वरीयता क्रम के अनुसार अपने चहेतों को अधिशासी परिषद का सदस्य चुना। इसके बाद भी शिक्षकों के द्वारा ओएसडी को आपत्तिपत्र सौंपा गया मगर अभी तक कोई जवाब नही आया और प्रशासन अब आनन फानन में 01-12-2019 को अकादमिक परिषद और 2-12-2019 को अधिशासी परिषद की बैठक करने जा रही है। इतनी जल्दबाजी में मीटिंग वर्तमान में हुई नियुक्तियों में गड़बड़ी की आशंका जताती है।