शिक्षक की भूमिका में जिलाधिकारी

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दिलीप कुमार

कैमूर – देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा चलाए गए स्वच्छता अभियान के कड़ी में कैमूर के जिलाधिकारी डॉ. नवल किशोर चौधरी ने एक कदम बढ़ाते हुए पूरे कैमूर जिला को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के लिए अनेकों पहल करते रहे हैं एवं कैमूर वासियों को जागरूक करते रहे हैं। कभी साइकिल यात्रा तो कभी पदयात्रा लेकिन इसी कड़ी में आज कैमूर जिला अधिकारी छात्राओं के बीच स्वच्छता को लेकर शिक्षक नजर आए।

जिलाअधिकारी डॉक्टर नवल किशोर चौधरी जिले के दुर्गावती प्रखंड के राजकीय कृत कन्या मध्य विद्यालय में पहुंच कर लगभग घण्टों चले खुले में शौच मुक्त करने को लेकर कार्यक्रम में शिक्षक की भूमिका में नजर आए।

जिलाधिकारी ने बच्चियों को बताया कि खुले में शौच मुक्त करने से अनेकों फायदे हैं साथ ही उन्होंने स्वच्छता को लेकर कई नारे भी लगवाएं।

वहीं छात्रा छाया ने बताया कि जिलाधिकारी ने सीटी बजाने का मुख्य उद्देश्य भी बताया कि जो लोग खुले में शौच करते हैं वह तो उन्हें सीटी बजा कर उन्हें जागरुक करना है कि आप खुले में शौच नहीं करें और साथ ही अपने घर में शौचालय बनवाए और शौचालय का उपयोग अपने परिवार के सभी सदस्यों को बोले कि उसका उपयोग करें आज जिसके घर शौचालय नहीं है उसको सरकार प्रसारण की राशि देती है। उस पैसा से अपना शौचालय बनाए जिससे जिला खुले में शौच मुक्त हो।

वही छात्रा नीतू कुमारी ने बताया कि जिलाधिकारी ने बताया है कि दूसरे को जागरुक करना है कि कि खुले में शौच ना करें उसको प्रेरित करेंगे अपने घर शौचालय बनवाइए और उनको हम लोग समझाएंगे और मना करेंगे कि खुले में शौच ना जाए। जिसके घर शौचालय नहीं है जागरुक करके शौचालय बनवाई है और जिलाधिकारी ने हम लोग को बाल सेना नाम दिया है।

साथ में जिलाधिकारी ने बताया कि हमने अपने बच्चों को गांधीगिरी के विषय में बताया। लोगों से अनुरोध करें, आज विनती करना है कि समझाना है और अब ताली पीटने की जरूरत है समझाने के बाद लोग बाहर जाते हैं उनके घर पर जाकर थालीपीठ है जिससे लोगों में जागरूकता होगी कि खुले में शौच नहीं जाना है। बच्चों का समूह है, एक व्यक्ति दो बच्चे को सिटी प्राइड किया जाएगा। जो सिटी के माध्यम से बजाकर बताएंगे कि हम जग गए हैं। आप भी जग जाइये और दूसरे बच्चे समूह के बच्चे के तीसरे समूह के सभी बच्चे मिलकर समाज को जागरुक बनाएंगे। जैसे खुले में लोग शौच न करें जिससे अनेकों रोग होता है।

साथ ही विद्यालय में बच्चों द्वारा आर्ट बनाया गया था जिसमें हर घर में शौचालय दिखाया गया था जिससे एक आकर्षण का केंद्र बना रहा।