शिक्षा को महत्व देने वाले देश ही तेजी से प्रगति करते हैं – राज्यपाल

197
0
SHARE

पटना:- ‘‘जो समाज और देश शिक्षा को सर्वाधिक महत्त्व देते हैं, वही तेजी से प्रगति करते हैं। तालीम से बढ़कर दूसरी कोई ताकत नहीं। शिक्षा मनुष्य को नैतिक मूल्यों और आदर्शों के प्रति आस्थावान बनाती है।’’ उक्त बातें, राज्यपाल सत्य पाल मलिक ने स्थानीय बापू सभागार में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के ‘12वें दीक्षान्त समारोह’ को अध्यक्षीय पद से संबोधित करते हुए व्यक्त की। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल मलिक ने कहा कि आज बिहार में महिला सशक्तीकरण के प्रयासों का काफी सार्थक नतीजा दिखाई पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि 29 स्वर्णपदक प्राप्तकार्ताओं ओं में छात्राओं की संख्या 20 होना यह साबित करता है कि छात्राएँ अपनी प्रतिभा का समुचित सदुपयोग कर रही हैं। उन्होंने आवाहन किया कि छात्रों को भी पढ़ाई में मन लगाकर कम-से-कम बराबरी पर जरूर आना चाहिए।

राज्यपाल ने पिछले दिनों राजभवन में सम्पन्न कुलपतियों की बैठक का हवाला देते हुए कहा कि विश्वविद्यालयों एवं महाविद्यालय कोे अपने सभी भवनों में छात्राओं के वाशरूम की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि इनके बगैर नये महाविद्यालयों को प्रस्वीकृति नहीं दी जाएगी।मलिक ने कहा कि छात्राओं के लिए गर्ल्स काॅमन रूम, बायोमैट्रिक पद्धति से हाजिरी आदि व्यवस्था भी सभी विश्वविद्यालय एक निर्धारित समयावधि में सुनिश्चित करायेंगे। उन्होंने कहा कि सभी विश्वविद्यालयों को आगामी वर्ष का एकेडमिक और परीक्षा कैलेण्डर शीघ्र तैयार कर उनका कार्यान्वयन सुनिश्चित करने को कहा गया है। राज्यपाल ने नालंदा खुला विश्वविद्यालय का एकेडमिक सत्र समय पर संचालित करने के लिए कुलपति एवं सभी अधिकारियों को धन्यवाद दिया।

राज्यपाल ने कहा कि कोई भी मुल्क आतंकी गतिविधियों, सैनिक-पराजय या राॅकेटों के बल-बूते नष्ट नहीं किया जा सकता, बल्कि वह संकटग्रस्त तभी होता है, जब वहाँ की शिक्षा-व्यवस्था छिन्न-भिन्न हो जाए। उन्होंने कहा कि ‘द्वितीय विश्वयुद्ध’ के समय, ब्रिटेन ने विभिन्न प्रक्षेत्रों के सालाना बजट में कमी कर दी थी, परन्तु उसने शिक्षा के अपने बजट में कोई कमी नहीं की थी। ब्रिटेन के तत्कालीन प्रधानमंत्री का तब कहना था कि पुल, मकान, सड़कें, फैक्ट्रियाँ आदि तो दुबारा बन सकती हैं, परन्तु शिक्षा-बजट में कमी करने पर एक पूरी पीढ़ी बर्बाद हो जायेगी और मुल्क तबाह हो जायेगा।
राज्यपाल ने आाश्वस्त किया कि राजभवन विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को लेकर कोई भी हस्तक्षेप की मंशा नही रखता और उनकी समस्याओं को लेकर भरपूर सहयोग का नजरिया रखता है।

राज्यपाल ने कहा कि हावर्ड, कैम्ब्रिज, कोलम्बिया, कैलिफोर्निया, शिकागो और एम॰आई॰टी॰ अमेरिका जैसे विश्वविद्यालयों के पूर्ववर्ती विद्यार्थियों को काफी संख्या में ‘नोबेल पुरस्कार’ मिले हैं, जबकि भारत में ही नोबेल पुरस्कार काफी कम लोगों को मिल सके हैं। उन्होंने कहा कि हमारे विश्वविद्यालयों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के विकास पर जोर देना चाहिए। कार्यक्रम में ‘दीक्षांत-भाषण’ देते हुए मेघालय के राज्यपाल गंगा प्रसाद ने कहा कि नालंदा खुला विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों को दहेज-उन्मूलन के लिए जागरूकता अभियान को तेज करने में सहयोग करना चाहिए।

कार्यक्रम में नालंदा खुला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो॰ आर॰के॰ सिन्हा ने विश्वविद्यालय का प्रगति प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। दोनों राज्यपालों ने विद्यार्थियों के बीच स्वर्ण-पदकों एवं डिग्रियों का वितरण किया। कार्यक्रम में 98 वर्षीय राजकुमार वैश्य को भी स्नातकोत्तर डिग्री प्रदान की गई। कार्यक्रम में धन्यवाद-ज्ञापन कुलसचिव डाॅ॰ एस॰पी॰ सिन्हा ने किया।