‘समाज का हाथ, भिक्षुकों के साथ’ विषय पर आयोजित हुई मिनी मैराथन दौड

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भिक्षुकों ने भी लिया भाग़, भिक्षावृत्ति समाप्त करने हेतु ली गई सामूहिक शपथ

पटना।12 फरवरी,2017: राज्य से भिक्षावृत्ति के अभिशाप को मिटाने के लिए समाज के हर वर्ग को आगे आना होगा, यह केवल सरकार की ही नहीं, बल्कि पूरे समाज की जिम्मेदारी है। जन साधारण का यह दायित्व है कि वह भिक्षुकों को प्रत्यक्ष भिक्षा न देकर उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने के योग्य बनाएं। यह विचार श्री विजय प्रकाश, अध्यक्ष-बिहार विद्यापीठ के हैं। वह आज प्रातः यहां बुद्धा स्मृति पार्क में ‘समाज का हाथ, भिक्षुकों के साथ’ विषय पर आयोजित मिनी मैराथन के उद्घाटन के अवसर पर मुख्य अतिथि के रुप में प्रतिभागियों को संबोधित कर रहे थे। इस राज्य स्तरीय दौड़ का आयोजन ‘सक्षम’ और चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना (सी.आई.एम.पी) के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। श्री प्रकाश ने कहा कि भिक्षावृत्ति के कुचक्र को क्रमबद्ध प्रयासों से तोड़ा जा सकता है। ‘मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना’(एमबीएनवाई) इसी दिशा में एक प्रयास है, जिसका संचालन समाज कल्याण विभाग की सोसाइटी ‘सक्षम’ द्वारा किया जा रहा है।

भिक्षावृत्ति के क्रमिक उन्मूलन हेतु जन-जागरुकता लाने के उद्देश्य से ‘सक्षम’(समाज कल्याण विभाग), बिहार सरकार एवं चन्द्रगुप्त प्रबंधन संस्थान, पटना (सी.आई.एम.पी) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित 9 कि.मी. लंबे मैराथन की शुरूआत आज सुबह सातः बजे बुद्धा स्मृति पार्क, पटना से हुई। शहर के मुख्य स्थलों से गुजरते हुए यह दौड़ पटना वन माॅल परिसर में समाप्त हुई जहां भिक्षावृत्ति उन्मूलन के मुद्दे पर एक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया। नाटक के माध्यम से सक्षम द्वारा भिक्षावृत्ति निवारण हेतु समाज कल्याण विभाग द्वारा किए जा रहे विभिन्न प्रयासों पर प्रकाश डाला गया तथा उपस्थित जनों को भिक्षुकों के प्रति सकारात्मक रवैया अपनाने एवं भिक्षावृत्ति उन्मूलन में अपनी-अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया गया। उद्घाटन के अवसर पर संगीतकार एवं भोजपुरी फिल्म अभिनेता दीप श्रेष्ठ भी उपस्थित थे।

मैराथन में लगभग 500 लोगों ने भाग लिया जिनमें खिलाड़ीगण, छात्रगण, ‘मुख्यमंत्री भिक्षावृत्ति निवारण योजना’ के तहत पटना में संचालित पुनर्वास केन्द्रों के लाभार्थीगण एवं समाज के विभिन्न वर्गाें के लोग शामिल थे। दौड़ के पुरुष वर्ग में दानापुर के रविशंकर अग्रवाल को प्रथम स्थान प्राप्त हुआ। द्वितीय एवं तृतीय स्थान क्रमशः पटना के सागर थापा एवं नालंदा के शंभुकुमार को प्राप्त हुआ। महिला वर्ग में पटना की विजया कुमारी को प्रथम स्थान, सौम्या कुमारी एवं पूजा कुमारी को क्रमशः द्वितीय एवं तृतीय स्थान प्राप्त हुए। भिक्षुकों के वर्ग में शान्ति कुटीर महिला पुनर्वास केन्द्र की लाभुकगण प्रीति एवं आरती को क्रमशः प्रथम एवं द्वितीय स्थान एवं बसेरा केन्द्र की विनीता को तृतीय स्थान प्राप्त हुए। एक विशेष श्रेणी में पटना के दिव्यांग रविन्द्र कुमार को भी सम्मानित किया गया। उन्होंने 9 कि.मी. की दौड़ ट्राइसायकिल पर पूरी की। भिक्षावृत्ति को मिटाने का प्रयास करने की सामूहिक शपथ के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ।

इस अवसर पर ‘सक्षम’ के वरीय प्रशासी पदाधिकारी, श्री के.के.सिन्हा ने बताया कि गत वर्ष भी पटना में इस प्रकार के कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसे इस वर्ष अन्य जिलों में भी आयोजित करने की आवश्यकता महसूस की गई ताकि भिक्षावृत्ति निवारण के संदेश विभिन्न जिलों में भी दिए जा सकें। इसी आवश्यकता के दृष्टिगत एमबीएनवाई के तहत आच्छादित छः अन्य जिलों-गया, नालंदा, रोहतास, दरभंगा, मुजफ्फरपुर एवं पूर्णिया में इस प्रकार का कार्यक्रम दिनांक 26 फरवरी, 2017 (रविवार) को एमबीएनवाई के तहत संचालित महिला पुनर्वास केन्द्रों एवं पुरुष पुनर्वास केन्द्रों के माध्यम से आयोजित किया जाएगा।
ज्ञातव्य है कि राज्य में भिक्षावृति के क्रमबद्ध निवारण तथा भिक्षुकों को सम्मानजनक जीवन जीने योग्य बनाने के उद्देश्य से सक्षम द्वारा मुख्यमंत्री भिक्षावृति निवारण योजना (एम.बी.एन.वाई) का संचालन किया जा रहा है। कार्यक्रम का अंतिम लक्ष्य एक ऐसे समाज की स्थापना करना है जिसमें कोई भिक्षुक नहीं हो बल्कि निर्धनतम व निराश्रित व्यक्तियों/परिवारों को भी सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर प्राप्त हो। समाज कल्याण विभाग, बिहार द्वारा ‘सक्षम’, पटना के मार्गदर्शन में उक्त योजना, बिहार के सात जिलों में संचालित की जा रही है । इन जिलों में ‘शान्ति कुटीर’ नामक महिला पुनर्वास केन्द्र एवं ‘सेवा कुटीर’ नामक पुरुष पुनर्वास केन्द्र कार्यरत हैं। इन केन्द्रों के माध्यम से चिन्हित लाभुकों को बुनियादी सुविधाएं निःशुल्क प्रदान की जाती हैं। इसके अतिरिक्त पटना स्थित ‘कौशल कुटीर’ नामक प्रशिक्षण केन्द्र के माध्यम से चिन्हित लाभुकों को रोजगारपरक प्रशिक्षण देकर और रोजगार से जोड़कर उन्हें आर्थिक रुप से सशक्त किया जाता है। छोटे-मोटे माध्यमों से जीविकोपार्जन कर रहे आश्रयहीन अति निर्धन जनों हेतु पटना में ‘बसेरा’ नामक दो केन्द्रों की स्थापना भी की गई है।

पुनाइचक क्षेत्र में आश्रयहीन परिवारों के लिए यह व्यवस्था की गई है जबकि मीठापुर स्थित बसेरा केन्द्र आश्रयहीन पुरुषों के लिए है। सार्वजनिक स्थलों पर आमजनों द्वारा भिक्षुकोें को दी जाने वाली प्रत्यक्ष भिक्षा से भिक्षावृत्ति को मिल रहे प्रश्रय पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से ‘सक्षम’ द्वारा ‘भिक्षुक सहायता कोष’ नामक एक विशेष बैंक खाता खोला गया है जिसमें एकत्रित राशि भिक्षुक/अति निर्धनजनों के कल्याणार्थ खर्च की जाएगी। राशि के प्रयोग का ब्यौरा सक्षम की वेबसाइट www.ssupsw.in पर उपलब्ध होगा। इससे सार्वजनिक स्थलों पर भिक्षावृत्ति पर पाबंदी लगेगी। इस कार्य में समाज के विभिन्न वर्गो के सहयोग की आवश्यकता है। यदि आमजन श्राद्ध, बरसी जैसे पुनीत अवसरों पर भिक्षुकों को सीधे दान न देकर उन्हें अपने पैरों पर खड़े होने में सहायता करें तो आने वाले समय में राज्य से भिक्षावृत्ति का निवारण संभव हो सकेगा, भिक्षुकगण सम्मानजनक एवं आत्म-निर्भर जीवन जी सकेंगे। इस दिशा में उनके मार्गदर्शन हेतु उन्हें ‘सेवा कुटीर’,‘शांति कुटीर’ ‘कौशल कुटीर’ एवं ‘बसेरा’ के बारे में बताकर अथवा स्वयं इन केन्द्रों से संपर्क कर भिक्षुकों को बेहतर जीवन दिलाने का रास्ता बनाया जा सकता है।

यह सारे प्रयास भिक्षुकों की उनके परिवार/समाज में सम्मानजनक वापसी को लक्षित करते हैं। योजना का उद्देश्य निराश्रित व्यक्तियों तथा परिवारों को भिक्षावृति में जाने से रोकना भी है।