समेकित कीट प्रबंधन अपनाकर किसान करें कीट व्याधि पर नियंत्रण -डाॅ॰ प्रेम कुमार

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पटना- कृषि मंत्री डाॅ॰ प्रेम कुमार ने कहा कि साठ के दशक से आधुनिक कृषि तकनीक अपनाने से एक तरफ कृषि उत्पादन में आशातीत बढ़ोत्तरी हुई है, तो दूसरी तरफ विगत चार-पाँच दशकों में कीट एवं व्याधि के नियंत्रण हेतु कृषि रसायनों का व्यवहार भी बढ़ा है। अनावश्यक एवं अंधाधुंध कीटनाशी रसायनों के व्यवहार से कीटों में प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि, जैविक नियंत्रण के कारकों का विनष्टीकरण, कृषि पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ना, पर्यावरण प्रदूषण के साथ ही उत्पादन में खर्च की बढ़ोत्तरी के कारण कृषि में शुद्ध लाभ की कमी आई है। पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने एवं वातावरण की सुरक्षा की आवश्यकता को ध्यान में रखकर बिहार सरकार द्वारा जैविक खेती परियोजना अन्तर्गत सभी मौसम में समेकित कीट प्रबंधन कार्यक्रम अपनाया गया है, ताकि कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ कृषि उपज की गुणवत्ता एवं पर्यावरण प्रदूषण आदि में सुधार हो सके।

मंत्री ने कहा कि समेकित कीट प्रबंधन में बीजोपचार सामग्री का महत्त्वपूर्ण स्थान है। इससे न्यूनतम लागत में फसलों को बीज एवं मिट्टी जनित बीमारियों तथा कीटों से प्रारंभिक सुरक्षा मिलती है। कृषि विभाग, बिहार सरकार द्वारा बीज टीकाकरण हेतु अनुदान उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त फेरोमोन ट्रैप (गंधपास) के उपयोग से बगैर कीटनाशी के व्यवहार किये कुछ कीटों यथा धान का धड़छेदक, बैगन का पिल्लू, चना का फलीछेदक आदि के नर कीटों को नष्ट कर देने से हानिकारक कीट की अगली पीढ़ी की जनसंख्या नियंत्रित होने लगती है तथा कालान्तर में कीट से फसल का नुकसान नहीं होता है।

डाॅ॰ कुमार ने कहा कि इस कार्यक्रम के अन्तर्गत किसान को फेरोमेन ट्रैप लागत मूल्य का 90 प्रतिशत अनुदान 900 रू0 प्रति हेक्टेयर अधिकत्तम 2 हेक्टेयर का लाभ ले सकते हैं। साथ ही जैव कीटनाशी पर भी लागत मूल्य का 50 प्रतिशत अधिकत्तम 500 रू0 प्रति हेक्टेयर का लाभ दिया जा रहा है।