सवर्णों ने किया मंत्रियों के घर का घेराव

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पटना – आज स्वर्ण सेना ने एससी/एसटी एक्ट को लेकर एक मुहिम छेड़ दिया है जिसको लेकर सवर्ण समाज के सभी लोग एक मंच पर आकर अब सूबे के सूबेदारों को घेरने का काम कर रहे. इस क्रम में उन्होंने आज सवर्ण जाति के बिहार सरकार के मंत्रियों के घरों का घेराव किया. घेराव किये गए मंत्रियों में जय कुमार सिंह और विनोद नारायण झा शामिल हैं, ये दोनों बिहार सरकार में मंत्री हैं और दोनों सवर्ण समुदाय से हैं. इस मुद्दे पर सवर्ण सेना का कहना है कि अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए जो अध्यादेश जारी किया गया है उससे वे खुश नहीं हैं और इस कारण से सवर्ण समाज के लोग सभी सवर्ण मंत्रियों के घरों का घेराव कर रहे हैं. उनका कहना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले को नकार कर जो फैसला लिया गया है, वो सवर्ण जाति के लिए हितकारी नहीं है इसमें बदलाव की आवश्यकता है और ये बदलाव तभी मुमकिन है जब हमारे जनप्रतिनिधियों द्वारा इस मुद्दे को उठाया जायेगा. इस कारण से सवर्ण सेना ने आज सवर्ण मंत्रियों के घरों का घेराव किया.

मंत्री जय कुमार सिंह ने कहा कि एससी-एसटी ऐक्ट लागू हुआ है, उसमें मैं सवर्णों का आंदोलन देख रहा हूं वो किसलिए है. सवर्णों के विरूद्ध तो कोई कानून लगा नहीं है. इसमें एससी-एसटी के अलावे जिस वर्ग के लोग कुछ गलत करेंगे उसपर एससी-एसटी कानून लगेगा. मैं इनलोगों को यही समझाने का प्रयास कर रहा हूं कि मुझे समझ नहीं आ रहा है इसके विरूद्ध सवर्ण आंदोलन कैसे खड़ा हो गया. इसका बहुत खराब मैसेज जाएगा. सभी आंदोलनकारियों को मैं यहीं समझाने का प्रयास किया इस कानून के विरूद्ध में जो सवर्ण आंदोलन खड़ा कर रहा है, इसके पीछे तर्क हम नहीं देख रहे हैं कि सवर्ण क्यों गुस्से में हैं. ये कानून सवर्णों के विरूद्ध में नहीं है. ये कानून पहले से था, सुप्रीम कोर्ट ने इसपर रोक लगाया. इसके बाद सवर्ण आंदोलन की वजह कहें या सरकार की नई सोच कहें. जो अध्यादेश लाया गया है इसके विरूद्ध आंदोलन खड़ी की गई है. इसके विरूद्ध अगर सारे लोग उठते तो हम एक तर्क देखते. लेकिन सिर्फ सवर्ण गुमराह होकर इस आंदोलन को खड़ा करते हैं.

उन्होंने कहा कि सवर्ण आरक्षण की बात करते हैं तो मैं भी उसपर बहुत पहले बोल चुका हूं. मैंने सभी आंदोलनकारियों को बताया कि सवर्ण आरक्षण की बात थी तो मैंने कहा कि किसी के आरक्षण को छेड़छाड़ किए बिना, सवर्णों को सत्तर साल की आजादी में बहुत सी परिस्थितियां बदली हैं. ऐसी परिस्थिति में जरूर एक राष्ट्रीय आयोग बने और एक सर्वे हो. यदि सर्वे में रिपोर्ट आता है तो सवर्णों में भी कुछ अतिपिछड़ा व दलित जैसे हो गए हैं, उनको भी आरक्षण मिलना चाहिए. उसके लिए एक अध्यादेश जरूर आए. इसका मैं जरूर समर्थन करूंगा. जो सुप्रीम कोर्ट कह रही है कि 50% से अधिक आरक्षण नहीं देंगे तो अन्य चीजों में अध्यादेश लाकर सीमा को तोड़ा जा रहा है तो आरक्षण के लिए क्यों नहीं. यदि एससी-एसटी कानून के चलते सवर्ण नोटा में वोट देना चाहते हैं तो हम समझते हैं कि वो गुमराह हो रहे हैं. हमने उन्हें समझाने का प्रयास किया कि लड़ाई ऐसी हो जहां किसी को नुकसान न हो और मुझे लाभ हो. ये लड़ाई होनी चाहिए.