सवर्ण आरक्षण पर आरजेडी का विरोध

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पटना – अगर 15 फ़ीसदी आबादी को 10 प्रतिशत आरक्षण तो फिर 85 फ़ीसदी आबादी को 90 प्रतिशत आरक्षण हर हाल में मिलना चाहिए। आखिर 10% आरक्षण किस आयोग और सर्वेक्षण की रिपोर्ट के आधार पर दिया जा रहा है? सरकार इस बात को विस्तार से बतायें। यह रट लगाए बैठे हैं बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव। पिछले दिनों तेजस्वी ने यह बात अपने ट्विटर हैंडल से ट्वीट की थी। हालांकि वो खुले मंचों से भी सवर्ण आरक्षण का विरोध करते आए हैं। वहीं कल राजद के एमपी जयप्रकाश यादव ने भी इस बिल का लोकसभा में विरोध किया। वहीं आज राज्यसभा में आरजेडी के राज्यसभा सांसद मनोज झा ने भी बिल विरोध किया।

देश का चौकीदार एक जूमलेबाज है। यह एक महज चुनावी स्टंट है। तीन राज्यों में करारी शिकस्त के बाद इन्हें समान्य वर्ग के लोग याद आ रहे हैं। चार वर्ष आठ महीनों में इन्हें सवर्णों की याद नहीं आई। यह सारी बातें महागठबंधन के नेता कर रहे हैं। जब यही बातें हमने आरजेडी के नेताओं से ऑन कैमरा रखने को कहा तो वो कतराते नजर आये। इससे यह साफ है कि मोदी जी ने चुनाव के आखिरी वक्त, जब कुछ ही महीने शेष बचे हुए हैं उसमें मास्टरस्ट्रोक खेल दिया है। जो विपक्ष के लिए आस्तीन का सांप साबित हो सकता है। उन्हें ना चाहते हुए भी इस बिल को एक्सेप्ट करना पड़ रहा है। वैसे देश की बड़ी पार्टी कांग्रेस ने इसे स्वीकार कर लिया है।

वहीं बिहार के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री राजद सुप्रीमो लालू यादव के बड़े बेटे तेजप्रताप यादव का सॉफ्ट रवैया रहा उन्होंने सवर्णों को 10% आरक्षण मिलने पर उन्हें शुभकामनाएं दी और आगे उन्होंने कहा, हमारी पार्टी राजद ने जो 85% आरक्षण की मांग की है, उसको भी लागू किया जाए। चुनाव आता है तो यह लोग इस तरह का काम करते हैं, पहले गरीब आदमी के बारे में सोचतें भी नहीं थें। लेकिन यह हुआ है तो अच्छी बात है।

वहीं एनडीए के घटक दल जदयू के प्रवक्ता राजीव रंजन ने राजद पर जमकर हमला बोला है वो कहते हैं, सवर्णों को राजद से बहुत उम्मीद भी नहीं है। जिस तरह से राजद पूर्व में भी समाज को बांटने का काम करती आई है, उनसे सवर्ण आरक्षण पर सकारात्मक बातें सुनना हैरत होगी। इसलिए उनका बयान अचरज पैदा करने वाला नहीं है। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि 1990 में तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह ने जब मंडल कमीशन का तोहफा दिया उस समय उन्होंने आर्थिक रूप से जो पिछड़े सवर्ण थे उनके लिए 10% आरक्षण की घोषणा की थी। उस समय लालू प्रसाद बिहार के मुख्यमंत्री हुए थे, वीपी सिंह का बड़ा योगदान था लालू प्रसाद को राजनीति में एक ऊंचाई प्रदान कराने में लेकिन उन्होंने बिहार में ऐसा कोई भी प्रयास नहीं किया ना केंद्र में सवर्णों को आरक्षण देने की वकालत की।

वहीं भाजपा के नेता और बिहार सरकार में मंत्री विनोद नारायण झा ने आरजेडी पर कटाक्ष करते हुए कहा, राजद की यूएसपी रही है, भूरा बाल साफ करो। वह इसी की राजनीति करता है। जातीय भेदभाव, जातीय उन्माद यह राजद का वैचारिक आधार है। भाजपा और एनडीए सबका साथ सबका विकास पर विश्वास करती है। 10% आरक्षण आर्थिक आधार पर सवर्णों को देने का निर्णय लिया गया है, यह ऐतिहासिक फैसला है। अन्य समाज के भी जो अगड़ी जाति के लोग हैं, उनको भी इसका लाभ मिलेगा। बाकि दलों ने भी इसका समर्थन किया है। भगवान राजद को सद्बुद्धि दे तो अच्छा होता।

एनडीए में सहयोगी लोजपा के अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने भी सदन में चर्चा के दौरान सवर्ण आरक्षण बिल का समर्थन किया है और इसके लिए पीएम को बधाई भी दी है। केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान ने कहा, हमने सबका साथ-सबका विकास का नारा दिया था, यह उसी की ओर एक कदम है। आगे उन्होंने कहा कि मैं आरक्षण के समर्थन में हूं लेकिन निजी क्षेत्र और न्यायपालिका में भी आरक्षण मिलनी चाहिए।

आगे अपने संवाद में केंद्रीय मंत्री ने कहा, आरक्षण विरोधियों को आरक्षण देने से आरक्षण मजबूत होगा। अगर आर्थिक रूप से कमजोर सवर्णों को आरक्षण देने से ओबीसी और एससी/एसटी के आरक्षण देने पर कोई फर्क नहीं पड़ता तो इसमें बुराई क्या है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, सरकार को हमेशा दलित विरोधी कहा जाता था, लेकिन सरकार ने SC/ST ऐक्ट में सुधार करके लोगों को मजबूत किया।