सात शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि

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सात शहीदों के प्रति श्रद्धांजलि

आज घरों में चैन काटते भूल गये उन वीरों को
कलम आज तो नमन करो उन आजादी के हीरों को।
घर से निकले विद्या पाने पटना के स्कूलों में
देखा पहले मूक पड़ी थी भारत माता शूलों में।

द्वन्द्व बड़ा था कर्म – धर्म में बतलाने को कौन खड़ा
विद्या पाना कर्म मगर, था आजादी का धर्म बड़ा।
कर्म स्वार्थ का डिगा न पाया राष्ट्र धर्म की आन को
किशोरों ने बस ठान लिया था आजादी दो जान लो।

नेहरू, पटेल, आजाद चले आगे – आगे थे गाँधी जी
९ अगस्त सन १९४२ “भारत छोड़ो ” की आंधी थी।
नेतागण तो जेल गए, अब युवकों की बारी थी
झंडा लेकर कूद पड़े तब आजादी ही प्यारी थी।

पटना में सचिवालय पर हम झंडा फहराएंगे
भारत देश हमारा है, आजादी हम लाएंगे।
अंग्रेजों तुम भारत छोड़ो बच्चा – बच्चा बोल रहा
सूर्य अस्त से सूर्य उदय का अब सिंहासन डोल रहा।

चले जगपति, रामगोविंद औ ‘ उमाकांत दौड़े आए
आगे आगे राजेंदर ,रमानन्द के साथ आए।
उधर सतीश ने झंडा थामा और सभी को ललकारा
देवीपद ने हांक लगाई , झंडा ऊंचा रहे हमारे।

छात्रों का दल जूझ रहा था अंग्रेजी सरकार से
झण्डा आखिर फहराया पर बाहर की दीवार पे।
सचिवालय पर झंडा फहरा कर ही हम जाएंगें
आजादी के खातिर हम सब लाठी, गोली खाएंगें।

और तभी आदेश हुआ बदमाशों को गोली मारो
सीना तन बढ़े आगे, भारत माता के प्यारे।
हुई फायरिंग डटे रहे औ खाई सीने में गोली
अंतिम दम तक निकली मुंह से आजादी की ही बोली।

देश का ऋण चुकाया तुमने देखा चाँद – सितारें ने
तेरा ऋण चुकाऊं कैसे शब्दों के उपहारों से।

‘ भारत छोड़ो’ आन्दोलन के अमर शहीद पुस्तक से प्रकाशित अंश