सामान्य से कम हुई बारिश, धान की खेती प्रभावित

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लखीसराय – जिले में इस बार काफी कम बारिश हुई है। बारिश का समय अब एक-एक दिन निकल रहा है। बारिश नहीं होने से किसानों के चेहरे पर फसल उत्पादन की चिंता सताने लगी है। मई-जून के महीने में बारिश नहींं होने और मानसून के कमजोर पड़ने से इस साल खरीफ की खेती करने में किसानों को काफी आर्थिक परेशानी झेलनी पड़ी है। जिसके चलते इस वर्ष किसानों ने लक्ष्य से लगभग 8 प्रतिशत कम खरीफ की खेती की है। खरीफ सीजन की मुख्य फसल धान की रोपनी के समय भी मानसून ने धोखा दिया और बारिश नहीं होने से किसानों को निजी पंपसेट में महंगे डीजल डालकर रोपनी करनी पड़ रही हैं।

जिले भर में 50 फीसद सामान्य से भी कम बारिश हुई है। दो-तीन दिनों में यदि अच्छी बारिश नहीं हुई तो धान की खेती प्रभावित होगी। अब यदि बारिश होती है तो किसान को धान की कम अवधि का प्रवेध का उपयोग करना चाहिए। इससे रबी फसल के प्रभावित होने की संभावना कम होगी। मई के अंत तक जो बारिश होती है किसान नर्सरी में बीज देते हैं। स्थिति यह है कि जुलाई माह भी आधा बीत चुका है। फसल के उत्पादन में उपयुक्त समय चाहिए। डीजल पंपिंग सेट चला कर खेतों में पानी देने पर महंगा पड़ रहा है। बड़े किसानों के द्वारा डीजल पंपिंग सेट के माध्यम से खेती की जा रही है।

सामान्य से भी कम बारिश होने से किसानों के बीच मायुसी का महौल है। इसलिए कम वर्षा होने के कारण किसान को धान की सीधी बुआई करनी चाहिए। इससे कम खर्च में खेती हो सकती है। धान की खेती में अधिक पानी की जरूरत होती है।

धान फसल को है पानी की जरूरत 

धान की अच्छी पैदावार के लिए पौधे की जड़ों में कम से कम एक इंच पानी का रहना जरूरी है। धान की बलिया निकलने से पहले पौधे के जड़ों में गिली रहना जरूरी होता है। ऐसा नहीं होने से पौधे का ग्रोथ रुक गया है। खेतों के नमी की जगह अब दरारें दिखने लगी हैं। साथ ही धान पौधे पीले पड़ने लगे हैं। 

औसत से 50% कम हुई बारिश 

जिले में इस बार काफी कम वर्षा हुई है। मानसून के सक्रिय रहने से वर्ष अगस्त माह में थोड़ी अच्छी बारिश हुई। अपने यहां वर्षा काल 15 जून से 15 अक्टूबर तक माना जाता है। इस बीच 15 जून से 15 सितंबर तक मानसून सक्रिय रहता है। उसके बाद मौसम अनुकूल रहने व नक्षत्र के हिसाब से वर्षा होती है। जिले में इस वर्ष का सामान्य वर्षापात 1,023.8 मिलीमीटर है। जबकि अब तक 572.1 मिलीमीटर बारिश हुई है। इस साल औसत से 47 प्रतिशत कम बारिश हुई है। 

रबी फसल पर पड़ेगा बुरा प्रभाव 

अब किसानों की उम्मीद हथिया नक्षत्र पर टीकी हुई है। हथिया नक्षत्र में अच्छी बारिश हुई तो पैदावार अच्छी हो सकती है। इसके साथ ही खेतों में नमी रहने से ही रबी फसलों की खेती समय पर हो सकती है। हथिया नक्षत्र में अगर बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसल धान का उत्पादन 30 से 35 प्रतिशत तक घट जाएगा। वहीं रबी की खेती भी नमी नहीं रहने पर पिछड़ जाएगी। 

बारिश नहीं होने से उत्पादन पर कुछ असर पड़ेगा 

बारिश कम होने से उत्पादन पर कुछ असर पड़ेगा। अभी किसान अपने संसाधनों से ही सिंचाई कार्य में जूटे हुए हैं। भगवान पर सबकी निगाहें टिकी है। कतरनी धान की रोपनी में कमी आई है। कतरनी धान को बढ़ावा देने के लिए विभाग लापरवाही कर रही है। किसानों के बीच मायुसी का माहौल है।

किसानों को गुणवत्ता सुधारने के लिए किसानों ने फसल को नुकसान पहुंचने पर बीज निगम उसकी भरपाई करेगा। सिंचाई के लिए नहर में पानी नहीं हैं। लेकिन काफी कम बारिश नहीं होने के कारण किसानों को परेशानी हैं।

किसान मुकेश शाह के अनुसार सामान्य से काफी कम बारिश होने के साथ सिंचाई की समस्या है। इसके कारण धान की बुआई में देरी हो रही है। कम बारिश होने के कारण किसानों को धान की सीधी बुआई करनी चाहिए। परन्तु डीजल पंपिंग सेट चला कर खेतों में पानी देने पर महंगा पड़ रहा है।बड़े किसानों के द्वारा डीजल पंपिंग सेट के माध्यम से खेती की जा रही है।

हसनपुर गांव के अनुप मांझी ने बताया कि बारिश कम होने के कारण अब खेतों से गिली सूख रही है।