सीआरपीएफ 159 के द्वारा की गयी अनूठी पहल

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गया – सीआरपीएफ 159वीं बटालियन के द्वारा बाल सुधार गृह में अंतराष्ट्रीय विपासना मेडिटेशन केंद्र बोधगया के सहयोग से की जा रही है अनूठी पहल। वैसे बाल कैदी जो बचपन में अनजाने आपराधिक घटनाओं में संलिप्त रहे है जिसे आरोपी बनाया गया है। अपनी सजा के बाद तथा बाल सुधार गृह में बाल कैदियों के सर्वांगीण विकास के साथ-साथ सुधार हेतु एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का नेतृत्व सीआरपीएफ 159 वीं बटालियन के कमांडेट डॉ० निशांत कुमार ने किया। साधना के टिप्स विपासना केंद्र के द्वारा दी जा रही थी इस बीच सभी बाल सुधार गृह के बाल कैदियों ने साधना की। 

भारत की सबसे प्राचीन तकनीकों में से एक आत्मा शुद्धिकरण की प्रक्रिया है जो की सर्वभौमिक है और किसी भी धार्मिक संगठन से जुड़ा नहीं है। यह एक ऐसी क्रिया है जो ज्ञान पृरुषार्थ, योग, गुरु की कृपा के बिना सहजता से की जा सकती है। यह साधना सहज, सरल और सुगम है इससे अपने जीवन में कोई भी अपना सकता है तथा उठते-बैठते, सोते-जागते घर में या बाहर में किसी भी समय और अवस्था में कोई भी कर सकता है। विपासना से रोग, शोक तथा सांस्कारिक दुखो से छुटकारा मिलता है व मन को शांति प्रदान करने का एक प्रभावशाली उपकरण है। बाल कैदियों में सुधार की भावना को जागरूक करने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम का आयोजन किया गया है।