सुकमा नक्सली हमले में शहीद जवान के घर मातम, परिजनों का रो-रो कर बुरा हाल

414
0
SHARE

दरभंगा संवाददाता

छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए नक्सली हमले में शामिल शहीद हुए जवानों में एक जवान बिहार के दरभंगा जिले के अहिला गांव के रहनेवाले भी हैं। सबसे पहले नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 26 जवान के शहीद होने की खबर मीडिया में आई। उसके कुछ देर बाद हमले में दरभंगा के नरेश यादव के भी शहीद होने की खबर जैसे ही TV पर आई। नरेश यावद के परिवार सकते में आ गया । किसी को विशवास नहीं हो रहा था कि नरेश यादव अब इस दुनिया में नहीं हैं। वे मौत के काल में समा गये। थोड़ी देर बाद ही CRPF के कैम्प से नरेश यादव के परिवार को इसकी सूचना दी गयी । तब परिवार वालों को विशवास हुआ की नरेश यादव अब दुनिया छोड़ दिए हैं। नक्सली ने उन्हें अपने गोलियों से भून कर मौत के घाट उतार दिया है। इस खबर ने परिवार को झकझोर कर रख दिया । घर में सभी का रो-रो कर बुरा हाल है। पत्नी और शहीद नरेश के तीनों बच्चे का तो मानो दुनिया ही उजड़ गयी। नरेश यादव के पिता ने जहां अपना एकलौता पुत्र को खोया वहीं नरेश यादव की पत्नी की मांग सुनी हुई तो बच्चे से पिता का साया भी छीन गया। रोते-रोते पत्नी और बेटी तो कई बार बेहोश भी होती रही हैं। सगे संबंधी और ग्रामीणों का लगातार घर पर पहुंचकर परिवार को झूठी दिलाशा देने में लगे थे। तो कोई लगातार हो रहे देश भर के नक्सली हमले को लेकर केंद्र सरकार पर अपने गुस्से का भड़ास निकाल रहा था । अपने घर लम्बी छुट्टी बिताने के बाद नरेश यादव 10 जनवरी 2017 को ही CRPF कैम्प के लिए निकल गए। घर पर रहते उन्होंने अपने मकान को बनवाने का काम किया। दो दिन पहले भी अपनी पत्नी रीता देवी से बात करते हुए नरेश यादव घर के सभी सदस्य का हाल चाल पूछ अपने बच्चो के नामांकन के लिए अपनी पत्नी को कुछ दिशा निर्देश भी दिए। साथ ही कुछ दिनों बाद छूट्टी लेकर गांव आकर मकान को पूरी तरह तैयार करने की बात भी कही थी । तो दूसरी तरफ शहीद नरेश के पिता राम नारायण यादव सरकार के प्रति थोड़ी नाराज़गी व्यक्त करते हुए अपने बेटे के कुछ पुरानी बातों को याद करते हुए कहा कि उनका एकलौता बेटा हमेशा कहता था कि वह जहां भी ड्यूटी करता है वह जगह काफी पिछड़ा है और काफी खतरनाक भी है। हांलाकि नरेश यादव लगभग दो साल गुजार चूके थे। बस एक साल और उन्हे वहां ड्यूटी करना था । इसी बीच यह हादसा हो गया । वहीं परिवार के दूसरे सदस्य केंद्र सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि सरकार की खूफिया तंत्र फेल है। नक्सली के खिलाफ कोई ठोस कदम सरकार को उठाना चाहिए। साथ ही ग्रामीणों के सहयोग से नक्सलियों के द्वारा हुए इस हमले पर सवाल करते हुए कहा अगर ऐसी व्यवस्था हो तो लोग कर सकता है।