सुपौल जिला परिषद अध्यक्ष चुनाव से पहले मामला गरमाया, प्रमाण पत्र देने के बदले 5 लाख की माँग

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सुपौल – पिछले दिनों 31 अगस्त को तत्कालीन जिला परिषद अध्यक्ष पर लगाया गया अविश्वास प्रस्ताव कुल 25 सदस्यो के मत में से 13 सदस्यो के बहुमत से पारित हो गया। अब अविश्वास प्रस्ताव के समर्थन में मत देने के लिये एक नई बात सामने आयी है। जिसमे क्षेत्र संख्या 25 के पार्षद प्रदीप राम ने जदिया थाना में आवेदन देकर आरोप लगाया है कि सुपौल जिला परिषद क्षेत्र संख्या -2 के पार्षद शमशेर आलम ने अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करने के लिये मेरा मूल प्रमाण पत्र ले लिया था। क्योंकि जो भी सदस्य अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में थे, सभी को प्रलोभन देकर नेपाल ले जाया गया। लेकिन निजी कारण बस मैं नही जा सका। जिस बात पर पार्षद शमशेर आलम को मुझपर अविश्वास हो गया कि कही मेरे साथ धोखा न कर दे, उन्होंने मुझसे जिला परिषद का मूल प्रमाण पत्र देने को कहा कि तो हमने अपना विश्वास दिलाने के लिये अपना मूल प्रमाण पत्र दे दिया।

उन्होंने कहा कि अब अविश्वास प्रस्ताव पारित हुये लगभग 20 दिन हो गये, जब भी शमशेर आलम से अपना प्रमाण पत्र माँगता हूँ तो मुझे 5 लाख रुपये देने के लिये बोलता है। एक गरीब परिवार से आने वाला व्यक्ति अपना ही प्रमाण पत्र लेने के लिये कहाँ से 5 लाख रुपये लाऊंगा।

इस मामले में वादी प्रदीप राम ने थाने में आवेदन के साथ एक मोबाईल पर वार्ता का ऑडियो क्लिप का सीडी भी समर्पित किया है, जिसमें प्रदीप राम को प्रमाण पत्र देने के बदले शमशेर आलम के द्वारा 5 लाख रुपये की माँग की गई है।

वहीं जिला परिषद अध्यक्ष के प्रतिनिधि बबन सिंह ने इस मामले में जिला प्रशासन से माँग की है कि आगमी 25 सितम्बर को फिर से नये अध्यक्ष पद के लिये नामांकन होना है। यदि इस तरह से पार्षदों को डरा धमका के या प्रलोभन दे कर खरीद फ़रोख़्त की बात हो रही है जो काफ़ी निंदनीय है, प्रशासन जल्द से जल्द इस पर उचित कार्रवाई करे तभी निष्पक्ष चुनाव संभव हो पायेगा।