सुर्यकुंड तालाब में मां गंगा की हुई महाआरती

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औरंगाबाद – सांसद सुशील कुमार सिंह द्वारा पवित्र सूर्यकुंड तालाब के जीर्णोद्धार कराए जाने के बाद रविवार की शाम हुए महाआरती के दौरान यह कुंड अप्रतिम एवं मनोहारी दृश्यों का गवाह बन गया। औरंगाबाद के लोगों ने पहली बार माँ गंगे की आरती का नजारा देखा और लगभग एक घंटे तक चली इस आरती में अपनी आत्मा को परमात्मा के साथ समाहित कर लिया। सूर्यकुंड की सीढ़ियों पर जलते हुए दीपक की कतार देवलोक के सौंदर्य को भी मात कर रहे थे और मन को आंनदित करने एवं हृदय को सुकून देने वाली इस दृश्य को देखने के लिए हजारों की संख्या में महिला, पुरुषों एवं बच्चों की भीड़ उमड़ पड़ी। सूर्यकुंड तालाब तक पहुंचने वाले हर शख्स की हाथों में अपनी अपनी मान्यता के अनुसार दीपक दिखें और सबों ने दीप जलाकर माँ गंगा की आरती उतारी। सांसद एवं उनके समर्थकों के द्वारा आयोजित इस महाआरती में दूर-दूर से पहुंचे लोगों ने इस अलौकिक दृश्य को देखकर अपने जीवन को सार्थक बनाया।

पूरे विधि विधान से सांसद ने की आरती

महाआरती के लिए निर्धारित समय के अनुसार यजमान बने सांसद अपने बड़े भाई सुनील कुमार सिंह, माँ एवं पत्नी के साथ सूर्यकुंड पहुंचे और पवित्र तालाब में स्नान कर दशाश्वमेध घाट से आये विद्वान पंडित अतुल पांडेय, पवन मिश्रा, सोमेश्वर पाठक, उज्ज्वल तिवारी, रोहित त्रिपाठी एवं श्रीनाथ उपाध्याय के द्वारा पूरी निष्ठा के साथ भक्तिपूर्ण माहौल में संकल्प लिया एवं प्रथम आरती उतारी।उसके बाद ब्राह्मणों के द्वारा धूप, दीप एवं कपूर के साथ की गई महाआरती के नजारे को देखकर देववासी धन्य धन्य हुए। सूर्यकुंड पहुंचे श्रद्धालुओं ने पहली बार भाव आरती के साथ साथ चवर प्रक्रिया को देखा और इसे देखकर सांसद एंव उनके सहयोगियों के प्रति आभार प्रकट करते हुए शुभकामनाएं दी।

सूर्यकुंड को गंदगी से मुक्त करने का सांसद ने लिया था संकल्प

महाआरती के बाद श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए सांसद ने कहा कि एक वर्ष पहले जब वह सूर्यकुंड तालाब पहुंचे तो देखा कि सफाई का काम चल रहा था। लेकिन जब यह देखा कि सफाई के नाम पर यहां सिर्फ खानापूर्ति की जा रही है और इसमें जब जल भरने का समय आया तो वह काफी शर्मनाक था। उन्होंने उसी वक्त संकल्प लिया कि आस्था के नाम पर खिलवाड़ नही होने देंगे और कुंड के जल को गंदगी एवं बदबू से मुक्त करेंगे। ताकि देश के विभिन्न हिस्सों से आये छठ व्रतियों को स्वच्छ एवं निर्मल जल उपलब्ध कराएंगे। इसके बाद शुरू हुआ तालाब के उड़ाही का कार्य और कुंड के सारे काली मिट्टी की निकाल कर लगभग तीन फीट स्वच्छ बालू भरकर तालाब का जीर्णोद्धार किया। आज देव वासियों के सहयोग से कुंड की पवित्रता को बरकरार रखने में कामयाबी हासिल हुई। अब यह कुंड हमेशा निर्मल एवं स्वच्छ जल से परिपूर्ण रहेगा।

दो टैंकरों से कुंड में डाला गया गंगाजल

जिस वक्त ब्राह्मणों के द्वारा माँ गंगा का आह्वान कर महाआरती उतारी जाने लगी। उसी वक्त बक्सर के चौसा से लाये गए लगभग चालीस हजार लीटर गंगा जल सूर्यकुंड में प्रवाहित की गई। जैसे ही यह जल मंदिर छोर की तरफ से कुंड में छोड़ा गया उस वक्त वहां मौजूद श्रद्धालुओं ने अपनी अपनी हाथों से जल को स्पर्श किया और अंजुली में भर भरकर जल को उठाया व माँ की आराधना की। उस वक्त का नजारा भी अकल्पनीय था और श्रद्धालु इस अविस्मृत होने वाले पल को अपने अपने कैमरे में कैद कर रहे थे। श्रद्धालुओं ने कहा कि यह महाआरती देखकर जीवन धन्य हो गया।