सुशासन का मुंह खुला !

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सुशासन विरोधियों के लिए खुशखबरी। आर्थिक संकट के दौर से गुजर रहा है सुशासन। चुनावी सर्वे में सुशासन की बदहाली की कहानी का असर दिखने लगा है। थैलीशाह थैली खोलने में रुचि नहीं ले रहे हैं। तीर का निशाना चूकता देख थैलीशाहों ने भी मुंह मोड़ लिया है। वैसी स्थिति में सुशासन के रणनीतिकार धन उगाही में लग गये हैं। उनके निशाने पर नौकरशाही के साथ पार्टी के मालदार नेता के अलावा सांसद व विधायक भी बताये जा रहे हैं। सूत्रों की माने तो दो सांसदों को इसका जिम्मा सौंपा गया है। वसूली के लिए फोन किया जा रहा है। आदमी भेजे जा रहे हैं। राशि भी बता दी जा रही है। आनाकानी करने पर गाज गिराने की धमकी भी दी जा रही है। 
 
उधर चुनाव प्रचार के लिए पार्टी फंड से खर्च होने वाली राशि का हिसाब आयोग को देना पड़ता है। उम्मीदवार का भी प्रतिदिन खर्च है। हालांकि कुछ उम्मीदवार बिना पार्टी के सहयोग के चुनाव लड़ने में सक्षम हैं। लेकिन अधिकतर उम्मीदवारों को पार्टी से मदद की दरकार है।
 
वैसी स्थिति में पार्टी के नाम पर सत्ता-सुख भोगने वालों को अब कीमत चुकाने के लिए तैयार रहना चाहिए। रणनीतिकारों की ओर से चंदा के लिए फोन आए, इससे बेहतर है कि आप खुद ही मदद दे आएं। इसमें आपकी भी भलाई है और पार्टी की भी।
 
Source: Ahvaan