सृजन के बाद एक हजार करोड़ का तटबंध घोटाला

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आदित्यानंद आर्य की रिपोर्ट

सीतामढ़ी: बिहार में सृजन घोटाले की तरह एक नया घोटाला सामने आ रहा है। यह घोटाला है तटबंध निर्माण कार्य से संबंधित। जिसमें 36 सौ 8 करोड़ रुपया खर्च होने के बाद भी तटबंधो की हालत बेहद खराब है। सीतामढ़ी के एक समाजिक कार्यकर्ता ने पटना उच्च न्यायलय में एक जनहित याचिका दायर किया है जिसमें पटना हाई कोर्ट के आदेश पर पुरे निर्माण कार्य की उच्चस्तरीय जांच कराये जाने का आदेश दिया गया है। कोर्ट के आदेश पर जल संसाधन विभाग के कुल सात टीम जिसमें कुल 72 अधिकारी शामिल है, सीतामढ़ी और शिवहर पहुंचकर निर्माण कार्य की जांच कर रहे है।

पटना उच्च न्यायलय मे दायर जनहित याचिका में एच एस सी एल कंपनी पर यह आरोप लगाया गया है कि तटबंध निर्माण कार्य में विभागीय दिशा निर्देशो का ख्याल नहीं रखा गया और मनमाना तरिके से तटबंध का निर्माण कराया गया जिसमें तकरीबन 1000 (एक हजार )करोड़ के घोटाले की संभावना है। तटबंध निर्माण कार्य का निविदा वर्ष 2002 मे प्रकाशित किया गया था। जिसमें 792 करोड़ रुपये में तटबंध का निर्माण कार्य पुरा करा लिया जाना था। लेकिन पुन 2012 में उसी निर्माण कार्य की निविदा दुबारा प्रकाशित की गयी जिसको पुर्ननिवादा (रिएसीमेच )कर उसकी लागत 36 सौ 8 करोड़ कर दिया गया। जनहित याचिका दायर करने वाले समाजिक कार्यकर्ता का आरोप है कि इस पुरे मामले की जांच किसी निष्पक्ष एजेन्सी से करायी जानी चाहिये थी।

लेकिन जल संसाधन विभाग के अधिकारी ही मामले की जांच कमेटी में है। जांच के नाम पर महज कागजी खानापूर्ति की गयी। स्पांट वेरिफिकेशन तक नहीं किया गया। गौरतलब है कि सीतामढ़ी में इस बार आयी प्रलयंकारी बाढ़ में पांच जगहो पर तटबंध टूटने के कारण भारी जान माल की तबाही हुई थी। गलत निर्माण कार्य का ही यह नतीजा था कि कई जगहों पर तटबंध बालू की रेत की तरह ढ़ह गये।
तटबंध घोटाले से संबंधित 3 पन्ने का आदेश भेज दिया है। WhatsApp Image 2017-11-08 at 10.38.45 AMWhatsApp Image 2017-11-08 at 10.38.44 AMWhatsApp Image 2017-11-08 at 10.38.44 AM (1)