से नो टू डॉक्टरी इन बिहार

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कोई भी बाहर का डाक्टर बिहार में आकर डाक्टर की दुकान नहीं खोल सकता

क्यों? 😉😉

क्योंकि बिहार के मरीज की बिमारी बिहार के डाक्टर के अलावा कोई समझ ही नहीं सकता

जैसे :-

“भीतरी से तुफान उठता”
“अखिया पियर लउकता”
“जुठकठार हो गईल हव”
“मियजवा कईसन त होता”
“पेटवा हड़हड़ाता”
“हाथवा लकड़ियाता”
“ढोढी उसुक गईल बा”
“धुआईन ढेकार आवता”
“कानवा टस टस मारता”
“मनवा भकुआईल रहता”
“कपरा उड़ता”
“हाथवा गोड़वा झिनझिनाता”
“सुतला पर उठा उठा पटकता”

ऐसी ऐसी बीमारी सुनकर अच्छे अच्छे MBBS को अपनी डिग्री पर शक हो जाता है कि साला कहीं ये Chapter छूट तो नहीं गया था।।।

😀😀😀