स्वच्छता ही सेवा है”- अलख जगी रहनी चाहिए

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विशेष फीचर : ‘स्‍वच्‍छता ही सेवा’ पखवाड़ा

*गगन शर्मा
केंद्र सरकार ने 15 सितम्बर, 2017 से 02 अक्टूबर, 2017 के पखवाड़े के दौरान “स्वच्छता ही सेवा है”, का राष्‍ट्रव्‍यापी स्‍वच्‍छता अभियान चला कर देशवासियों को सफाई के प्रति जागरूक करने की मुहिम छेड़ी है। वैसे तो समय-समय पर इस तरह की मुहिमें चलाई जाती रही हैं पर वे सिर्फ एक औपचारिकता भर होकर रह जाती थीं, जिनमें कुछ दिन निर्धारित किए जाते थे और उन दिनों में सरकारी आयोजनों में नेता-अभिनेता सज-धज कर झाड़ू हाथ में लेकर फोटो सेशन करवाकर रुखसत हो जाते थे, जिससे सफाई का महत्व ना तो आम नागरिक तक पहुँचता था, ना ही वह इसे गंभीरता से लेता था। उसे लगना चाहिए था कि साफ-सफाई करना-करवाना सिर्फ सरकार का ही काम नहीं है, ऐसा करना उसके तथा उसके परिवार के लिए भी फायदेमंद है। सिर्फ अपना तन और घर साफ कर लेने से ही वह हारी-बीमारी से सुरक्षित नहीं हो जाता। परंतु इस बार ऐसा लगता है कि वर्तमान केंद्र सरकार वास्‍तव में इस मुद्दे को लेकर गंभीर है और देश के कोने-कोने में प्रत्‍येक नागरिक तक यह संदेश पहुँचाना चाहती है कि स्‍वच्‍छता उसकी भी जिम्‍मेदारी है।
गंदगी और बीमारी में अशिक्षा का भी बड़ा हाथ है। आज भी सुदूर गांव-देहातों में लोग शौच को एक घृणित और त्याज्य कर्म मान उसका निपटारा घरों से दूर ही करते हैं। पहले के जमाने में बात और हुआ करती थी। आबादी कम थी, जमीन इफरात थी, गांवों में तक़रीबन एक-दो कुएं ही हुआ करते थे। ज्यादातर नदी, तालाब का भरोसा ही रहता था। वहाँ आने-जाने के दौरान ही रास्ते के जंगल, खेत, बाग़ इत्यादि में नित्य कर्म निपटा लिए जाते थे। समय के साथ आबादी बढ़ी। जंगल वगैरह कटे तो लोगों ने खेतों या फिर खुले का सहारा लिया, पर इससे महिलाओं की मुसीबतें बढ़ गयीं; उन्हें मुंह-अँधेरे उठकर पुरुषों के पहले दिशा-मैदान जाना पड़ता था। पुरुष तो कहीं भी बैठने लगे। पर दुःख-तकलीफ, हारी-बीमारी व विपरीत मौसम को सहते हुए भी किसी ने गंभीरता से इस समस्या पर आवाज नहीं उठाई, ना हीं महिलाओं की असुविधा को देखते हुए कोई उपक्रम किया गया।
इसे विडंबना नहीं तो और क्‍या कहा जाए कि आज अधिकतम घरों में मोबाइल फोन तो कई हैं, लेकिन शौचालय नहीं है। यह हम लोगों की स्वच्छता के प्रति उदासीनता, लापरवाही व उपेक्षा को दर्शाता है। पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जमीन से जुड़े हुए नेता हैं; उन्हें कतार में खड़े अंतिम व्यक्ति का जितना ख्याल है, उतने ही वे साफ़-सफाई को लेकर भी गंभीर व जागरूक हैं। यह बात तभी साफ हो गयी थी, जब उन्होंने पहली बार, 26 मई 2014 को देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला था। उसी साल राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के जन्म दिवस 2 अक्टूबर पर स्वच्छता को समर्पित सबसे बड़े “स्वच्छ भारत” अभियान का श्रीगणेश दिल्ली के राजपथ से किया था, जिसमें केंद्र सरकार के कर्मचारियों ने बड़ी संख्‍या में अपना योगदान दिया था।
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी सदा स्वच्छता के हिमायती रहे। वे मृत्युपर्यन्त हर तरफ सफाई रखने पर जोर देते रहे। वे भारतीयों की साफ-सफाई कम रखने की आदतों से भी परिचित थे। इसीलिए उनका कहना था कि हर कार्यकर्ता को गांव की स्वच्छता और सफाई के बारे में सदा जागरूक रहना चाहिए और गंदगी के कारण फैलने वाली बीमारियों को रोकने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने के साथ-साथ लोगों को भी जागरूक करना चाहिए। वे चाहते थे कि स्कूलों में शुरू से ही बच्चों के लिए स्वच्छता और सफाई के नियमों के ज्ञान के साथ ही उनका पालन करना भी प्रशिक्षण का एक अभिन्न हिस्सा हो। गांधी जी के साथ उनके आश्रम में बहुत से लोग रहने की इच्छा जाहिर करते थे। तब इस बारे में गांधी जी की पहली शर्त यह होती थी कि वहां रहने वालों को आश्रम की सफाई के साथ ही शौच का वैज्ञानिक निस्तारण भी करना होगा। उनके लिए साफ-सफाई एक तरह से पूजा-अर्चना के समान थी। हमारे धार्मिक ग्रंथों में भी कहा गया है कि जहां स्वच्छता होती है वहीं रिद्धि-समृद्धि के साथ-साथ देवी-देवताओं का वास होता है।
इसी संदर्भ में तीन साल से चले आ रहे कार्यक्रम में निरंतरता बनाए रखने और तेजी लाने के लिए “स्वच्छता ही सेवा है” के राष्‍ट्रव्‍यापी स्‍वच्‍छता अभियान का शुभारंभ राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कानपुर के ईश्‍वरीगंज गांव में किया। उन्‍होंने उपस्थित जनों को स्‍वच्‍छता ही सेवा की शपथ भी दिलाई। जिसमें स्‍वच्‍छ, स्‍वास्‍थ्‍यवर्द्धक और न्‍यू इंडिया के निर्माण का संकल्‍प लिया गया। राष्‍ट्रपति ने ग्राम स्‍तर के उन नायकों को भी सम्‍मानित किया जिन्‍होंने ईश्‍वरीगंज गांव को “ओडीएफ” (“Open defecation free”) घोषित कराने में अपना योगदान दिया है। राष्‍ट्रपति ने उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत स्‍वच्‍छता और आरोग्‍यता के लिए संघर्ष कर रहा है, पर जन समर्थन के बिना स्‍वच्‍छता मिशन के लक्ष्‍य को प्राप्‍त नहीं किया जा सकता। उन्‍होंने कहा कि स्‍वच्‍छता केवल सफाई कर्मचारियों और सरकार के विभागों की जिम्‍मेदारी नहीं है, यह ऐसा राष्‍ट्रीय आंदोलन है जिसमें सभी की भागीदारी आवश्‍यक है।

इस अति महत्वाकांक्षी योजना स्वच्छ भारत मिशन को सफल बनाने के लिए केंद्र सरकार आगामी, गांधी जयंती यानी 2 अक्तूबर तक ‘’स्वच्छता ही सेवा है’’ के नारे के साथ देशभर में आन्दोलन और सामाजिक जागरुकता के लिए देशव्यापी अभियान चलाने में जुटी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पूरे देश में स्वच्छता की अलख जगा रहे हैं तो वहीं राष्ट्रपति से लेकर नेता, मंत्री और सामाजिक कार्यकर्ता जगह-जगह कार्यक्रम को दूर-दराज के इलाकों तक पहुंचाने में जुटे है। गांव से लेकर शहरों तक हर स्‍तर पर समाज के हर तबके की भागीदारी तय की गई है। महिलाओं के अनेक स्‍वयं-सहायता समूह सक्रिय हुए हैं। सिविल सोसायटी, सैन्‍य बलों, इंटरफेस ग्रुप, एनसीसी कैडेट जैसे युवा संगठनों, पंचायती राज संस्‍थाओं और कार्पोरेट सेक्‍टर की निरंतर भागीदारी से इस अभियान को जन-जन से जोड़ने की मुहिम चलाई जा रही है।

प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने इस अवसर पर देशवासियों से आग्रह किया है कि वे भारत को स्‍वच्‍छ बनाने के लिए चलाए जा रहे “स्‍वच्‍छता ही सेवा है” अभियान के लिए समय निकालें। एक ट्विट में मोदी जी ने कहा है कि ऐसा करना महात्‍मा गांधी के प्रति सबसे अच्‍छी श्रद्धांजलि होगी। प्रधानमंत्री ने कानपुर में स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान का शुभारंभ करने के लिए राष्‍ट्रपति रामनाथ कोविंद के प्रति आभार व्‍यक्‍त किया। मोदी ने स्‍वच्‍छता के विभिन्‍न कार्यक्रमों में भाग लेने वालों को भी बधाई दी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस आंदोलन के प्रति लोगों में जबरदस्‍त उत्‍साह से उन्‍हें बड़ी प्रसन्‍नता हो रही है। उन्‍होंने लोगों से सफाई अभियान में अपनी हिस्‍सेदारी के फोटो नरेन्‍द्र मोदी मोबाइल एप पर साझा करने का भी आग्रह किया है।

गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने नई दिल्‍ली में भारत-तिब्‍बत सीमा पुलिस बल के परिसर में स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान में हिस्‍सा लिया। इस अवसर पर श्री सिंह ने कहा कि अभियान के दौरान गृह मंत्रालय और केंद्रीय सशस्‍त्र सीमा बल कर्मी अपने कार्यालयों और अन्‍य परिसरों के अंदर और आसपास सफाई करेंगे। इस अवसर पर अलग-अलग राज्यों में भी लोगों को जागरूक करने और इस योजना को सामने लाने का उपक्रम हुआ। उत्‍तर प्रदेश में राज्‍यपाल श्री राम नाइक, प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍य नाथ, केंद्रीय पेयजल एवं स्‍वच्‍छता मंत्री सुश्री उमा भारती और कानपुर से लोकसभा सदस्‍य डॉ. मुरली मनोहर जोशी की उपस्‍थिति में जागरूकता कार्यक्रम संपन्‍न हुआ।

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने ‘‘स्वच्छता ही सेवा है’’ कार्यक्रम के तहत 15 सितंबर से गांधी जयंती 2 अक्टूबर तक चलने वाले स्वच्छता अभियान का शुभारंभ किया। उन्होंने भोपाल जिले के लिए स्वच्छता और पेयजल हेतु जान-जागृति रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। अरूणाचल प्रदेश में शहरी विकास मंत्री नबाम रेबिया ने ईटा नगर में इस अभियान की शुरूआत की। उन्‍होंने लोगों से इस अभियान का हिस्‍सा बनने का अनुरोध करते हुए इसे घर-घर पहुँचाने का आह्वान भी किया। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री रमन सिंह ने कई योजनाओं का संकल्प लिया जिसमें प्रदेश को खुले शौच से मुक्त करवाना प्रमुख था। केन्‍द्रीय कानून और न्‍याय राज्‍य मंत्री पी.पी. चौधरी ने औद्योगिक घरानों से स्‍वच्‍छता ही सेवा अभियान में शामिल होने का आग्रह किया। नगालैण्‍ड की राजधानी कोहिमा में स्‍वच्‍छता ही सेवा है अभियान की शुरुआत स्‍वच्‍छता शपथ से हुई, इसमें लोगों ने स्‍वच्‍छ, स्‍वस्‍थ और नए भारत के निर्माण का संकल्‍प लिया।

स्वच्छता के प्रति जागरूक करने तथा उस ओर ले जाने वाले इस उद्यम का तो सभी स्वागत कर रहे हैं। पर इस अलख को सदा जगाए रखने की जरुरत है। किसी ओर हम जितनी जल्दी आकर्षित होते हैं उतनी ही जल्दी उसे बिसराने में भी तत्पर रहते हैं। जब तक हम इसे अपना दायित्व नहीं समझेंगे तब तक ऐसी किसी भी योजना का फलीभूत होना संशय ही पैदा करता है। इसीलिए इस अभियान को एक औपचारिक कर्म या दिखावा न समझ इसे अपने नित्य-कर्मों में शामिल करना जरुरी है। साथ ही हमें यह भी नहीं भूलना है कि हम वही हैं जो विदेशों में जा कर अपने को सभ्य साबित करने के लिए वहाँ के हर नियम-कानून-कायदे सर-माथे पर लेते हैं पर अपने देश लौटते ही कूड़ा-कर्कट फ़ैलाने में कोई कोताही नहीं बरतते। फिर हमारे कचरे से ना ही पड़ोस की दीवार बचती है, ना ही सार्वजनिक पार्क, ना ही हमारी सड़कें कागज, रैपर, बोतल से निजात पाती हैं। फिर भी हम गंदगी का दोष दूसरे के सर मढ़ने से बाज नहीं आते। पर सच यही है कि सबसे पहले सुधार हमें अपने आप में ही लाना है और यही विरासत अपनी आने वाली पीढ़ी को भी देनी है। स्वच्छता ही सेवा है कि अलख जगी रहनी चाहिए।

आज हमें हमारे घरों, सार्वजनिक स्‍थलों गांवों और शहरों को साफ करने के लिए प्रयत्‍न करने होंगे। हमारा उद्देश्‍य है कि वातावरण स्‍वच्‍छ हो और हर स्‍थान पर सफाई हो, जिससे लोगों को स्वास्थ्य और समृद्धि का लाभ मिले। स्‍वच्‍छ भारत का मिशन हासिल करना राष्‍ट्रपिता महात्‍मा गांधी के प्रति सच्‍ची श्रद्धांजलि होगी। एक सशक्त, सबल, सक्षम, रोग-मुक्त राष्ट्र के निर्माण के लिए जो प्रयत्न किए जा रहे हैं, उन्हीं में से एक यह “स्वच्छता ही सेवा” का संकल्प भी है।

*लेखक वरिष्‍ठ ब्‍लॉगर हैं जो नियमित रूप से विभिन्‍न सामाजिक विषयों पर लिखते रहते हैं। लेख में व्‍यक्‍त विचार उनके निजी हैं।