स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही

489
0
SHARE

धनंजय झा

बेगूसराय – स्वास्थ्य विभाग का शर्मनाक चेहरा एक बार फिर देखने को मिला जब हादसे में एक छात्रा की मौत के बाद अनुमंडलीय अस्पताल में उसके शव को ले जाने के लिए ना ही स्ट्रेचर दी गई और ना ही एंबुलेंस मुहैया कराई गई। थक हारकर परिजन बच्ची के शव को गोद में तथा बाइक से ले जाने को मजबूर हुए। मामला बेगूसराय जिले के बलिया अनुमंडलीय अस्पताल की है।

बता दें कि बलिया थाना क्षेत्र के बरबीघी में जब कई बच्चे एक शिक्षक से कोचिंग पढ़ रहे थे इसी दौरान मिट्टी का दिवाल गिर गया जिससे छात्रा सोनम कुमारी एवं ट्यूशन पढ़ाते शिक्षक गंभीर रूप से घायल हो गए। शिक्षक को आनन-फानन में निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया वहीं छात्रा सोनम को बलिया अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। लेकिन उसके बाद की जो तस्वीरें सामने आई वह स्वास्थ्य विभाग की पोल खोलने के लिए काफी है। एक चाचा की गोद मे छात्रा का शव नहीं बल्कि स्वास्थ्य विभाग का शव कहा जाए तो ज्यादा बेहतर होगा।

दरअसल दीवार गिरने से घायल बच्चे को जब बलिया अनुमंडलीय अस्पताल लाया गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। लेकिन छात्रा की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन के द्वारा ना ही उसे स्ट्रेचर मुहैया कराई गई और ना ही एंबुलेंस रहने के बावजूद उसे नहीं एंबुलेंस दिया गया। मजबूरन परिजनों को बाइक से शव को अपने घर ले जाना पड़ा।

स्थानीय लोगों की माने तो बलिया के लिए यह घटना कोई नई बात नहीं है ।स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है बिहार सरकार के द्वारा एक बार नहीं बल्कि 2 बार बलिया अनुमंडलीय अस्पताल का उद्घाटन किया गया। लेकिन आज तक ना तो उसकी तस्वीर बदली ना ही तकदीर। स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही यहां आए दिन देखने को मिलती है। एंबुलेंस रहने के बावजूद भी जरूरतमंदों को इसकी सुविधा मुहैया नहीं कराई जाती। वहीं दूसरी तस्वीर में एंबुलेंस का उपयोग किस तरह किया जाता है यह स्पष्ट दिखाई दे रहा है। लोगों ने मांग की है कि सरकार दोषी पाए जाने वाले कर्मियों पर कार्रवाई करें।