हम काम करने में व्यस्त, कुछ लोग टांग खींचने में व्यस्त: नीतीश कुमार

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पटना: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने मंगलवार को आउटडोर स्टेडियम सहरसा में जीविका समूह के महिला सदस्यों के मद्य निषेध कार्यक्रम का दीप प्रज्ज्वलित कर उद्घाटन किया। इस अवसर पर एक महती सभा को संबोधित करते हुये मुख्यमंत्री ने कहा कि शराबबंदी जन आन्दोलन है। उन्होंने कहा कि प्रचण्ड गर्मी में भी जीविका समूह की महिलाओं की इतनी बड़ी उपस्थिति शराबबंदी के प्रति उनके उत्साह और उमंग का द्योतक है, इसके लिये मैं जीविका समूह की महिलाओं को बधाई देता हूं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि 9 जुलाई 2015 को श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में महिला विकास निगम एवं डीएफआईडी के ग्राम वार्ता की राज्यस्तरीय कार्यशला में स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों द्वारा शराबबंदी की पुरजोर मांग की गयी। मैंने उनकी मांग को सुनकर घोषणा की कि अगली बार सता में आये तो शराबबंदी को लागू करेंगे।

नई सरकार के गठन के उपरान्त 26 नवम्बर 2015 को मद्य निषेध दिवस के अवसर पर अधिवेशन भवन पटना में आयोजित मैंने सरकारी कार्यक्रम में घोषणा की कि सरकार शराबबंदी के संकल्प को पूरा करने के लिये कृतसंकल्प है। उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग को निर्देशित किया कि इस संदर्भ में नई नीति तैयार कर 1 अप्रैल 2016 से शराबबंदी को लागू करने की व्यवस्था की जाय। उन्होंने कहा कि उसी दिन से निरंतर शराबबंदी की तैयारी शुरू कर दी। शराबबंदी को प्रभावी ढ़ंग से क्रियान्वित करना हो तो सरकार एवं सरकारी कर्मचारियों को 24 घंटे सजग एवं सर्तक रहने के साथ-साथ जन समर्थन आवश्यक है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नई उत्पाद नीति के प्रथम चरण में पूरे बिहार में देशी शराबबंदी 1 अप्रैल 2016 से लागू कर दी गयी। शराबबंदी के जन समर्थन को देखते हुये 5 अप्रैल 2016 से पूर्ण शराबबंदी लागू की गयी। ग्रामीण क्षेत्रों में विदेशी शराब को भी बंद करने का निर्णय लिया गया। इस नीति को पूरी दृढ़ता से लागू करने के लिये सरकारी तंत्र को सुदृढ़ किया गया। जिले में मद्य निषेध हेतु आवश्यक कदम उठाने के साथ-साथ जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक को पूर्ण रूप से जिम्मेदारी दी गयी। सरकारी तंत्र को सुदृढ़ करने के साथ-साथ पूरे राज्य में मद्य निषेध का प्रचार-प्रसार कर मद्यपान से होने वाले दुष्प्रभाव के बारे में जन मानष को सचेत करने के लिये अभियान चलाया गया।

पूर्ण मद्य निषेध को संकल्प के साथ सरकार ने शराबबंदी की इस मुहिम को सहयोग प्राप्त कर एक जन आन्दोलन का रूप दिया। सभी सरकारी विद्यालयों में नामांकित बच्चों के माध्यम से एक संकल्प पत्र भरवाया गया, जिसमें सबों ने शराब सेवन नहीं करने एवं दूसरे लोगों को शराब से दूर रहने के लिये प्रेरित करने का संकल्प लिया।

31 मार्च 2016 तक स्कूली बच्चों ने एक करोड़ 19 लाख संकल्प पत्र अपने अभिभावकों के द्वारा भरवाकर जमा किया कि न शराब पीयेंगे और न किसी को शराब पीने के लिये बाध्य करेंगे। शराबबंदी का आयोजक शिक्षा विभाग बना, जिसमें स्वयं सहायता समूह की महिलाओं, महिला स्वयंसेवी संस्थाओं, समूहों, आशा, आंगनबाड़ी तथा शिक्षकों के सहयोग की व्यवस्था की गयी ताकि अवैध शराब निर्माण एवं व्यवसाय की सही एवं ससमय सूचना प्राप्त हो रके और त्वरित कार्रवाई हो सके। नौ लाख दीवारों पर नारे लिखे गये, साढ़े आठ हजार जगहों पर नुक्कड़ नाटक का आयोजन किया गया। यह शराबबंदी का असाधारण पैगाम था। यह निर्णय ऐसा है कि आप सभी दीदीयों के सहयोग से शराबबंदी जन आन्दोलन बन गया, यह सामाजिक परिवर्तन का बहुत बड़ा हिस्सा है।

शराबबंदी लोगों के व्यवहार एवं स्वभाव में परिवर्तन लाती है, यह बहुत बड़ा सामाजिक परिवर्तन है। शराब पीने वाले लोग अपनी गाढ़ी कमाई एवं पत्नी की कमाई को भी शराब पीने में उड़ा देते थे। हर जगह कोलाहल एवं हंगामा आये दिन की घटना थी। आज गांव एवं शहरों के वातावरण में पूर्ण शांति है। झगड़ा, कोलाहल, हंगामा एवं मारपीट अब शाम होते ही नहीं शुरू होती है। बारातियों में लोग शराब पीकर नहीं नाचते-गाते हैं और न ही शराब पीकर लहरियाकट बाइक चलाते हैं, शराबबंदी से अपराधों में काफी कमी आयी है तथा सड़क दुर्घटना में भी कमी आयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ शहरी लोग यह कहते हैं कि शहरों में शराब पीने की छूट थी। हम क्या खाते हैं या शराब पीते हैं, इससे दूसरों को क्या मतलब। हम खायें या पीयें, प्रतिबंध नहीं लगना चाहिये। हमने शराबबंदी के विरूद्ध कठोर कानून बनाये। कानून को ईमानदारी, सख्ती एवं निष्पक्षता से लागू किया गया। यह कानून बना कि जो जहरीली शराब बनायेगा, इससे मौत होती है तो लोगों को मृत्युदंड तक का प्रावधान किया गया।

उन्होंने कहा कि यह देश संविधान से चलता है। शराब पीना या शराब का व्यापार करना मौलिक अधिकार नहीं है। संविधान के अनुच्छेद 47 के द्वारा राज्य को दिये गये नीति निर्देशक सिंद्धांतों में यह स्पष्ट किया गया है कि राज्य अपने नागरिकों के स्वास्थ्य एवं पोषण की रक्षा करे एवं पूर्ण मद्य निषेध की ओर बढ़ने हेतु सतत् प्रयत्नशील रहे। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि शराब तथा मादक द्रवों से संबंध रखना किसी का मौलिक अधिकार नहीं हो सकता है। यह दायित्व राज्य का है कि वह अपने राज्य के नागरिकों के स्वास्थ्य, कल्याण एवं नैतिकता की रक्षा करे। शराब संविधान के अनुच्छेद 19 में दिये गये मौलिक अधिकारों के तहत नहीं आता है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज कल लोग ताड़ी पर चिढ़ते हैं और एक समुदाय विशेष को भड़काते हैं। आज लोग हेलीकॉप्टर एवं वायुयान पर चढ़ रहे हैं, क्या एक समुदाय के लोगों को ताड़ पर ही चढ़ते रहना चाहिये ताकि उनके बाल-बच्चे को छाती एवं पैर में गट्ठा लगता रहे। उन्होंने कहा कि अगला बैशाख आने पर हम उनलोगों के लिये ऐसा उपाय करने जा रहे हैं, जिससे उनकी आमदनी तिगुणा बढ़ जायेगी। अगर एक ताड़ के पेड़ से उनकी आमदनी सलाना दो हजार रूपये है तो अगले साल आमदनी बढ़कर छह हजार रूपये हो जायेगी।

सूर्योदय के पहले ताड़ी का रस जो नीरा है, उसे निकालकर इकट्ठा किया जायेगा, उसका प्रसंस्करण कर बोतल में बंद कर बेचा जायेगा। स्वयं सहायता एवं सहकारिता के माध्यम से नीरा को प्रसंस्करण करके बोतल बंद कर बाजार में उतारेंगे। यह अच्छा पेय है, इसमें नशा नहीं है। सूर्योदय के बाद ताड़ का रस ताड़ी बन जाता है। तमिलनाडू के कृषि विश्वविद्यालय में इसमें 25 सालों से काम हो रहा है। उसी के अनपुरूप बिहार में भी कदम उठाया जायेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम काम करने में व्यस्त हैं। कुछ लोग टांग खींचने में व्यस्त रहते हैं। उन्होंने जीविका की महिलाओं से आग्रह किया कि आपके ही कहने पर शराबबंदी लागू की गयी है। संकल्प लीजिये कि सजग एवं सचेत होकर पूर्ण शराबबंदी को सफल बनायेंगे। महिलायें जहां भी शराब भट्ठी देखे, उसे तोड़ दे, सरकार पूर्ण सहायता करेगी। आपलोगों के द्वारा दी गयी सूचना के बदौलत कार्रवाई की जा रही है। थाना से लिखवा लिया गया है कि मेरे थाना क्षेत्र में गड़बड़ी नहीं होगा। अगर किसी थाना क्षेत्र में गड़बड़ी होती है तो थाना प्रभारी पर कार्रवाई तो होगी ही, दस साल तक थाना नहीं मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम 10 मई को शराबबंदी कार्यक्रम में भाग लेने टाउन हॉल धनबाद जा रहे हैं। झारखण्ड की महिला समूह जो पन्द्रह से बीस सालों से शराबबंदी अभियान चला रही है। शराबबंदी अभियान में भाग लेने के लिये बिहार आकर न्योता दिया, हमने उनके न्योता को स्वीकार किया। झारखण्ड की जनता सजग हो गयी है। वहां भी शराबबंदी लागू होगा। उन्होंने कहा कि अगर बिहार में शराबबंदी लागू हो गयी है तो झारखण्ड, उतर प्रदेश एवं उड़ीसा में लागू क्यों नहीं होगी। सब जगह शराबबंदी लागू हो जायेगा तो शराब आसमान से टपकेगा क्या। उन्होंने कहा कि शराबबंदी ऐसा निर्णय है, जिसको सफल बनाने के लिये जन सहयोग से बाधाओं को दूर करना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में सफल शराबबंदी से पूरे देश में एक नई कहानी लिखी जायेगी। उन्होंने कहा कि राजस्थान एवं उड़ीसा में महिला समूहों ने पूरे जोर-शोर से शराबबंदी का आन्दोलन चला रही है। उन्होंने कहा कि अपने तेवर को बनाये रखें। सबके सहयोग से पूर्ण शराबबंदी लागू कर बिहार की तस्वीर बदलेगी। उन्होंने कहा कि बिहार ज्ञान की भूमि है। बिहार में पूर्ण एवं सफल शराबबंदी के जरिये पूरे देश में संदेश जायेगी। सभी धर्म में कहा गया है कि शराब बुरी चीज है। गांधी जी ने एक सौ साल पहले चम्पारण आकर निलहो के खिलाफ आन्दोलन किया था। पूर्ण शराबबंदी बापू के कर्मभूमि बिहार से शुरू हुयी है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी सशक्तिकरण के अन्तर्गत सरकार का लक्ष्य है कि दस लाख स्वयं सहायता समूह बने। एक करोड़ से ज्यादा महिलायें इसके सदस्य होंगे। 2009 में कोशी प्रमण्डल में स्वयं सहायता समूह की शुरूआत हुयी थी। अब दस लाख स्वयं सहायता समूह का गठन हो रहा है। बिहार बदल रहा है, स्वयं सहायता समूह और आगे बढ़ेगा। जो स्वयं सहायता समूह की दीदीयां दो अक्षर बोल नहीं सकती थी, आज हजारों लोगों की उपस्थिति में माइक पर भाषण देती है, यही परिवर्तन है। लड़कियों के लिये की गयी बालिका साइकिल योजना से लड़कियों में आत्मविश्वास जागा, उनके लक्ष्य को पंख लग गये।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में न्याय के साथ विकास हो रहा है। विकास का लाभ समाज के हर तबके एवं वर्ग को मिले। समाज के अंतिम पंक्ति में शामिल लोगों को विकास का लाभ मिले। उन्होंने कहा कि हमने विकसित बिहार के लिये सात निश्चय तय किये हैं।

12वीं कक्षा के आगे पढ़ने वाले छात्रों को चार लाख रूपये का स्टुडेंट क्रेडिट कार्ड दिया जायेगा, जिसकी शुरूआत 2 अक्टूबर 2016 से हो रही है। उन्होंने कहा कि दस साल से जनता के दरबार में मुख्यमंत्री कार्यक्रम चल रहा है। 5 जून से जन शिकायत निवारण कानून लागू होगा। साठ दिनों के अंदर लोगों के शिकायतों के निवारण का अधिकार होगा।

उन्होंने कहा कि शराबबंदी से अद्भूत वातावरण बना है और इसे सुदृढ़ करना है। उन्होंने डीआईजी सहरसा को कहा कि नेपाल से लगने वाले बाॅडर पर अधिक टाइट कीजिये, शराबियों की पहचान बे्रथ एनालाइजर से करके उन्हें सजा दी जाय। बिहार में शराबबंदी पूर्ण रूप से कायम होगा और इससे पूरे देश में आदर्श कायम होगा।