हिंदी दिवस के मौके पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा, हिंदी हिन्दुस्तान की जान है

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पटना – हिंदी दिवस के मौके पर आज पूरे देश भर में एक ओर जहां कई कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है वहीं राजधानी पटना में मंत्रीमंडल सचिवालय राजभाषा की ओर से एएन इंस्टीट्यूट में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया जहां कार्यक्रम का उद्घाटन संसदीय कार्य मंत्री श्रवण कुमार ने द्वीप प्रज्वलित कर किया. कार्यक्रम में हजारों की संख्या में हिंदी प्रेमियों का जमावड़ा रहा वहीं हिंदी के कई प्रख्यात कवि, लेखक, विचारक शिरकत किये.

राजभाषा के निदेशक इम्तियाज अहमद, विशेष सचिव डॉक्टर उपेंद्र नाथ पांडे, कवि सत्यनारायण अध्यक्ष हिंदी प्रगति समिति, सविता सिंह नेपाली हिंदी प्रगति समिति, डॉक्टर राम मोहन राय, डॉक्टर उषा सिंह, अमरनाथ सिन्हा एवं कई कॉलेजों के प्रिंसिपल मौजूद रहे. कार्यक्रम के दौरान पंद्रह पदाधिकारी एवं एक न्यायायिक दंडाधिकारी को राजभाषा की ओर से सम्मानित किया गया जिनमें, शैलेंद्र कुमार शर्मा अपर मुख्य दंडाधिकारी मधुबनी, अविनाश कुमार अनुमंडल न्यायिक दंडाधिकारी भभुआ उमेश प्रसाद, न्यायिक दंडाधिकारी जहानाबाद गोकुल कुमार दास आशुटंकन अररिया, शाहिन अहमद सहायक गोपनीय शाखा गोपालगंज, सत्येंद्र कुमार लिपिक जिला स्थापना कैमूर, जगदीश प्रसाद राय प्रशाखा पदाधिकारी विज्ञान विभाग पटना, विजय कुमार प्रशाखा पदाधिकारी वाणिज्य विभाग पटना, नीरज कुमार सहायक सहकारिता विभाग पटना आदि को पांच हजार प्रोत्साहन पुरस्कार एवं प्रशस्ति पत्र दिया गया.

मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि हिंदी हिन्दुस्तान की जान है. हिंदी में प्रेम और शांति है जिसमें गीता, रामायण, कुरान और बाइबिल समाहित है. आज के दिन सबों को संकल्प लेने की जरूरत है कि हिंदी को आगे बढाये. वहीं बढ़ते अंग्रेजी के प्रचलन पर कहा कि आज के बच्चे जन्म लेते ही अंग्रेजी की ओर भागना शुरू कर देते हैं वैसे अभिभावकों से कहना है कि हिंदी में जो संस्कार है उनका भी अवलोकन कराये.

गौरतलब है कि हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस का आयोजन धूमधाम से किया जाता है. आजादी मिलने के 2 साल बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया था और इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रुप में मनाया जाने लगा. हिंदी संसार को सरलतम भाषाओं में अन्यतम है हिंदी को ध्वनि शब्द वाक्य व अर्थ एक ही होती हैं जो लिखा जाता है वही पढ़ा जाता है. हिंदी के सरलता का एक बहुत बड़ा आधार उसकी लिपि है. देवनागरी भारत की सबसे व्यापक लिपि है. मराठी और नेपाली का भी लिपि देवनागरी है. जानकारों का कहना है कि सभी को शुद्ध हिंदी का प्रयोग करनी चाहिए. अंग्रेजी शब्दों का इस्तेमाल आज हम बोलचाल में ज्यादा करने लगे हैं जिसकी वजह से हिंदी शब्दों की महत्ता कम हो गई है.