10 फरवरी को आयोजित होने वाले ‘राष्ट्रीय कृमि मुक्ति’ दिवस कार्यक्रम का राज्य स्तरीय उद्घाटन

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पटना: आज दिनांक 09.02.2017 को राष्ट्रव्यापी कृमि मुक्ति दिवस कार्यक्रम का राज्य स्तरीय उद्घाटन समारोह आयोजित किया गया।राजकीय बालिका उच्च मध्य विद्यालय, बांकीपुर, पटना के प्रांगण में आयोजित उद्घाटन समारोह में श्री शषि भूषणकुमार, सचिव, स्वास्थ्य-सह-कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने कार्यक्रम की शुरूआतकी। उद्घाटन समारोह में स्कूली छात्राओं को कृमि संक्रमण के खतरों के प्रति जानकारी दी गयी।साथ ही छात्राओं को एल्बेंडाजोल की दवा लेकर कृमि संक्रमण से मुक्ति एवं इससे बचने के लिए साफ-सफाई एवंअन्य उपायों से भीअवगत कराया गया।

बिहार में 10 फरवरी 2017 को आयोजित कृमि मुक्ति कार्यक्रम के छठे चरण में कुल 4,77,24,590 बच्चों को कृमि मुक्ति दवा खिलाये जाने के लक्ष्य के साथ शुरू किए गए कार्यक्रम के शुभारंभ के अवसर परश्री शषिभूषणकुमार, सचिव, स्वास्थ्य-सह-कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार ने कृमि मुक्ति कार्यक्रम, की आवश्यकता, इसके लाभ एवं इस कार्यक्रम के लिए सरकारी प्रयासों की जानकारी दी।अपने संबोधन में उन्होंने छात्राओं को दवा सेवन से होनेवाले फायदों से भीअवगत कराया।

विदित हो कि वैसे बच्चे जो राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस 10 फरवरी 2017 को दवाई नहीं खा पाए हों उन्हें माॅप-अप दिवस 15 फरवरी 2017 को दवाई खिलाया जाना निर्धारितहै।राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस राष्ट्रव्यापी आंगनवाड़ी तथा स्कूलआधारित कृमि मुक्ति कार्यक्रम है, जिसका कार्यान्वयन स्वास्थ्य, शिक्षा एवं समाज कल्याण विभाग द्वारा किया जा रहा है।
गत वर्ष 10 फरवरी 2016 को राज्य में 3,46,44,288 बच्चों को कृमि मुक्ति की दवाई खिलायी गयी थी। इस वर्ष फरवरी 2017 के राउण्ड में राज्य के कुल 4,77,24,590 बच्चों को कृमि मुक्त किया जाने का लक्ष्य है। इस हेतु सभी सरकारी विद्यालय, निजी विद्यालय, मदरसा, संस्कृत विद्यालय, केंद्रीय विद्यालय, नवोदय विद्यालय, आंगनवाड़ी और जो बच्चे स्कूल नहीं जा पाते हैं ऐसे सभीबच्चे को कृमि मुक्ति की दवा अल्बेंडाजोल की गोली खिलायी जायेगी।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसारअनुमानतः भारतमें 1 से 14 वर्ष की आयु के लगभग 22 करोड़ बच्चे, आँतों में कृमि संक्रमण से पीड़ित होते हैं।कृमि संक्रमण से बच्चों के पोषण स्तर एवं हिमोग्लोबिन स्तर पर दुष्प्रभाव पड़ताहै, जिससे शारीरिक एवं बौद्धिक विकास बाधित होता है।पोषक तत्व बच्चों के शरीर के लिए जरूरी होते हैं उन्हें कृमि खा जाते हैं, जिससे बच्चों में रक्त की हानि, कुपोषणऔर शरीर की बढ़त रूक जाने जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं।कृमि के अत्यधिक संक्रमण के कारण बच्चे इतने बीमार या थके हुए रहने लगते हैं कि वे स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान देने या स्कूल जाने में असमर्थ होते जाते हैं।

आंगनवाड़ी और स्कूल आधारित कृमि मुक्ति एक सुरक्षित, सरल कम लागत वाला कार्यक्रम है, जिससे आसानी से करोड़ों बच्चों को कृमिमुक्त किया जा सकता है।

एल्बेंडाजोल की गोली खाकर कृमि मुक्त होना सबसे सरल तरीका है।इस दवाई से बच्चों में बहुत कम साइड इफेक्ट होते हैं।अत्यधिककृमि संक्रमण वाले बच्चों को उबकाई आना, उल्टी, पेट में हल्का दर्द, दस्त या थकावट जैसे क्षणिक साईड इफेक्ट होसकते हैं, जिनसेआसानी से निपटा जा सकताहै।

स्वास्थ्य  एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के मार्गदर्शन में कृमि मुक्ति के उद्देश्य से समग्र विपरीत प्रभाव उपाय लागू किए गए हैं। इसके लिए संबंधित विभागों में सभी स्तरों के पदाधिकारियों को तथा लक्षित 84153 अध्यापकों, 91601 आंगनवाड़ी कार्यर्ताओं और 90000 आशा को समुचित प्रशिक्षण दिया गया है जो बच्चों को दवाई खिलायेंगे।

आज इस राष्ट्रव्यापी कार्यक्रम के राज्य स्तरीय उदघाटन समारोह में श्री प्रमोदकुमारझा, अपर कार्यपालक निदेशक, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, श्री खालिद अरशद, प्रशासी पदाधिकारी, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, श्री रविश किशोर, वरीय उपसमाहर्ता, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, श्री सुधीर कुमार, वरीय उप समाहर्ता, राज्य स्वास्थ्य समिति, बिहार, डाॅ॰सुरेन्द्रकुमार, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, डाॅ॰ एन. के. सिन्हा, राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी, नियमित टीकाकरण, सिविल सर्जन, डीआईओ, पटना, शिक्षा तथा समाज कल्याण विभाग के प्रतिनिधियों एवं कृमि मुक्ति कार्यक्रम में राज्य सरकार की सहयोगी संस्था एविडेंस एक्शन एवं Dlu ,WHO, UNICEF, SRU के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया।