डेढ़ सौ साल पुरानी है यह रेल लाइन

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पटना: तीन डिब्बे की एक ही ट्रेन पटना के आर ब्लॉक से दीघा तक रोज़ दो फेरे लगाती है। ये फेरे सुबह 8:50 बजे और दोपहर 3:05 बजे लगते हैं। शाम में 6:55 वापसी का टाइम है। हालांकि ट्रेन के देर होने की पूरी सम्भावना होती है। यह ट्रेन आर ब्लॉक से खुलने के बाद हड़ताली मोड़ के पास बेली रोड क्रॉस कर पुनाईचक, शिवपुरी, राजीव नगर और पॉलिटेक्निक हॉल्ट पर रुकते हुए दीघा पहुंचती है। सात किलोमीटर लंबी इस रेललाइन का निर्माण 150 साल पहले अंग्रेजों ने एफसीआई के गोदाम तक अनाज पहुंचाने के लिए कराया था। हालांकि निर्माण के कुछ ही साल बाद यह रेललाइन बंद हो गई थी।

वर्ष 2004 में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव ने सवारी गाड़ी का परिचालन शुरु कराया। करीब 10-12 साल से इस रेललाइन की जमीन को राज्य को हस्तांतरित करने का मामला चल रहा है। 2015 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बिहार दौरे से पहले रेलमंत्री सुरेश प्रभु ने इस मसले पर मुख्यमंत्री नीतिश कुमार से चर्चा की थी पर कुछ हो न सका। रेलवे को इससे घाटा भी बहुत होता है। बताया जाता है कि हर साल एक करोड़ से ज्यादा का खर्च होता है पर हर दिन 500 का टिकट भी नहीं बिकता जबकि ट्रेन चलाने में रोज 30 से 35 हजार का खर्च आता है।

बिहार सरकार इस रेल लाइन पर फोरलेन सड़क बनाना चाहती है ताकि शहर को जाम से निजात मिले।