26 जुलाई को मनाया जाएगा बिहार के पूर्व राज्यपाल और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. गोविंद नारायण सिंह जी की 99 वीं जयन्ति समारोह

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बिहार के पूर्व राज्यपाल और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री डॉ. गोविंद नारायण सिंह जी की 99 वीं जयन्ति समारोह का आयोजन पटना के ए. एन. सिन्हा इंस्टीट्यूट सभागार में आगामी 26 जुलाई को दोपहर 2 बजे से मनाया जाएगा. इस अवसर पर एक विचार गोष्ठी के साथ साथ सांस्कृतिक आयोजन किया जाएगा. समारोह में समाज के विभिन्न क्षेत्रों में किये गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रमुख हस्तियों को सम्मानित भी किया जाएगा.डॉ. गोविंद नारायण सिंह न्यास के अध्यक्ष नीरज तिवारी ने बताया कि पूरे वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों में डॉ. गोविंद नारायण सिंह जी की जन्म शताब्दी समारोह मनाया जाएगा जिसके अंतर्गत व्याख्यान माला, वृक्षारोपण, सेमिनार, विचारगोष्ठी, कवि सम्मेलन, स्वास्थ्य सेवा कैम्प, का आयोजन किया जाएगा.बिहार के पूर्व राज्यपाल और मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व.डॉ. गोविंद नारायण सिंह एक प्रखर राजनेता, प्रकांड विद्वान, प्रसिद्ध शिक्षाविद, हिंदी, संस्कृत और अंग्रेजी के महान ज्ञाता थे.

इनका जन्म 26 जुलाई 1920 और निधन 11 मई 2005 को हुआ था. इनका जन्मस्थान रामपुर बघेलन मध्यप्रदेश है इनके पिता का नाम कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह और माता का नाम महाराज कुमारी था. इनकी पत्नी का नाम पद्यमावती देवी था.डॉ. गोविंद नारायण सिंह ने एम. ए, पी.एच. डी., एल. एल. बी, डी. लिट् तक कि शिक्षा ग्रहण किया था. ये 30 जुलाई1967 से12 मार्च1969 तक मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में जनता की सेवा किये. 6 फ़रवरी 1988 से 24 जनवरी 1989 तक बिहार के राज्यपाल के पद को सुशोभित किया.

सामाजिक एवं राजनीतिक सफ़रनामा के रूप में इनका जीवन महान सफलता, असफलता, महानता, और प्रताड़ना से भरा हुआ है इनके जीवन की प्रमुख घटनाओं पर विन्दुवार वर्णन यह है कि- 1941 से 1946 तक विद्यार्थी संघ एवं विद्यार्थी कांग्रेस के अध्यक्ष रहे. 1941में क्रांतिकारी कार्यों के लिए अंग्रेजी हुकूमत द्वारा नजरबंद किया गया था. 1942 से 1944 तक ‘अगस्त आंदोलन’ के लिए कारावास की सजा मिली. 1946 से 1947 तक काशी हिंदू विश्वविद्यालय में प्राध्यापक एवं शोधकार्य किया इसी विश्विद्यालय में इन्हें एमरेटिस प्रोफेसर की उपाधि मिली तथा विश्विद्यालय ने इन्हें स्वर्ण पदक से विभूषित किया. 1948 में भारतीय प्रशासन सेवा के लिए चयनित हुए, विंध्य प्रदेश सरकार के अंतर्गत सहायक क्षेत्रीय कमिश्नर के पद पर नियुक्ति हुई मगर कार्यभार ग्रहण करने के महज एक दिन बाद ही उन्होंने पद त्याग दिया.

1952 में सामान्य निर्वाचन में विन्ध्य प्रदेश विधानसभा सदस्य के रूप में निर्वाचित हुए. 1953 से 1967 तक विन्ध्य प्रदेश कांग्रेश कमिटी के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया. विंध्यप्रदेश विधानसभा सदस्य के रूप में जागीरदारी उन्मूलन समिति, लोक लेखा समिति, भू-राजस्व समिति तथा विभिन्न समितियों में सफलतापूर्वक कार्य किया. इन विन्दुओ के अलावे इनकी जीवन से जुड़ी अन्य धटनाओं पर शोध कार्य जारी है.

डॉ. गोविंद नारायण सिंह स्वाभिमानी व्यक्तित्व के धनी एवं सादा जीवन जीवन उच्च विचार के सिद्धान्त के अनुपालक थे. बिहार के राज्यपाल के रूप में शपथ ग्रहण समारोह में खादी के वस्त्र और हवाई चप्पल पहनकर शपथ ग्रहण किया था. इन्होंने श्रीमद्भागवत गीता में बुद्धि योग दर्शन की अवधारणा प्रतिपादित किया ,जिसके लिए जगत गुरु शंकराचार्य ने उन्हें योगी उपाधि से अलंकृत किया. बुद्धि योग दर्शन के लिए काशी हिंदू विश्वविद्यालय ने इन्हें सम्मानित भी किया था.

इन्होंने समाज, देश और अध्यात्म के विषयों पर अनेक पुस्तकों की भी रचनाएं की जिनमें प्रमुख रूप से नेशन टुडे, सोशियोलिस्ट आइडियोलॉजी इन कांग्रेस, रिपब्लिक टुडे आदि प्रमुख हैं इनके द्वारा लिखे गए अनेक आलेख द हिन्दू, इंडियन एक्सप्रेस, धर्मयुग सहित तत्कालीन प्रमुख पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए.बिहार के राज्यपाल रहते हुए डॉ. गोविंद नारायण सिंह जी ने भारत में जनता से सीधे जुड़ने और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए जन-अदालत की शुरुआत की.

डॉ. गोविंद नारायण सिंह ने अपने पिता कैप्टन अवधेश प्रताप सिंह के नाम पर रीवा विश्विद्यालय की स्थापना की. उन्हीं के नाम पर इस विश्विद्यालय का नामकरण किया गया है. रीवा विश्विद्यालय द्वारा इन्हें पण्डित की उपाधि प्रदान की गई थीपूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी जी इन्हें छोटा भाई मानते हुए हर वर्ष राखी बांधती थीं. राजीव गांधी इन्हें मामा कहते थे. मध्यप्रदेश में जनसंघ के साथ प्रथम गठबंधन संविद सरकार की स्थापना डॉ.गोविंद नारायण सिंह ने राजमाता सिंधिया के सम्मान में किया था.

बिहार के राज्यपाल के इस्तीफे के बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने इन्हें किसी भी राज्य का राज्यपाल बनाने का प्रस्ताव रखा था, जिसको इन्होंने नकार दिया था. पूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी एवं पूर्व विदेश मंत्री जसवंत सिंह स्वयं उनके आवास159/23,लोधी कालोनी, नई दिल्ली पर भी आये थे उनके आग्रह पर 2004 में भाजपा में शामिल हो गए थे भाजपा ने इन्हें राज्यसभा भेजने का प्रस्ताव रखा था मगर इन्होंने इनकार कर दिया.इस प्रकार बहुआयामी व्यक्तित्व के धनी डॉ. सिंह का जीवन एवं दर्शन वर्तमान पीढ़ी और भविष्य के भारत के लिए सदैव एक प्रेरणादायक ऊर्जा के रूप में प्रकाशित करता रहेगा.