छठ नहाय-खाय के कुछ पारंपरिक गीत

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छठ गीत

नहाय-खाय के कुछ पारंपरिक गीत

1) छठिया जे उनहे कातिक मासे, बारहों बाजन लेले
गढ़ से जे उतरी ले महादेव, अपनी सजन लेले
डोली से जे उतरे ली गौरा देहि, गोदी में बालक लेले,
होई छठी परसन, आगे आगे चलनी महादेव पीछे बाजन बाज
ओकरा पीछे चलली गौर देहि, कुतवा भीखी मांग,
अंगूरी में चलेंले गणेश पुत्र, छठी मईया परसन होस

2) कोपी-कोपी बोलेली छठी माई, सुनी ऐ सेवक लोग,
मोरा घाटे दुबिया उपजी गइले, मकरी बसेड़ लेले
हंसी-हंसी बोलले सेवक लोग, सुनी ए छठी माई,
रौरा घाटे दुभिया छिलाई देब, मकरी बहारी देब
गइया के गोबर लिपाई देब, चन्दन छिताई देब,
रउरा घाटे दुभिया छिलाई देब, मकरी बहारी देब,
गइया के गोबर लिपाई देब, चन्दन छिताई देब,
रउरा घाटे घिउ में हुमाध देब, दुधवे अरग देब
कोसिया भराई देब, चांदनी तनाय देब