4000 साल पुराना सूर्य मंदिर

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आज के वैज्ञानिक युग में भी छठ को प्रकृति पूजा का सर्वोत्कृष्ट उदाहरण समझा जाता है। एक अत्यंत प्राचीन सूर्य मंदिर बिहार के नवादा जिले के नारदीगंज प्रखंड के हंडिया में स्थित है। यहां विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि यह मंदिर धरती पर जीवन के प्रमुख स्त्रोत व संरक्षक के रूप में चिह्नित भगवान सूर्य के प्रति आस्था का निरंतर संचार करता रहा है।

हंडिया के सूर्यनारायण मंदिर को द्वापरयुगीन संरचना माना जाता है। दूर-दूर तक इसकी ख्याति फैली है। राममुक्ति व वंशप्राप्ति के लिए लोग इस मंदिर में आते हैं और यहां स्थापित भगवान भास्कर की अर्चना करते हैं। मन्नतें रखते हैं और कामना पूरी होने पर शीश झुका कर कृतज्ञता जताने यहां पहुंचते भी हैं। यह मंदिर नारदीगंज प्रखंड मुख्यालय से करीब चार किलोमीटर उत्तर पश्चिम दिशा में स्थित है। मंदीर के जीर्णोद्धार के समय मिले अवशेषों से इसकी ऐतिहासिकता के बारे में पता चलता है। माना जाता है कि यह मंदिर लगभग 4000 वर्ष पुराना है। इसके गर्भगृह में सात घोड़ों के रथ पर सवार भगवान भास्कर की काले पत्थरों से निर्मित प्रतिमा आकर्षण का मुख्य केन्द्र है। मान्यता है कि द्वापर युग में मगध सम्राट जरासंध की पुत्री राजकुमारी धन्यावति इस स्थल पर सूर्यनारायण की पूजा करने आती थीं। कहते हैं कि एक बार राजकुमारी धन्यावति कुष्ठ रोग की चपेट में आ गयी थीं। वह हंडिया सूर्यनारायण मंदिर के पास स्थित तालाब में प्रतिदिन स्नान करके सूर्यनारायन की पूजा-अर्चना किया करती थीं। बाद में उनके समर्पण व भक्ति से खुश हुए भगवान भास्कर की कृपा से धन्यावति कुष्ठ रोग से मुक्त हो गयीं। इसके पश्चात उन्होंने इसी जगह पर माता भगवती और भगवान सूर्यनारायण के मंदिर की स्थापना की। माना जाता है कि तभी से यह जगह सूर्योपासना का खास केन्द्र बना हुआ है। मंदिर के पास स्थित सरोवर में स्नान करके वह प्रतिदिन सूर्यनारायण मंदिर, माता भगवती व धनियावां पहाड़ी स्थित गौरी शंकर के लिए भी जलार्पण किया करती थीं। पहाड़ी पर स्थित गौरीशंकर का शिवलिंग भी अद्वितीय व अनोखा है। इतना ही नहीं, यहां जटाधारी शिव और माता गौरी एक साथ विराजमान दिखते हैं।

राजकुमारी धन्यावति द्वारा निर्मित इस मंदिर का कुछ दशक पूर्व जीर्णोद्धार करवाया गया। भगवान भास्कर को समर्पित परंपरागत स्वरूप में दिखते इस मंदिर के शिखर पर कांसे के तीन कलश लगे हुए हैं। इनके ऊपर सूर्यचक्र विराजमान है। मंदिर परिसर में विशाल हवनकुंड भी है। स्थानीय पुजारियों द्वारा प्रत्येक रविवार को यहां व्यापक रूप में हवन-पूजन का आयोजन होता है। हर रविवार को यहां बड़ी संख्या में कुष्ठ पीड़ित पहुंचते हैं। यहां के तालाब में नहाने के बाद सूर्य मंदिर में पूजा-अर्चना करके माता भगवती के मंदिर में प्रार्थना करते हैं। अधिकतर लोगों की धारणा है कि इससे रोगग्रस्त लोगों को राहत मिलती है। आम लोगों में इस धारणा के बाबत होनेवाली चर्चा व दूर-दराज तक इस तरह होनेवाले प्रचार-प्रसार ने हंडिया के सूर्य मंदिर की ख्याति को और व्यापकता दी है।