70 वर्षीय पिता आज दर दर भटक रहा है, अपने बेटे के शव को पाने के लिए

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रोहतास सासाराम के एक युवक का शव पिछले डेढ़ महीनों से अधिक समय से सऊदी अरब मे पड़ा हुआ है। लेकिन उसका सुध लेने वाला कोई नही है। 70 वर्षीय पिता आज दर दर भटक रहा है। पत्नी और बच्चे बिलख रहे है। कारण है एक पाकिस्तानी मैनेजर जो भारत पाकिस्तान के तनाव के कारण युवक के शव भेजने मे आनाकानी कर रहा है। 36 वर्षीय खुदाबख्श रोजी रोटी के लिय अपने बूढे बाप और नन्हे-मुन्ने बच्चें से भरापुरा परिवार को छोड़ कर जब फरवरी में सउदी अरब के जवैल शहर गया था।

तो उसे पता भी नही था की उसका शव को भी परदेश से आने में इतना इंतजार करना पड़ेगा।। खुदाबख्श पहली बार विदेश कमाने गया था और जाते ही उसकी तबियत बिगड गयी। दो तीन माह इलाज के बाद 10 जून को उसकी मौत भी हो गयी। तब से आज तक उसके शव के लिय पुरा परिवार टकटकी लगाये हुए है। पिता मोहम्मद हशन शाह का सीधा आरोप है कि सऊदी अरब मे जिस सऊदी कैड कंस्ट्रक्शन कंपनी मे उनका बेटा काम करता था। उसका मैनेजर पाकिस्तानी है।

और भारत पाकिस्तान के बीच तनाव के कारण ही उसके बेटे का शव भारत लाने में परेशानी हो रही है। डेढ़ महीनों से अपने बेटे के शव के लिेए स्थानीय अधिकारियो से लेकर सांसद और भारतीय दूतावासो के अधिकारी से संम्पर्क मे हैं। सभी जगह से सिर्फ आश्वासन ही मिल रहा है। दो बेटी तथा एक बेटा के साथ पत्नी मोसर्रत जहाँ तिल-तिल कर मर रही है। वही वह कहती है की उसे किसी हाल मे अपने शौहर का शव चाहिए। मुसर्रत की पूरी जिन्दगी अभी पड़ी है। बच्चे के चेहरे को देख देख कर वो जी रही है। पत्नी किसी हाल मे अपने शौहर का शव चाहती है। रिश्तेदार भी यही चाहते है।

आप समझ सकते है की बूढा पिता अपने इकलौते बेटे के शव‌ के लिए आज अधिकारियों के चक्कर लगा रहा है। प्रभारी डीएम डीडीसी हासिम खाँ ने कहा है की वे शव को भारत लाने के लिए प्रयासरत है तथा कागजी प्रक्रिया की जा रही है। कहते है की दुनिया का सबसे बडा बोझ एक पिता के कंधे पर पुत्र का जनाजा होता है। लेकिन एक पिता को तो वो जनाजा भी मयस्सर नही है। देखना है ये सिस्टम कब-तक एक पिता को उसके पुत्र का शव दिला पाती है।