8 साल की बच्ची 85 किलोग्राम वजन

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बेटी वैसे भी 90 प्रतिशत साधारण परिवार के लिए बोझिल ही होती है कोई माने या न माने लेकिन ये हकीकत है । भले ही ये बात कोई खुलकर न बोले, मगर अंदर से लोग बेटी को बोझ समझते ही हैं। बेटी जब किसी गंभीर बिमारी से ग्रसीत हो जाय तब तो मानो परिवार के लिए परेशानी का सबब बन जाता है। मधेपुरा जिले के चैसा प्रखंड के लौआलगान गांव में एक मजदूर परिवार के 8 साल की बच्ची का वजन 85 किलोग्राम हो गया है। पीड़ीत बच्ची को उनके मां बाप भी नानी के घर छोड़कर भाग गये। अब पीड़ित बच्ची को खाने पीने व रहने उठने बैठने जैसी सभी परेशानी एक साथ खडा हो गया है। कहते हैं आफत अमीर व गरीब को देखकर नहीं आता है और जब आता है तो सबसे पहले अपने लोग मुंह मो़ड़ लेते है। फिर सरकार और प्रशासन की तमाम योजनाएं खत्म हो जाती है। सरकार का स्लोगन बेटी बचाओं बेटी पढाओं महज फाईलों में गुम हो कर जाता है। 85 किलोग्राम की आंचल कुमारी अपने हम उम्र के बच्चे के साथ बैठी हुई मजाक बन जाती है । मधेपुरा जिले के चैसा प्रखंड के लौआलगान गांव के 8 साल की आंचल कुमारी का वजन 85 किलोग्राम है और लागातार वजन धीरे-धीरे बढते जा रहा है। आंचल का पहले तो उनके मां बाप तीन चार साल तक ईलाज कराया, बहुत हद तक ठीक भी होने लगी थी लेकिन आर्थिक स्थिति खराब होने के बाद मां-बाप ईलाज भी कराना छोड़ दिया और नाना-नानी के घर छोड़कर भाग गये ।आंचल अभी नाना-नानी के घर लौआलगान में ही रह रही है। आंचल के नाना सुरेष साह को लकवाग्रस्त हैं,वे चल फिर नहीं सकते हैं।नानी और मामा मजदूरी करके किसी तरह लालन पालन कर रहे हैं। आंचल का ईलाज अगर होता तो बहुत हद तक ठीक भी हो सकती थी। लेकिन लापरवाह प्रशासन कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है। अंजली पहले स्कूल भी जाती थी। लेकिन बच्चों के द्वारा मजाक किया जाने के कारण अब स्कूल जाना भी छोड दी। अब तो मुंह से आवाज निकलना भी धीरे-धीरे कम होने लगा है। स्थानीय पंचायत समिति के सदस्य ने कहा कि आगामी पंचायत समिति की बैठक में प्रस्ताव लेकर सरकार और जिला प्रशासन को अंजली की मदद व ईलाज के लिए सहयोग करने हेतु भेजा जाएगा। मधेपुरा के शीषु रोग विशेसज्ञ डा0 अरूण कुमार मंडल ने कई अहम जानकारी देते हुए कहा कि इसका एक मात्र ईलाज सर्जरी है जो काफी खर्चीला होगा। जब सरकारी मुलाजीम कुछ बोलने को तैयार नहीं है तो सहयोग क्या करेंगे ! ये अनुमान लगाने की बात है। अंजली को मदद के लिए कोई सामाजिक कार्यकर्ता ही आगे आ सकता है वरना अंजली यूं ही मदद की आश में रह जाएगी।