फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी में एक और डी.एन.ए. यूनिट के गठन की तैयारी, योजना को मिला ग्रीन सिग्नल

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पटना डेस्क। मुख्यालय स्तर पर फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफ.एस.एल.) में एक और डी.एन.ए. यूनिट के गठन की तैयारी चल रही है। इसको लेकर बीते मार्च में हुई स्कीम स्क्रीनिंग समिति की बैठक में स्वीकृति मिल गई थी। साथ ही राज्य सरकार ने जरुरी उपकरणों की खरीद के लिए 4.35 करोड़ रुपए की प्रशासनिक स्वीकृति दे दी है। दरअसल डीएनए टेस्ट के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए एक और यूनिट की आवश्यकता महसूस की जा रही है। इसको लेकर सीआईडी (अपराध अनुसंधान विभाग) के स्तर से पुलिस मुख्यालय के जरिए गृह विभाग को प्रस्ताव भेजा गया था। बिहार पुलिस की यूनिट सीआईडी के अंतर्गत फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (विधि विग्यान प्रयोगशाला) कार्य करता है। राज्य में तीन फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी पटना, मुजफ्फरपुर और भागलपुर में स्थित हैं।

जेनेटिक एनालाइजर
समेत कई कीमती उपकरणों की होगी खरीद

नए डीएनए यूनिट के लिए
अत्याधुनिक मशीन या उपकरण मंगाए जाएंगे। इस कड़ी में सिर्फ जेनेटिक एनालाइजर की
खरीद पर ही 1.5 करोड़ रुपए खर्च होंगे। डीएनए कोल्ड रुम की कीमत 1 करोड़ रुपए है।
इसमें माइनस 80 डिग्री तापमान में डीएनए सैंपल को सुरक्षित रखा जाता है। इनके
अलावा डीएनए एक्सट्रैक्शन ऑटोमेशन की खरीद पर 45 लाख, रियल टाइम पीसीआर पर 30 लाख,
पीसीआर पर 10 लाख, लेमिनेटर एयर फ्लो, आइस फ्लेक्स व अन्य उपकरणों की खरीद पर 1
करोड़ रुपए खर्च होंगे।

डीएनए टेस्ट के
जरिए मिलता है अकाट्य सबूत

डीएनए की जांच से शरीर
से जुड़े कई राज का पता लगाया जा सकता है। खासकर आपराधिक मामलों में इसके जरिए
अकाट्य सबूत मिल सकता है। मसलन घटनास्थल पर मिले शरीर के किसी भी जैविक हिस्से
(जैसे बाल, वीर्य, थूक, खून, नाखून आदि) के जरिए यह पता लगाया जा सकता है कि संबंधित
आरोपी मौके पर मौजूद था या नहीं। यह भी पता लगाया जा सकता है कि सगे संबंधी या कोई
खून का रिश्तेदार है या नहीं।

मेडिकल क्षेत्र
में भी खास महत्व

दूसरी ओर मेडिकल क्षेत्र
में भी डीएनए टेस्ट का खास महत्व है। एक्सपर्ट के मुताबिक बच्चे में माता-पिता से
जुड़ी जैविक-आनुवांशिक बीमारी के होने का पता लगाया जा सकता है। डीएनए टेस्ट के जरिए
यह भी बताया जा सकता है कि संबंधित व्यक्ति में किस तरह की बीमारी होने के खतरे
अधिक हैं।