आर्थिक तंगी के कारण इलाज के आभाव में दम तोड़ दिया दिव्यांग गौरीशंकर राम

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विवाह प्रोत्साहन राशि के लिए महीनों से लगाता रहा कार्यालय का चक्कर

डेस्क- दिव्यांगो के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं में मुख्यमंत्री दिव्यांगजन विवाह प्रोत्साहन योजना धरातल पर पूर्ण रूप से विफल रहा। मामला बिहटा प्रखंड अंतर्गत कौरिया ग्राम निवासी गौरीशंकर राम का है।

दिव्यांग गौरीशंकर राम का विवाह भोजपुर के दिव्यांग सरिता से 2018 में विकलांग अधिकार मंच द्वारा पटना में आयोजित सामुहिक अनोखा विवाह 3 में संपन्न हुआ था। सामूहिक विवाह के गणमान्य नेतागण भी शामिल हुए थे। गौरीशंकर ने सरकार द्वारा विवाह उपरांत दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के लिए अवेदन किया था, जिसके बाद से महीनों तक वह जिला व प्रखंड कार्यालय का चक्कर लगाता रहा। उस दौरान बीमार पड़ने पर उसे पीएमसीएच पटना में 10 दिनों तक भर्ती किया गया। अस्पातल से छुटी मिलने पर डॉक्टरों द्वारा लिखी गई महंगी दवा लेने में असमर्थ गौरीशंकर ने मौत से जुझते हुए रविवार को रात 12 बजे में दम तोड़ दिया।

सवाल यह है की अब गोद में छोटी से बच्ची को लेकर एक दिव्यांग विधवा कहा जाएगी और क्या खायेगी? साथ ही सवाल यह भी है की क्या जिस योजना के लिए दौड़ते-दौड़ते गौरी शंकर ने जान दे दिया, क्या वो योजना उसके दिव्यांग विधवा को मिलेगा?

गरीब दिव्यांग के मरने पर दाह संस्कार करने तक को घर में रुपये नहीं थे। जिस पर विकलांग अधिकार मंच के सदस्य विक्रम प्रखंड अंतर्गत मंझौली निवासी कृष्ण कुमार ने चंदा इक्क्ठा कर उसका दाह संस्कार कराया साथ हीं सरिता को ढाढ़स बंधाया।

विकलांग अधिकार मंच की अध्यक्षा कुमारी वैष्णवी ने बताया की सरकार के कुछ भ्रष्ट कर्मचारी व अधिकारी एवं सरकारी कुव्यवस्था के कारण मुख्यमंत्री दिव्यांजन प्रोत्साहन अनुदान योजना का लाभ लेने के लिए दिव्यंजन को वर्षों तक कार्यालय का चक्कर लगाना पड़ता हैं।

उक्त विषय में उन्होंने कहा की इस प्रकार के कई मामले पहले भी आये हैं उनमें से एक मामला विवाह प्रोत्साहन राशि का हैं जिसे लेकर हाईकोर्ट ले जाना पड़ा । मानवता की रक्षा करने का नसीहत देने वाले नेता व अधिकारी क्या इसी दिन का इंतजार करते है जो मरने पर भी दिव्यांग को योजनाए न मिल सके।