शव वाहन नहीं देने पर प्रभारी उपाधीक्षक और अस्पताल प्रबंधक हटाए गए

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कैमूर- सदर अस्पताल भभुआ में एम्बुलेंस नहीं मिलने पर हुए ट्रक चालक की मौत की खबर चलाये जाने पर सदर अस्पताल के प्रभारी उपाधीक्षक डाक्टर प्रेम राजन और अस्पताल प्रबंधक मनीष चंद्र श्रीवास्तव को हटा दिया गया। डीएम के पहल के बाद 16 घंटे बाद मिला शव वाहन।

कल हमने चलाई थी ये खबर …जानिये क्या है पूरा मामला…

बाप के सामने दम तोड़ दिया बेटे ने – अस्पताल को शर्म नहीं आई !

बिहार सरकार स्वास्थ्य महकमे में सुधार के लिए लाख प्रयास कर ले लेकिन कैमूर जिले में स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही का मामला बढ़ता ही जा रहा है। कभी मरीजों को स्ट्रेचर नहीं मिलता, कभी डॉक्टर के नहीं रहने के कारण परिजनों का हंगामा तो कभी एंबुलेंस नहीं मिलना। आये दिन ये नज़ारा अब सदर अस्पताल, भभुआ के लिए आम हो गया है। बिहार के स्वास्थ्य मंत्री ने जिले के सभी सिविल सर्जन को यह आदेश दिया था कि अगर किसी की भी मृत्यु होगी तो उसे घर तक पहुंचाने के लिये शव वाहन की व्यवस्था अस्पताल प्रबंधन द्वारा मुफ्त में किया जाएगा लेकिन उनके नियमों की धज्जियां कैमूर में खुलेआम उड़ाई जा रही हैं और जिला प्रशासन कान में तेल डालकर सोया है।

कैमूर जिले के दुर्गावती थाना क्षेत्र के GT रोड पर मिनी ट्रक और कंटेनर की शनिवार को टक्कर हो गई थी जिसमें ट्रक चला रहे आगरा के बाप और बेटे बुरी तरह घायल हो गए थे जिन्हें एनएचआई की टीम ने प्राथमिक उपचार के लिए अनुमंडल अस्पताल मोहनिया लाया जहां गंभीर हालत देख चिकित्सकों ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल, भभुआ भेज दिया लेकिन वहां भी गंभीर हालत के कारण चिकित्सकों ने दोनो को शनिवार की देर रात बेहतर इलाज के लिए वाराणसी के लिए रेफर कर दिया। लेकिन अस्पताल प्रबंधन द्वारा एंबुलेंस की व्यवस्था नहीं दी गई जिससे कि घायल बाप और बेटे वाराणसी जा सकें।

घायल पिता अपने बेटे की लगातार बिगड़ती हालत को देख स्वास्थ्य विभाग के सभी आला अधिकारियों के यहां गुहार लगाते रहे लेकिन उनकी किसी ने नहीं सुनी। अंततः रविवार की शाम 6:30 बजे पिता के सामने घायल बेटे ने दम तोड़ दिया। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन शव को उनके घर आगरा ले जाने के लिए व्यवस्था करने की बात कह कर चंपत हो गया। पिता उसी इंतजार में पिछले 16 घंटे से अस्पताल के वार्ड में बेटे के शव के पास बैठा है लेकिन अब तक अस्पताल प्रबंधन द्वारा शव ले जाने के लिए कोई इंतजाम नहीं किया गया। यहां तक कि दिन के दस बजे तक पोस्टमार्टम भी शव का नहीं कराया जा सका। पीड़ित पिता ने बताया कि मेरी आंखो के सामने मेरे बेटे ने दम तोड़ दिया, हम दोनों के अलावा घर में कोई नहीं है। शव को ले जाने के लिए लोग बोले थे, अभी तक कोई व्यवस्था नहीं हो पाई। इससे अच्छा होता कि लोग मुझे भी जहर की सुई देकर मार डालते। उन्होंने बताया कि वे कलकत्ता से गाड़ी लेकर गाजियाबाद के शाहदरा जा रहे थें।

जब इन सारी बातों पर अस्पताल प्रबंधन से संपर्क करने की कोशिश की गई तो अस्पताल प्रबंधन ने मीडिया से मिलना मुनासिब नहीं समझा। वहीँ जिलाधिकारी ने मीडिया को धन्यवाद दिया कि आपके द्वारा संज्ञान में ये बात लाई गई जिसके बाद मैंने कार्रवाई किया लेकिन दुःख भी इस बात का है कि पोस्टमार्टम कराने के लिए मुझे पहल करना पड़ा जबकि ये काम सिविल सर्जन का है, मैं इसका जांच कराउंगा और जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई किया जायेगा, इसके लिए त्रीस्तरीय जांच टीम का गठन किया गया है।