बिहार में विविध् खाद्य प्रणाली विकसित करने की दिशा में राज्य स्तरीय नीति वार्ता आयोजित

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पटना 6 मार्च। टाटा काॅरनेल इंस्टीच्यूट (टीसीआई) और आद्री के संयुक्त तत्वावधन में पोषण संबंधी परिणामों में सुधार के लिए बिहार में एक विविध् खाद्य प्रणाली विकसित करने की दिशा में आज एक राज्य स्तरीय नीति वार्ता का आयोजन किया गया। बिहार सरकार के कृषि उत्पादन आयुक्त सुनील कुमार सिंह ने कार्यक्रम का उद्घाटन किया। डा. शैबाल गुप्ता ने अपने स्वागत भाषण में जोर देकर कहा कि कृषि उत्पादन अपनी पसंद के आधार पर किया जाना चाहिए न कि किसी दबाव में। उन्होंने विस्तार से बताया कि गैर-अनाज फसलों के लिए मूल्य सुरक्षा नेट में लाना चाहिए और किसानों को उनके कृषि उत्पादन में विविधता लाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए। टीसीआई के निदेशक प्रोफेसर प्रभु पिन्गली ने बल देते हुए कहा कि बिहार के लोगों की सम्पूर्ण पौष्टिकता की जरूरतों को पूरा करने के लिए अनाजों का विविध्किरण जरुरी है। भारत को न केवल अनाज बल्कि गैर-अनाजों के क्षेत्र में भी सक्षम बनाने के लिए प्रयासों की जरूरत है। सुनील कुमार सिंह ने कहा कि किसानों को अपने पैदावार का उचित मूल्य मिलना चाहिए और सब्जी उत्पादन के लिए को-आॅपरेटिव मार्केटिंग में निवेश करने की जरूरत है। उद्घाटन सत्र में शाश्वत गौतम ने नीति वार्ता में विभिन्न हितधारकों की उपस्थिति को स्वीकारते हुए धन्यवाद ज्ञापन किया।

राजेन्द्र प्रसाद केन्द्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डा. आर.सी श्रीवास्तव ने अनाज उत्पादन के तहत क्षेत्र को कम करने और बिहार में उसकी उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया ताकि बचे हुए क्षेत्रों में गैर अनाज वाले फसलों का उत्पादन किया जा सके। विशिष्ट पैनल ने बेहतर पोषण संबंधी परिणाम प्राप्त करने के लिए उच्च मूल्य वाली फसल, श्रमिक बचत और महिलाओं के प्रौद्योगिकियों के माध्यम से मशीनीकरण और आईसीडीएस तथा एमडीएम के माध्यम से पोषक अनाजों को शुरू करने के तरीके सुझाए। डा. एन. विजयलक्ष्मी (भाप्रसे) पशु एवं मत्स्य पालन विभाग के सचिव की अध्यक्षता में पशुपालन सत्र में ऐसे मुद्दे आए जो पूरे पशुधन उत्पादन प्रणाली को कवर करने के लिए संबोधित थे, न कि केवल पशु प्रजनन पर ध्यान केन्द्रित करने हेतु। महिलाओं को पशुधन और छोटे पशुधन के बेहतर प्रबंधन के लिए व्यावहारिक कार्यक्रमों के साथ समर्थन करने की आवश्यकता है।

आखिरी सत्र में बिहार में कृषि विपणन और मूल्य श्रृंखला के मुद्दे को संबोधित किया गया जिसकी आद्री के निदेशक प्रोफेसर प्रभात पी. घोष ने अध्यक्षता की। इस सत्र में जोर दिया गया कि किसानों को सरकार की नीति का केन्द्र बनना चाहिए तथा किसानों की आय में प्रभाव डालने, विपणन और कीमत निर्धरण में सरकार का समर्थन बहुत महत्वपूर्ण है।

पिछले दशक के दौरान बिहार के सम्पूर्ण विकास को देखते हुए, करीब-करीब सभी पैनलिस्टों ने यह सहमति जताई कि हमें राज्य में दूसरी हरित क्रांति लाने के लिए गैर-मुख्य फसल को प्राथमिकता देनी चाहिए जिसमें सक्रिय निजी बाजारों की पहल से कृषि विविधीकरण सफल हो सके। बिहार में सदाबहार क्रांति लाने के मुख्यमंत्राी के उद्देश्य के संदर्भ में यह सटीक बैठता है।