नोटबंदी के बाद मालामाल हुए बिहार के ये बैंक !

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कैमूर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हजार और पांच सौ के पुराने नोट बंद की घोषणा के बाद कालाधन छुपाने के लिए हर तरह के हथकंडे अपनाये जा रहे हैं। कालाधन छुपाने के लिए लोगों ने प्रधानमंत्री जनधन बैंक खाते का सहारा लिया है।

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प्रधानमंत्री जनधन खाता मजदूरों और गरीब लोगों के लिए खोले गए हैं, लेकिन आठ नवंबर 2016 से नोट बंदी के बाद बिहार के कैमूर और बक्सर जिले के जनधन बैंक खातों में करोडों रुपए की बड़ी राशि जमा होने से बैंक अधिकारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं।

मध्य बिहार ग्रामीण बैंक

बिहार के कैमूर जिले में जनधन खातों की संख्या करीब 84 हजार है, जिसमें 10 नवम्बर से अब तक 16 करोड़ रुपए जमा करा गये हैं। इसी तरह बक्सर जिले में जनधन के कुल 1.69 लाख खाते हैं, जिनमें 10 नवम्बर से अब तक 31 करोड़ रुपये जमा कराये गये हैं। मध्य बिहार ग्रामीण बैंक के क्षेत्रीय प्रबंधक बीबी ओझा ने बताया कि दोनों जिले कैमूर और बक्सर में जनधन के कुल 2.53 लाख खाते है जिसमें 47 करोड़ रुपए जमा कराये गये हैं।

पंजाब नेशनल बैंक

बिहार के कैमूर जिले में जनधन खातों की संख्या 1,32, 096 है जिसमें 8 नवंबर से पहले खाते में 14 करोड़ रुपये जमा थे। 8 नवंबर के बाद से 23 नवम्बर तक 20 करोड रुपए अतिरिक्त जमा कराए गए है।
कैमूर जिले के पीएनबी बैंक के एलडीएम रत्नाकर झा का कहना है कि जिले में मध्य बिहार ग्रामीण बैंक और पीएनबी बैंक में कुल खाते 2 लाख 3 हजार 96 लाख खाते हैं, जिसमें 8 नवम्बर के बाद अबतक लगभग 36 करोड़ रुपए जमा हुए हैं।

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जानकारी के मुताबिक जिले के नुआव और अधौरा प्रखंड के पीएनबी बैंक में सबसे ज्यादा नकदी जमा हुए है। अधिक नकदी जमा होने के कारण बैंक मैनेजरों को सख्त हिदायत दी गई है कि रुपये की लेन देन नियम के अनुसार ही करें।

जानकारों के मुताबिक यह आंकड़े केवल दो जिले के दो बैंकों जनाधन खातों के हैं। इसके अलावा पूरे सूबे में कई बैकों के हजारों बैंक खाते है, जिनमें भारी संख्या में कालाधन जमा कराने की आशंका है। हालांकि बैंक के अधिकारी उन खाताधारकों के बारे में बताने से साफ इनकार कर रहे हैं, जिनके खाते में रुपए जमा कराए गए हैं। अभी तक यह भी खुलासा नहीं हुआ है कि आखिर जनधन खातों धारकों की सहमति से ये रुपये जमा कराए गए या फिर बगैर उनकी जानकारी के। इस मामले में बैंक के अधिकारी कुछ भी कहने से इनकार कर रहे हैं।

श्रोत: ईटीवी