बिहार विश्वविद्यालय में चलाये जा रहे फर्जी कोर्स मामले में बड़े अधिकारियों को बचाने की कवायद शुरू

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मुजफ्फरपुर समाचार / संवाददाता- (Muzaffarpur News) मुजफ्फरपुर जिले के बिहार विश्वविद्यालय में पांच दर्जन फर्जी कोर्स चलाने और पचास लाख के गबन के मामले में कई बड़े अधिकारियों का नाम आने पर उन्हे बचाने की कवायद शुरू हो गई है। जानकारी के अनुसार पूर्व कुलपति डॉ पंडित पलांडे के आदेश पर ही ये फर्जी कोर्स चलाए जा रहे थे।

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राजभवन के आदेश पर हुई जांच में डॉ पलांडे समेत कई बड़े अधिकारी दोषी पाए गए हैं। लेकिन छोटे अधिकारी ललन कुमार पर केस करके कार्रवाई की खानापूर्ति की गई है। फर्जी एम फिल कोर्स और फर्जी भवन के मामले में सुर्खियों में आए बिहार विश्वविद्यालय का दुरस्थ शिक्षा निदेशालय के किसी भी कोर्स को राजभवन की स्वीकृति नहीं है। लेकिन पिछले कई सालों से लाखों छात्रों का नामांकन करके करोड़ों रुपए की उगाही की गई है। इनमें से करीब पचास लाख रुपए के गबन की प्राथमिकी भी विश्वविद्यालय थाने में दर्ज है। लेकिन इस पूरे मामले में सबसे छोटे अधिकारी ललन कुमार को बकरा बनाकर सभी उच्चाधिकारियों को बचाने की कवायद जारी है। दुरस्थ शिक्षा निदेशालय के सभी निर्णय पूर्व कुलपति डॉ पंडित पलांडे, पूर्व रजिस्ट्रार रत्नेश मिश्रा और पूर्व निदेशक डॉ शिवजी सिंह के हैं। इन सभी फैसलों को प्रशासनिक पदाधिकारी रहते ललन कुमार नें लागू किया। राजभवन की जांच में डॉ पलांडे, डॉ रत्नेश मिश्रा और डॉ शिवजी सिंह को समान रुप से दोषी बताया गया है। लेकिन सिर्फ ललन कुमार पर हीं केस किया गया है। इस मामले में राजभवन के आदेश की भी अवहेलना हो रही है। फर्जी कोर्स का मामला उगाजर होने के बाद राजभवन ने ही दूरस्थ शिक्षा निदेशालय के सभी क्रिया कलाप की सघन जांच कराई थी। जांच कमिटि की रिपोर्ट के बाद राजभवन नें सभी दोषियों पर प्राथमिकी दर्ज कराने का आदेश दिया था।