यूनिसेफ के भारत में 70 साल और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौता के अंगीकरण के 30 साल के अवसर पर मेरा नाम है आज – बाल अधिकार ओपन डे का आयोजन

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पटना – आज यूनिसेफ के भारत में 70 साल और संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौता के अंगीकरण के 30 साल के अवसर पर यूनिसेफ पटना कार्यालय में मेरा नाम है आज – बाल अधिकार ओपन डे का आयोजन किया गया। फन, गेम, संवाद, मस्ती और नॉलेज के अनूठे उत्सव की शुरुआत विभिन्न विद्यालयों से आये बच्चों, चाणक्या राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलपति जस्टिस मृदुला मिश्रा, यूनिसेफ बिहार के प्रमुख, असदुर रहमान, निदेशक, जन शिक्षा, शिक्षा विभाग बी के झा प्रसिद्ध शिशु रोग विशेषज्ञ, एवं अन्य अतिथियों की उपस्थिति में हवा में गुब्बारे उड़ा कर किया। इस दौरान बच्चों और गणमान्य अतिथियों ने केक काटकर संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार समझौते की 30 वीं और यूनिसेफ की 70 वीं वर्षगांठ के रूप में मनाया गया।

इस अवसर के बारे में बताते हुए संचार विशेषज्ञ निपुण गुप्ता ने कहा कि आज हमें एक अवसर मिला हैं ताकि हम सब बच्चों के अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को दोहराया और मजबूत किया जा सके जिससे कि सभी बच्चों को उनके पूरे अधिकार बिना किसी भेदभाव के मिल सकें। यह वर्ष यूनिसेफ के भारत में 70 वर्ष पूरे होने का भी है जब केन्द्रीय और राज्य सरकारों के साथ मिलकर एवं अन्य हितधारकों के साथ काम करते हुए यूनिसेफ को भारत में 70 साल पूरे हो जायेंगे।

चाणक्या राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय की कुलपति जस्टिस मृदुला मिश्रा ने कहा कि समाज में बुराइयों से छुटकारा पाने के लिए हमें बच्चों सहित सभी नागरिकों को शिक्षित करने की आवश्यकता है। एक शिक्षित व्यक्ति यह तय कर सकता है कि क्या अच्छा है क्या नहीं। यह सभी की जिम्मेदारी है कि वे अपने अधिकारों के साथ-साथ अपनी जिम्मेदारियों को भी जानें। हम सभी को यह संकल्प लेना चाहिए कि सभी के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए और उनका उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए।

बच्चों के साथ संवाद के दौरान पत्र सूचना कार्यालय, भारत सरकार के निदेशक दिनेश कुमार ने कहा कि हर बच्चा दूसरों से अलग है और उसके अलग-अलग हित और लक्षण हैं। उन्हें स्वतंत्र वातावरण में विकसित होने दिया जाना चाहिए। उन्होंने बच्चों को अच्छी चीजें करने और बेहतर नागरिक बनने के लिए बेहतर सोचने का सुझाव दिया। यूनिसेफ चीफ बिहार असदुर रहमान, ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को अपने करियर विकल्पों के बारे में निर्णय लेने के लिए स्वतंत्र होना चाहिए और अपने माता-पिता की इच्छा के अनुसार चुनाव करने के लिए मजबूर नहीं किया जाना चाहिए। अध्ययन में अंग्रेजी भाषा के महत्व पर एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि ज्ञान, अध्ययन के माध्यम से अधिक महत्वपूर्ण है।

उन्होंने आगे कहा कि स्कूलों में शारीरिक दंड नहीं होना चाहिए। सभी स्कूल बाल अनुकूल होने चाहिए ताकि बच्चे अच्छे माहौल में पढ़ सकें। इस साल विश्व बाल दिवस के उपलक्ष्‍य में यूनिसेफ दुनिया भर में गो ब्लू अभियान चला रहा है। ब्लू रंग को बाल अधिकारों का प्रतीक माना गया है और इसे ही ध्यान में रख कर पूरी दुनिया ब्लू रंग का प्रयोग करके बच्चों के अधिकारों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दर्शाएगी. उत्सव में मेहमानों ने हर बच्चे के अधिकारों के लिए यूनिसेफ की साझा यात्राओं की उपलब्धियों, चुनौतियों और भविष्य की दिशाओं के बारे में कुछ आकर्षक गतिविधियों, खेलों और संवाद में भाग लिया।