कंडक्टर की सूझबूझ से मासूम की अपहरण की कोशिश हुई नाकाम

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भोजपुर – बिहार में बढ़ता अपराध अब थमने का नाम नहीं ले रहा है, ऐसा लगता है कि बिहार में पिछला जंगलराज फिर से कायम हो रहा है क्या एप्पल एंड्रॉयड की तरह यह भी जंगलराज का अपडेटेड वर्जन है? क्योंकि बिहार में बेटियों के साथ दुष्कर्म और हत्या के बाद अब अपहरण की भी साजिश रची जा रही है। मुजफ्फरपुर दुष्कर्म के बाद बिहार के ही भोजपुर जिले में दिनदहाड़े एक मासूम का अपहरण का मामला सामने आया है। जी हां, ताजा मामला है भोजपुर जिले के नवादा थाना क्षेत्र के कनकपुरी मोहल्ले स्टेशन रोड का जहाँ दिनदहाड़े एक मासूम बच्ची के अपहरण का है, हालांकि स्कूल बस के कंडक्टर की बहादुरी और सूझबूझ के कारण अपहरणकर्ता अपनी रची हुई साजिश में विफल हो गया। अगर मौके पर बस कंडक्टर ने बहादुरी नहीं दिखाई होती तो बच्ची के घर में आज मातम का काला छाया पसरा होता और भोजपुर पुलिस सामने आकर सिर्फ इतना कहकर पल्ला झाड़ लेती की सर हम मामले की छानबीन कर रहे हैं। मगर बड़ा सवाल बिहार में पुलिस के सामने यह भी है कि आखिर कबतक लोग अपराध के प्रति पुलिस के इस रवैया को सहन करेंगे खासकर भोजपुर पुलिस और उसके आलाधिकारियों को कबतक लोग झेलते रहेंगे?

गौरतलब है कि भोजपुर के नवादा थाना के इस घटना में मासूम का अपहरणकर्ता तो विफल रहा मगर घटना के 24 घंटे से अधिक बीत जाने के बाद भी परिवार वालों का कहना है कि पुलिस के तरफ से प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बाद अबतक कुछ नहीं किया गया है। मासूम बच्ची पिरो थाना क्षेत्र के सारोपुर गाँव निवासी पंकज कुमार उपाध्याय की 3 वर्षीय पुत्री आरना कुमारी है जो माउंट लिट्रा किड्जी स्कूल के जूनियर केजी में पढ़ती है। बक्सर जिले के सिमरी प्रखंड में जीविका में एरिया कोर्डिनेटर के पद पर कार्यरत मासूम बच्ची के पिता पंकज कुमार उपाध्याय बताते हैं कि वो अपने कार्यालय में काम कर रहे थे कि तभी अचानक से उनके मोबाइल पर इस घटना के बारे में फ़ोन आया कि कोई अनजान व्यक्ति जो कि गमछे से अपना मुँह बाँधा हुआ था उसकी बेटी को अपना बताते हुए बस कंडक्टर से जबरन छीनने की कोशिश करने लगा मगर बस कंडक्टर ने अपनी बहादुरी दिखाई तो आज मेरी बच्ची सही सलामत है। आगे उन्होंने तत्परता से अपनी पत्नी को फ़ोन कर बताया जिसके बाद घटनास्थल पर उनकी पत्नी के पहुंचते-पहुंचते अपहरणकर्ता भीड़ के आँखों में धूल झोंक कर मौके से फरार हो गया।

मासूम की माँ कृष्णा देवी बताती है कि जैसे ही स्कूल बस पहुंचा तो कंडक्टर ने मुझे डायरी से नम्बर निकाल कर फ़ोन करने का प्रयास किया तबतक कोई अनजान व्यक्ति जबरन कंडक्टर से बच्ची के ऊपर अपना दावा ठोंकने लगा और कंडक्टर के हाथ से डायरी छिनने लगा मगर कंडक्टर अपनी बातों पर अड़ गया और उससे उलझ गया कि आप कौन होते हैं डायरी छीनने वाले और उसने बच्ची का हाथ नहीं छोड़ा, जैसे ही भीड़ से अपहरणकर्ता ने सुना कि बच्ची के परिजन आ गए तो वो मौके से चकमा देकर फरार हो गया।

वहीं इस घटना के बाद मासूम बच्ची काफी डरी सहमी सी हुई है। इस मामले में बच्ची का कहना है कि एक अनजान व्यक्ति जो अपना मुँह गमछे से बांधा हुआ था वो जबरदस्ती दीपक अंकल (बस कंडक्टर) के साथ मारपीट करने लगा और जबरन मुझे कहने लगा की चलो मेरे साथ मेरे घर पर, हालांकि घटना मासूम के साथ हुआ है जिससे वो अबतक काफी डरी हुई है इसलिए वो आगे कुछ नहीं बता पा रही है।

घटना प्रकाश में आने के बाद जैसे ही बस कंडक्टर दीपक से बात की गई तो कंडक्टर दीपक ने बताया कि मैं हर दिन की तरह कल भी बच्ची को छोड़ने गया तो एक व्यक्ति द्वारा बच्ची को अपना कहकर उसे जबरदस्ती अपने साथ ले जाने का दावा करने लगा और मेरे साथ भी जबरन मारपीट करने लगा और विरोध करने पर भीड़ एकत्रित हुए और उसी में वो चकमा देकर भाग निकला।

बहरहाल अपहरण की नाकामी का सारा मामला सीसीटीवी फुटेज में कैद हो गया है। भले ही यह मामला बस कंडक्टर की सूझबूझ से विफल हो गया मगर क्या भोजपुर पुलिस और उसके आलाधिकारी ऐसे ही आँख बंद कर अपराधियों को संरक्षण देते रहेंगे, आखिर कबतक सरकार की भी आंखें बंद रहेंगी।