बिहार: एक परिचय

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बिहार के सन्दर्भ में प्रथम जानकारी हमें “शतपथ ब्राह्मण” से मिलती है, जिसमें माधव विदेह नामक एक राजा का उल्लेख है जिसने मिथला के गौरवशाली साम्राज्य की आधारशिला रखी।

बिहार की प्राचीनता इसके नाम से ही प्रकट हो जाती है। वास्तव में बिहार शब्द “विहार” का तद्भव है जिसका अर्थ है “मठ” अर्थात भिक्षुओं का निवास स्थान्।

बिहार का उल्लेख वेदों, पुराणों और महाकाव्यों आदि में मिलता है। बिहार महात्मा बुद्ध और जैन तीर्थंकरो की कर्मभूमि रहा है। ईसा पूर्व के समय में इस क्षेत्र पर बिहार के महान शासकों में बिम्बिसार, उदायिन, चन्द्रगुप्त मौर्य, सम्राट अशोक और शुंग, कण्व व मौर्य राजवंश के नरेशों ने राज्य किया। कुषाण राजवंश के बाद गुप्त राजवंश के चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने यहां शासन किया। मध्यकाल में मुस्लिम शासकों का इस क्षेत्र पर अधिकार रहा। बिहार पर सबसे पहले विजय पाने वाला मुस्लिम शासक मुहम्मद बिन बख्तियार खिलजी था। खिलजी वंश के बाद तुगलक वंश के शासकों ने यहां अपना राज्य स्थापित किया और उसके बाद मुगल आए। मुगल साम्राज्य के बिखरने का फायदा उटाकर 1757 में प्लासी की लड़ाई के बाद ब्रिटिश शासकों ने अपनी स्थिति मजबूत की। 1911 तक बिहार, बंगाल प्रेसीडेन्सी का हिस्सा बना रहा। 12 दिसम्बर, 1911 को संयुक्त बिहार और उड़ीसा राज्य का गठन किया गया। 1936 में बिहार अलग राज्य बना। 15 नवम्बर, 2000 को एक बार फिर “बिहार” को विभाजित करके, उसके दक्षिणी भाग से नवोदित राज्य “झारखण्ड” का गठन किया गया।

वर्ष 2001 की जनगणना के बाद बिहार क्षेत्रफल की दृष्टि से देश का बारहवां और जनसंख्या की दृष्टि से तीसरा सबसे बड़ा राज्य है।

बिहार भारतीय संघ का एक महत्वपूर्ण राज्य है। इसके उत्तर में नेपाल, पूरब में पश्चिम बंगाल, पश्चिम में उत्तर प्रदेश और दक्षिण में झारखण्ड है। इसका कुल क्षेत्रफल 94, 163 वर्ग किलोमीटर है। राज्य की प्रमुख फसलों में धान, गेहूं, मक्का और दलहन सम्मिलित हैं। मुख्य नगदी फसलों में गन्ना, आलू, तम्बाकू, तिलहन, प्याज, मिर्च और पटसन सम्मिलित हैं। बिहार में पटना साहिब, गया, बोधगया, नालन्दा, वैशाली आदि दर्शनीय स्थल हैं।

राज्य की द्वि-सदनीय विधायिका में विधानसभा हेतु निर्धारित सदस्य संख्या 243 तथा विधान परिषद हेतु 75 है। राज्य से लोकसभा हेतु 40 तथा राज्यसभा हेतु 16 सदस्य निर्वाचित होते हैं।