बिहार के राजनीतिक सीन में अपनी स्पेस बनाने की कोशिश में जुटी पार्टियां, जनता से जुड़ने का कर रही हर प्रयास

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MB DESK: बिहार विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहा वैसे-वैसे सूबे की सभी राजनीतिक पार्टियां अपने-अपने तरीके से जनता से जुड़ने के हथकंडे अपना रही है. चाहे वो बीजेपी हो, जेडीयू हो, कांग्रेस हो या आरजेडी सभी चुनाव से पहले जनता के बीच अपनी पैठ बनाने की जुगुत में लग गए हैं. कोरोना काल की वजह से पार्टी नेता खुलेआम सभा या रैली नहीं कर पा रहे हैं, ऐसे में अलग-अलग तरीकों से वे जनता के बीच जा रहे हैं.

बिहार में जनसंपर्क की रेस में फिलहाल सबसे आगे बीजेपी चल रही है. गुरुवार को राजधानी के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक नितिन नवीन पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल के साथ पीएम मोदी की चिट्ठी पहुंचाने के बहाने पटना की गलियों में घूमते नजर आए. संजय जायसवाल जनता से मिल रहे हैं और अपना परिचय बताते हुए केंद्र में पीएम मोदी की सरकार के एक साल की उपलब्धियों का ब्यौरा एक पत्र के माध्यम से लोगों तक पहुंचा रहे हैं.

इधर, सीएम नीतीश जेडीयू नेताओं के साथ सोशल मीडिया प्लेटफार्म का इस्तेमाल कर युवा वोटर्स को साधने की तैयारी में जुट गए हैं. सीएम नीतीश पिछले 6 दिनों से वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये हर जिले के कार्यकताओं से जुड़ रहे हैं और लगातार उन्हें निर्देश दे रहे हैं कि वो सरकार के कामों को लेकर जनता के बीच जाएं और उन्हें समझाएं. वहीं उन्होंने कार्यकर्ताओं को युवा वोटर्स पर खास ध्यान देने को कहा है. उन्होंने यह निर्देश दिया कि पार्टी कार्यकर्ता फर्स्ट टाइम वोटर्स को 15 पहले और अब की स्थिति का अन्तर बताएं.

इधर आरजेडी भी सरकार को घेरने के साथ-साथ लगातार किसी ना किसी तरह से जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है. पार्टी सुप्रीमो लालू यादव के भी जन्मदिन पर उन्होंने जनता से जुड़ने की कोशिश की. जन्मदिन के अवसर पर केक काटने के बजाय उन्होंने उसे गरीब सम्मान दिवस के रूप में मनाया, जिसमें उन्होंने समाज के 72,000 गरीब तबके के लोगों को खाना खिलाने के टारगेट रखा था. इससे पहले बीजेपी के वर्चुअल रैली वाले दिन उन्होंने गरीब अधिकार दिवस के तहत थाली बजाने का कार्यक्रम रखा था, जिसमें कई लोगों ने सरकार के खिलाफ थाली बजाई थी.

जनसंपर्क की दौड़ में सबसे पीछे चल रही कांग्रेस मौजूदा समय में कुछ खास सक्रिय नजर नहीं आ रही. फिलहाल कांग्रेस प्रवासी माजदूरों के मुद्दे को लेकर सरकार को घेर रही है. हालांकि उसका बिहार की राजनीति में उसका कुछ खास असर नजर नहीं आ रहा है. इधर अन्य पार्टियां जैसे AIMIM, CPI, CPI(M), JAP(L) भी अपने- अपने तरीके से जनता से जुड़ने की कोशिश कर रही है. साथ ही साथ बिहार के राजनीतिक परिवेश में अपनी स्पेस बनाने की कोशिश कर रही है.

पटना से श्रावणी की रिपोर्ट