बिहार-यूपी में कोरोना से निपटना बड़ी चुनौती, सामुदायिक संक्रमण का मंडरा रहा खतरा

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MB DESK: पूरे विश्व में कोरोना वायरस का कहर जारी है. देश में रोजना कोरोना संक्रमित मरीज मिलने के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं. ऐसे में देश के दो सबसे बड़े राज्य उत्तरप्रदेश और बिहार में कोरोना के हालात को लेकर चिंता गहराने लगी है. घनी आवादी वाले दोनों राज्य में कोरोना संक्रमण को कंट्रोल करना, साथ ही संक्रमित मरीजों का इलाज करना राज्य सरकार के लिए चुनौती बनी हुई है. दोनों ही राज्य में आम से लेकर खास लोग कोरोना के जद में आ रहे हैं.

बिहार स्वास्थ्य विभाग के अनुसार राज्य में अब तक 21,558 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं, जिनमें से 13,533 मरीज पूरी तरह से ठीक होकर अपने घर जा चुके हैं. जबकि राज्य में अबतक कुल 157 लोगों की संक्रमण से मौत हो चुकी है. इधर यूपी के आंकड़ों को देखा जाए तो राज्य में अब तक कुल 41,383 कोरोना संक्रमित मरीज मिले हैं, जिनमें से 25,743 लोग रिकवर कर चुके हैं. वहीं अब तक संक्रमण से 1,012 लोगों की मौत हुई है.

दोनों राज्यों में लगातार कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या बढ़ रही है. लेकिन सरकार स्थिति पर नियंत्रण करने में कुछ खास सफल नजर नहीं आ रही हैं. दोनों राज्यों में स्वास्थ्य व्यवस्था की स्थिति कमोबेश एक जैसी ही है. अस्पतालों की कमी तो है कि साथ ही साथ मूल सुविधाओं का भी भारी अभाव है. सबसे बड़ी बात यह कि दोनों राज्यों में कोरोना जांच की संख्या काफी कम है. केंद्र की ओर से लगातार दोनों राज्यों में कोरोना जांच की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया जा रहा है लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है.

बता दें कि उत्तर प्रदेश और बिहार दो ऐसे राज्य हैं जहां लॉकडाउन के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से सबसे ज्यादा प्रवासी मजदूर लौटे हैं, ऐसे में राज्य सरकार का यह रवैया घातक साबित हो सकता है. दोनों राज्यों में जांच की स्थिति अगर देखी जाए तो आबादी के मुकाबले जांच की संख्या काफी कम है. ऐसे में दोनों राज्यों में सामुदायिक संक्रमण का खतरा बढ़ता दिख रहा है.

एक और मुद्दा काफी चिन्तनीय है वह यह है कि दोनों राज्य के लोग कोरोना के प्रति जागरूक नहीं हैं. सरकार लगातार जागरूकता अभियान चला रही है, लेकिन लोगों के बीच कोई खास प्रभाव नज़र नहीं आ रहा. प्रशासन की सख्ती के बावजूद लोग बेवजह बिना किसी प्रोटेक्शन सड़क पर निकल रहे हैं. ऐसे में सरकार के सामने कोरोना को कंट्रोल करना एक बहुत बड़ी चुनौती है.

बिहार में मुख्य रूप से राजधानी पटना, गया, भागलपुर, सिवान और बेगुसराय कोरोना हॉटस्पॉट बना हुआ है, जबकि यूपी में कोरोना के मामले उन जिलों में ज़्यादा हैं जो दिल्ली से सटे हुए हैं – जैसे गाज़ियाबाद और गौतम बुद्ध नगर. इसके अलावा बरेली, वाराणसी, आगरा और अलीगढ़ में भी स्थिति बहुत ज़्यादा अच्छी नहीं है. राजधानी लखनऊ, कानपूर, मेरठ, मथुरा, गाज़ीपुर और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह ज़िले गोरखपुर में भी कई मामले रोजाना सामने आ रहे हैं.

ऐसे में प्रशानिक स्तर पर यह जरूरी है कि कोरोना जांच की संख्या को जल्द से जल्द बढ़ाया जाए. साथ ही संक्रमित मरीजों के इलाज के लिए समुचित व्यवस्था की जाए. वहीं सामाजिक स्तर पर यह जरूरत कि दोनों ही राज्यों की जनता सरकार के निर्देशों का पालन करें और खुद सुरक्षित रहने के साथ-साथ लोगों को भी सुरक्षित रहने में मदद करें. वहीं कोरोना महामारी से जारी इस लड़ाई में सरकार की मदद करें.