पारस को परिषद में मनोनीत किए जाने का कॉंग्रेस ने किया घोर विरोध

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पटना – बिहार प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने राज्य के पशुपालन मंत्री पशुपति कुमार पारस को राज्यपाल द्वारा विधान परिषद का सदस्य मानोनीत किये जाने पर आपत्ति जताई है।

पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता पूर्व विधायक डा0 हरखु झा ने कहा है कि राज्यपाल जी ने संविधान के अनुच्छेद 171-5 के खंड-3 उपखंड (ड) का उल्लंघन कर पशुपति कुमार पारस को विधान परिषद में मनोनीत किया है।

डा0 झा ने कहा है कि उतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने भी संविधान के अनुच्छेद 166(3) (बिहार कार्यपालिका नियमावली) एवं अनुच्छेद-163 मंत्री परिषद का अनदेखी कर इनके नामों की अनुशंसा किया है।

डा0 झा ने कहा है कि 171 में स्पष्ट प्रावधान है कि जो कोई व्यक्ति परिषद के लिए चुना जायेगा उसकी योग्यता निम्न प्रकार होगी। साहित्य, विज्ञान, कला, सहकारी आन्दोलन और समाज सेवा। जबकि पारस इस कैटगरी में कहीं से नहीं आते हैं वे अभी रा0 लोक जनशक्ति पार्टी के बिहार यूनिट के अध्यक्ष हैं किसी पार्टी का अध्यक्ष समाज सेवी नहीं कहलाता वे सिर्फ अपने पार्टी के लिए कार्य करता है।

डा0 झा ने कहा है कि जब इस सम्बन्ध में पटना हाईकोर्ट ने पहले दिशा निर्देश दे रखा है कि भविष्य में जो भी राज्यपाल द्वारा मनोनयन होगा वह नियमाकुल होगा। लेकिन सभी नियमों को ताख पर रखकर मुख्यमंत्री एवं राज्यपाल ने इन्हें विधान परिषद का सदस्य मनोनीत किया जो घोर अपमान का विषय है।

डा0 झा ने कहा है कि समाज सेवा के नाम पर मुख्यमंत्री ने ललन सिंह, रामचन्द्र भारती, शिव प्रसन्न यादव, संजय कुमार सिंह, ललन कुमार सरार्फ, रणवीर नंदन, जावेद इकबाल अंसारी जैसे सदस्यों का पहले मनोनयन करवा दिया है। जबकि समाज में अभी भी एक से एक साहित्यकार, वैज्ञानिक, कला प्रेमी, खेल जगत के महारथी लोग इस आस में बैठे हैं कि हमें भी यह मौका मिले।

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