Thursday, December 13, 2018

    History

    सच्चे मन से मांगी गयी मुराद पूरी होती है कुंडलपुर में

    नालंदा - नालंदा से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर कुंडलपुर गाँव अवस्थित है. ऐसी मान्यता है कि जैनों के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर का जन्म यहीं हुआ था. जैन आचार्या ज्ञान मति माता...

    चरमपोश की मजार पर दूर-दूर से अकीदतमंद आकर अपनी श्रद्धा के फूल चढ़ाते हैं

    पटना - बिहारशरीफ के अम्बेर शेखाना मुहल्ला में हजरत मखूदम सैयद सुल्तान अहदम चरमपोश के मजार पर दूर-दूर से अकीदतमंद आकर अपनी श्रद्धा के फूल चढ़ाते हैं. हजरत मखूदम चरमपोश का वफात (इंतकाल) लगभग...

    मंदिरों में शुमार बूढ़ानाथ में हुई शादी का रिश्ता रहता है अटूट

    भागलपुर - बूढ़ानाथ सिल्क सिटी भागलपुर का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है. यहाँ भगवान शिव का अत्यंत प्राचीन मंदिर है. मंदिर का तीन सौ वर्ष पुराना गौरवशाली इतिहास है. त्रेता युग की कथा से...

    बटेश्वर मंदिर में भादो पूर्णिमा पर लगता है मेला

    भागलपुर - कहलगांव में बटेश्वर मेला की धूम रहती है. यहाँ भादो पूर्णिमा पर मेला का आयोजन होता है. प्रसिद्ध व प्राचीन शैव स्थल बटेश्वर स्थान में उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करने तथा बाबा...

    एक रूपये किराया से चलता था पटना कला शिल्प महाविद्यालय

    पटना - सूबे का एक मात्र कला एवं शिल्प महाविद्यालय का गौरव प्राप्त करने वाला पटना कला शिल्प महाविद्यालय का स्वर्णिम इतिहास रहा है. कला प्रशिक्षण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में विद्यापति...

    क्या आप जानते हैं, अंग्रेजों ने दिया था दरभंगा हाउस नाम !

    पटना - गेरुए रंग से रंगी व खूबसूरत कलाकृतियाँ दरभंगा हाउस की सुंदरता में चार चाँद लगाने के साथ लोगों को अपनी ओरआकर्षित करती है. गंगा किनारे बना दरभंगा हाउस दरभंगा महाराजाओं का ठिकाना...

    अदालतों का बहिष्कार

    पटना - सरकारी उपाधियों और खिताबों को छोड़ना, सरकारी शिक्षा-संस्थाओं, कौंसिल और सरकारी अदालतों का बहिष्कार करना, 1920 में चलाए गए असहयोग आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य थे। अंग्रेज सरकार के समर्थकों को सरकार राय...

    युवक का आत्म-बलिदान

    नमक आन्दोलन के साथ, बिहार में चौकीदारी टैक्स का विरोध, नशाबंदी और स्वदेशी आन्दोलन का काम भी किया जाता जाता था. 26 जनवरी 1930 को लाहौर में रावी नदी के किनारे कांग्रेस ने पूर्ण...

    पटना कलेक्ट्रेट कभी डच व्यापारियों का था गोदाम

    पटना - बिहार में 17वीं सदी में कारोबार के लिए आए डचों की निशानियाँ आज भी बिहार में है. पटना से लेकर छपरा तक डच व्यापारियों के गोदाम, उनके द्वारा बनाये गए शानदार वास्तुकला...

    जोधारा सिंह की अंग्रेजों को चुनौती

    सन 1857 की क्रांति को मुख्य रूप से सैनिकों का विद्रोह माना जाता है. लेकिन ऐसे भी व्यक्ति थे, जिन्होंने खुलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनता का नेतृत्व किया और उसी उद्देश्य से बाजाप्ता...

    गया से खजाना हटा

    1857 की क्रान्ति की लहर से गया भी अछूता नहीं रह सका. ग्रांड ट्रंक रोड के किनारे बसे होने के कारण इसका बड़ा महत्व था. गया के मजिस्ट्रेट अलोर्जो मोनी को अपने 45 अंग्रेज...

    सारण जिले में मार्शल लॉ

    सारण जिला शुरू से ही स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहा है. फिर 1942 की क्रान्ति में कैसे पीछे रहता? अगस्त से ही क्रान्ति का दौर शुरू हो गया था. स्कूल और कॉलेज के लड़कों...

    घुड़सवारों का मुकाबला लाठी से

    सीवान जिले में आंदर एक थाना है. आंदर थाने में ही जीरादेई गाँव है, जो गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जन्मभूमि है. इसी गाँव से दो मील की दूरी पर...

    हसन इमाम साहब ने बूढ़े दुकानदार के पैरों पर क्यों अपनी टोपी उतारकर रख...

    पटना - शायद ही कोई बिहारवासी होगा, जिसने अली इमाम साहब का नाम नहीं सुना होगा. इनका नाम बड़ी श्रद्धा से याद किए जाते हैं. ये बिहार के निर्माताओं में से थे. अली इमाम...

    मानव जाति की प्रारंभिक रचनात्मक कला का उत्सव शैल चित्र कला

    पटना - बिहार संग्रहालय, पटना अपने सहकारिता प्रोग्राम के तहत इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (IGNCA) नई दिल्ली के सहयोग से बिहार संग्रहालय के अस्थायी दीर्घा में विश्व शैलचित्र कला (विषय) पर आधारित एक...