Sunday, February 17, 2019

    History

    आज भी सुरक्षित है सिन्हा लाइब्रेरी में भारतीय संविधान की प्रतिलिपि

    पटना भारतीय संविधान की प्रतिलिपि सिन्हा लाइब्रेरी में आज भी सुरक्षित है. हाथों से लिखी गयी संविधान की यह प्रतिलिपि दुर्लभ दस्तावेजों में से एक है, जिसे लाइब्रेरी ने काफी सहेज कर रखा है....

    आध्यात्म और वास्तुकला का मिश्रित नमूना ‘महाबोधि मंदिर’

    पटना - विश्वस्तरीय विरासत के रूप में सम्मान पा रहा बोधगया स्थित महाबोधि मंदिर आध्यात्म और वास्तुकला का मिश्रित और नायाब नमूना है. शरद ऋतु में बोधगया धर्मावलम्बियों की आस्था के विभिन्न रूप देखने...

    मिर्चा चूड़ा : नाम तीखा लेकिन स्वाद बड़ा मीठा

    बेतिया - बेतिया पश्चिम चंपारण जिले का मुख्यालय है जो भारत-नेपाल सीमा पर स्थित सबसे बड़े शहरों में से एक है. 'बेतिया' शब्द 'बेंत' से उत्पन्न हुआ है जो कभी यहाँ बड़े पैमाने पर...

    पटना संग्रहालय के पाटलिपुत्र दीर्घा में 22 सौ साल पुरानी मूर्ति

    पटना - पटना संग्रहालय के पाटलिपुत्र दीर्घा की तरफ गैलरी में प्रथम विश्व का हथियार और लकड़ी के तलवार को सुरक्षित रखा गया है. प्रथम विश्वयुद्ध से पहले इस्तेमाल किये जाने वाले बन्दूक का...

    दानापुर गणेश मेले में जुटते हैं श्रद्धालु

    पटना - भगवान गणेश, जिनकी सबसे पहले पूजा होती है. इनकी पूजा भी बिहार के विभिन्न हिस्सों में भव्य तरीके से होती है. कई हिस्सों में भादो पूर्णिमा के दिन गणेश मेला का आयोजन...

    सच्चे मन से मांगी गयी मुराद पूरी होती है कुंडलपुर में

    नालंदा - नालंदा से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर कुंडलपुर गाँव अवस्थित है. ऐसी मान्यता है कि जैनों के 24वें तीर्थकर भगवान महावीर का जन्म यहीं हुआ था. जैन आचार्या ज्ञान मति माता...

    चरमपोश की मजार पर दूर-दूर से अकीदतमंद आकर अपनी श्रद्धा के फूल चढ़ाते हैं

    पटना - बिहारशरीफ के अम्बेर शेखाना मुहल्ला में हजरत मखूदम सैयद सुल्तान अहदम चरमपोश के मजार पर दूर-दूर से अकीदतमंद आकर अपनी श्रद्धा के फूल चढ़ाते हैं. हजरत मखूदम चरमपोश का वफात (इंतकाल) लगभग...

    मंदिरों में शुमार बूढ़ानाथ में हुई शादी का रिश्ता रहता है अटूट

    भागलपुर - बूढ़ानाथ सिल्क सिटी भागलपुर का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है. यहाँ भगवान शिव का अत्यंत प्राचीन मंदिर है. मंदिर का तीन सौ वर्ष पुराना गौरवशाली इतिहास है. त्रेता युग की कथा से...

    बटेश्वर मंदिर में भादो पूर्णिमा पर लगता है मेला

    भागलपुर - कहलगांव में बटेश्वर मेला की धूम रहती है. यहाँ भादो पूर्णिमा पर मेला का आयोजन होता है. प्रसिद्ध व प्राचीन शैव स्थल बटेश्वर स्थान में उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करने तथा बाबा...

    एक रूपये किराया से चलता था पटना कला शिल्प महाविद्यालय

    पटना - सूबे का एक मात्र कला एवं शिल्प महाविद्यालय का गौरव प्राप्त करने वाला पटना कला शिल्प महाविद्यालय का स्वर्णिम इतिहास रहा है. कला प्रशिक्षण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में विद्यापति...

    क्या आप जानते हैं, अंग्रेजों ने दिया था दरभंगा हाउस नाम !

    पटना - गेरुए रंग से रंगी व खूबसूरत कलाकृतियाँ दरभंगा हाउस की सुंदरता में चार चाँद लगाने के साथ लोगों को अपनी ओरआकर्षित करती है. गंगा किनारे बना दरभंगा हाउस दरभंगा महाराजाओं का ठिकाना...

    अदालतों का बहिष्कार

    पटना - सरकारी उपाधियों और खिताबों को छोड़ना, सरकारी शिक्षा-संस्थाओं, कौंसिल और सरकारी अदालतों का बहिष्कार करना, 1920 में चलाए गए असहयोग आंदोलन के प्रमुख उद्देश्य थे। अंग्रेज सरकार के समर्थकों को सरकार राय...

    युवक का आत्म-बलिदान

    नमक आन्दोलन के साथ, बिहार में चौकीदारी टैक्स का विरोध, नशाबंदी और स्वदेशी आन्दोलन का काम भी किया जाता जाता था. 26 जनवरी 1930 को लाहौर में रावी नदी के किनारे कांग्रेस ने पूर्ण...

    पटना कलेक्ट्रेट कभी डच व्यापारियों का था गोदाम

    पटना - बिहार में 17वीं सदी में कारोबार के लिए आए डचों की निशानियाँ आज भी बिहार में है. पटना से लेकर छपरा तक डच व्यापारियों के गोदाम, उनके द्वारा बनाये गए शानदार वास्तुकला...

    जोधारा सिंह की अंग्रेजों को चुनौती

    सन 1857 की क्रांति को मुख्य रूप से सैनिकों का विद्रोह माना जाता है. लेकिन ऐसे भी व्यक्ति थे, जिन्होंने खुलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनता का नेतृत्व किया और उसी उद्देश्य से बाजाप्ता...