Tuesday, November 20, 2018

    History

    पतेसर शरीफ में पूरी होती हर दुआ

    बिहार हमेशा से ही सूफी-संतों की कर्म और साधना स्थल रहा है. यहाँ सूफी-संतों ने मानव मन को वैचारिक पवित्रता प्रदान करने के लिए आध्यात्मिकता की अविरल धारा प्रवाहित की है. कैमूर की पावन...

    आस्था का पर्याय, माँ मुंडेश्वरी धाम!

    बिहार के कैमूर जिला मुख्यालय भभुआ से लगभग 15 किलोमीटर दूर कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित माँ मुंडेश्वरी एवं महामंडलेश्वर महादेव का मंदिर है. यह मंदिर लगभग साढ़े सौ फीट की ऊंचाई पर है....

    दिलचस्प है चाय का इतिहास, वाह बिहार!

    असम और दार्जिलिंग की चाय के बारे में तो सब जानते हैं लेकिन किशनगंज और कटिहार ब्रांड बिहार चाय है. बिहार में चाय की खेती सर्वप्रथम 1982 में किशनगंज जिले में आधा हेक्टेयर भूमि...

    बड़ा अलबेला है बसैठी का यह मेला!

    अररिया - यहाँ के मंदिरों का कई इतिहास है. इसमें बसैठी का भी शिव मंदिर खास है. जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर बसैठी में सत्रहवीं सदी में स्थापित यह मंदिर आस्था का केंद्र...

    लोक कलाकार भिखारी ठाकुर

    बिहार के भोजपुर जनपद में एक ऐसे कलाकार ने जन्म लिया, जिसने अपने गीत एवं नाट्य-नाच कला से तत्कालीन समाज-व्यवस्था को झकझोर दिया। वो और कोई नहीं बल्कि बिहार के सारण जिले में जन्मे...

    संत रामकृष्ण परमहंस का गया से है गहरा नाता

    श्री रामकृष्ण परमहंस एक ऐसे संत जिन्हें कोई विष्णु का अवतार कहता है तो कोई हिन्दू धर्म की गंगा। इस महान संत ने एक से एक शिष्य दिए जो आज भी देश-विदेश को अध्यात्म...

    क्या आप जानते हैं नालंदा विश्वविद्यालय में आग किसने लगाई

    नालंदा विश्वविद्यालय! इस नाम का उच्चारण आपको ज्ञान के भारत के प्राचीन इलाके में ले जाएगा। बिहार में स्थित उच्च शिक्षा का यह प्राचीन केंद्र (मगध के प्राचीन साम्राज्य में), तक्षशिला के बाद भारत...

    क्या आप जानते हैं बांकीपुर मैदान गांधी मैदान में कैसे परिवर्तित हुआ

    आज का गांधी मैदान बांकीपुर मैदान के नाम से जाना जाता था, परन्तु आज यह जन-जन के बीच गांधी मैदान के नाम से जाना जाता है. लेकिन यह जानकारी बहुत कम लोगों को है...

    नमक सत्याग्रह आन्दोलन में चौगाई लोगों की क्या थी भूमिका

    "हर गलियों हर कूचे में लग गई आग आजादी की। चलो हिन्दवों स्वागत करने देवी खड़ी आजादी की।।" 12 मार्च, 1930 को महात्मा गांधी साबरमती आश्रम से ऐतिहासिक दण्डी मार्च पर कूच किये। गांधी के दण्डी...

    क्यों कहते हैं कुँवर सिंह भी बड़ा वीर मर्दाना था

    पटना - "वीर भक्त का वही जाह्नवी को मानो नजराना था, सब कहते हैं कुँवर सिंह भी बड़ा वीर मर्दाना था" जगदीशपुर के राजमहल में एक वृद्ध युवक के दिल में अंग्रेज शासक के...

    पर्वत-पुरुष दशरथ माँझी

    सुप्रिया सिन्हा - गया - अचानक! उनकी आँखों में आँसू थम गए. धीरे-धीरे दिल की वेदना हर्ष में बदलने लगी. क्या हुआ उनकी पत्नी नहीं रही, गाँव की बहू-बेटियों को तो अब वे कष्ट नहीं...

    गौतम बुद्ध की साधना भूमि – वैशाली

    वैशाली - बिहार की वैशाली वह भूमि है, जो गौतम बुद्ध की साधना भूमि रही थी. उनके तपश्चर्या के अधिकांश समय वैशाली में ही व्यतीत हुए. ईसा से लगभग 623 वर्ष पूर्व क्रांतिकारी दार्शनिक...

    1942 के सात शहीद

    पटना - 11 अगस्त,1942 का वह दिन जो बिहार के स्वतंत्रता संघर्ष के इतिहास में स्मरणीय बन गया. यह वही सात तरुणों की शहादत का दिन था जिन्होंने स्वतंत्रता की बेदी पर हँस कर...

    भारत छोड़ो आंदोलन और बिहार

    अंग्रेजों की क्रूर दमन नीति के कारण राष्ट्रीय भावना उग्रतर होती गई. सारे हिन्दुस्तानियों की नसों में क्रान्ति का रक्त दौड़ उठा. 7 अगस्त, 1942 को कांग्रेस के बम्बई अधिवेशन में "अंग्रेजों भारत छोड़ो"...

    हिमालय और गंगा नदी की तलहटी के बीच स्थित प्राचीन भारत में था “विदेह...

    अजय धारी सिंह दरभंगा- हिमालय और गंगा नदी की तलहटी के बीच स्थित प्राचीन भारत में था "विदेह राज्य"। जो अपने लोकप्रिय मिथिला राज्य के रूप में जाना जाता है। भारत और नेपाल-मिथिला...