Friday, February 22, 2019

    History

    सरकारी उपेक्षा के कारण कन्दाहा का सूर्य मंदिर गुमनामी के कगार पर

    सहरसा- कोणार्क और देव सरीखा नहीं अगर शास्त्र को मानें तो इन दोनों से श्रेष्ठ सहरसा जिले के कन्दाहा ग्राम स्थित अति विशिष्ट सूर्य मंदिर आज सरकारी उपेक्षा और प्रशासनिक उदासीनता का दंश झेल-झेल...

    आज भी सुरक्षित है सिन्हा लाइब्रेरी में भारतीय संविधान की प्रतिलिपि

    पटना भारतीय संविधान की प्रतिलिपि सिन्हा लाइब्रेरी में आज भी सुरक्षित है. हाथों से लिखी गयी संविधान की यह प्रतिलिपि दुर्लभ दस्तावेजों में से एक है, जिसे लाइब्रेरी ने काफी सहेज कर रखा है....

    बटेश्वर मंदिर में भादो पूर्णिमा पर लगता है मेला

    भागलपुर - कहलगांव में बटेश्वर मेला की धूम रहती है. यहाँ भादो पूर्णिमा पर मेला का आयोजन होता है. प्रसिद्ध व प्राचीन शैव स्थल बटेश्वर स्थान में उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान करने तथा बाबा...

    सुपौल के इस मंदिर में भीम ने की थी भोलेनाथ की पूजा

    बिहार के सहरसा फारबिसगंज रेलखंड पर सुपौल जिला स्थित है। सुपौल जिला वर्तमान सहरसा जिले से 14 मार्च 1991 में विभाजित होकर अस्तित्व में आया। सांस्कृतिक रुप से यह काफी समृद्ध जिला है। नेपाल...

    नेपाली मंदिर बिहार का खजुराहो

    भारतीय समाज में अनादि काल से सामाजिक प्रकाश स्तंभ की भांति मंदिरों का अस्तित्व विद्यमान रहा है। बिहार के हाजीपुर में कौनहारा घाट पर बना नेपाली मंदिर काष्ठ कला का अदभूत नमूना है। पटना-मुजफ्फरपुर...

    Dr Rajendra Prasad’s speech on August 14 in Parliament

    CONSTITUENT ASSEMBLY OF INDIA - Volume-V Thursday, the 14th August 1947 The Fifth Session of the Constituent Assembly of India commenced In the Constitution Hall, New Delhi, at Eleven P.M, Mr. President (The Honourable Dr. Rajendra...

    नवपाषाण काल का साइट चिरांद की स्थिति गंभीर

    सारण: इस बार बिहार में आई विनाशकारी बाढ़ से काफी कटाव हुआ है। जिससे चिरांद के महत्वपूर्ण पुरातात्विक स्थल को भी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के दौरान जल संसाधन विभाग की टीम ने इस...

    ‘मनियार मठान’ था मनेरशरीफ का प्रारंभिक नाम !

    पटना - बिहार के प्रमुख मजारों में शुमार मनेरशरीफ दरगाह किसी तीर्थ स्थान से कम नहीं है. उर्स के मेले के अलावे यहाँ पर सालों भर पर्यटकों का आना-जाना लगा रहता है. यहाँ पर...

    एक रूपये किराया से चलता था पटना कला शिल्प महाविद्यालय

    पटना - सूबे का एक मात्र कला एवं शिल्प महाविद्यालय का गौरव प्राप्त करने वाला पटना कला शिल्प महाविद्यालय का स्वर्णिम इतिहास रहा है. कला प्रशिक्षण के सबसे बड़े केंद्र के रूप में विद्यापति...

    एक चिता पर बना दरभंगा का श्यामा काली मंदिर, जाने पूरी कहानी

    पटना: बिहार के दरभंगा जिले में बहुत सारे मंदिर है उन्ही मंदिरों में एक रामेश्वरी श्यामा काली मंदिर है। इस काली मंदिर का अपना अलग ही पहचान है। मां के इस मंदिर को भक्त...

    अब इस मंदिर में नहीं दी जाएगी भैंसों की बलि

    बांका: बिहार के बांका जिले में स्थित तेलडीहा दुर्गा मंदिर पशु बलि के लिए प्रसिद्ध है। लगभग चार सौ साल पुरानी यह मंदिर बांका और मुंगेर जिले की सीमा पर और बडुआ नदी किनारे...

    गंगा-यमुनी तहजीब का संगम मनेर शरीफ दरगाह

    बिहार के मनेर शरीफ जो सूफी संत मखदमू यहया मनेरी के नाम से जाने जाते है। मनेर शरीफ खानकाह का इतिहास काफी पुराना है। देश में सूफी सिलसिले की शुरुआत का गवाह मनेर शरीफ...

    बिहार की रहस्यमयी गुप्तेश्वर धाम, जहां छुपे थे भोलेनाथ

    रोहतास: बिहार का रोहतास जिला आए दिन किसी न किसी कारण चर्चा में बना रहता है कभी नक्सली को लेकर तो कभी फैक्ट्री के कारण। लेकिन इसके अलावे यहाँ बहुत दर्शनीय स्थल है जो...

    लोगों के जीवन में रंग घोलती मधुबनी चित्रकला

    बिहार का मधुबनी जो चित्रकला के लिए विश्व प्रसिद्ध है। मधुबनी चित्रकला ने देश के अंदर ही नहीं बल्कि पूरे दुनिया में एक नया बाब लिखा है। प्रारम्भ में रंगोली के रुप में रहने...

    औरंगाबाद: प्रकृति की सुंदरता और कदम-कदम पर बिखरा इतिहास

    बिहार के औरंगाबाद सूबे के आकर्षक शहरों में से एक है। औरंगाबाद शहर ऐतिहासिक घटनाओं के विरासत से गहरा रिश्ता है। जीवंत अतीत की आभा और करिश्मा के बल पर ये शहर यहां आने...