Sunday, April 11, 2021

    History

    युवक का आत्म-बलिदान

    नमक आन्दोलन के साथ, बिहार में चौकीदारी टैक्स का विरोध, नशाबंदी और स्वदेशी आन्दोलन का काम भी किया जाता जाता था. 26 जनवरी 1930 को लाहौर में रावी नदी के किनारे कांग्रेस ने पूर्ण...

    पटना कलेक्ट्रेट कभी डच व्यापारियों का था गोदाम

    पटना - बिहार में 17वीं सदी में कारोबार के लिए आए डचों की निशानियाँ आज भी बिहार में है. पटना से लेकर छपरा तक डच व्यापारियों के गोदाम, उनके द्वारा बनाये गए शानदार वास्तुकला...

    जोधारा सिंह की अंग्रेजों को चुनौती

    सन 1857 की क्रांति को मुख्य रूप से सैनिकों का विद्रोह माना जाता है. लेकिन ऐसे भी व्यक्ति थे, जिन्होंने खुलकर ब्रिटिश शासन के विरुद्ध जनता का नेतृत्व किया और उसी उद्देश्य से बाजाप्ता...

    गया से खजाना हटा

    1857 की क्रान्ति की लहर से गया भी अछूता नहीं रह सका. ग्रांड ट्रंक रोड के किनारे बसे होने के कारण इसका बड़ा महत्व था. गया के मजिस्ट्रेट अलोर्जो मोनी को अपने 45 अंग्रेज...

    सारण जिले में मार्शल लॉ

    सारण जिला शुरू से ही स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी रहा है. फिर 1942 की क्रान्ति में कैसे पीछे रहता? अगस्त से ही क्रान्ति का दौर शुरू हो गया था. स्कूल और कॉलेज के लड़कों...

    घुड़सवारों का मुकाबला लाठी से

    सीवान जिले में आंदर एक थाना है. आंदर थाने में ही जीरादेई गाँव है, जो गणतंत्र भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेन्द्र प्रसाद की जन्मभूमि है. इसी गाँव से दो मील की दूरी पर...

    हसन इमाम साहब ने बूढ़े दुकानदार के पैरों पर क्यों अपनी टोपी उतारकर रख...

    पटना - शायद ही कोई बिहारवासी होगा, जिसने अली इमाम साहब का नाम नहीं सुना होगा. इनका नाम बड़ी श्रद्धा से याद किए जाते हैं. ये बिहार के निर्माताओं में से थे. अली इमाम...

    मानव जाति की प्रारंभिक रचनात्मक कला का उत्सव शैल चित्र कला

    पटना - बिहार संग्रहालय, पटना अपने सहकारिता प्रोग्राम के तहत इंदिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (IGNCA) नई दिल्ली के सहयोग से बिहार संग्रहालय के अस्थायी दीर्घा में विश्व शैलचित्र कला (विषय) पर आधारित एक...

    वास्तुकला का अद्भुत उदाहरण – देव स्थित सूर्य मंदिर

    औरंगाबाद - बिहार के औंरंगाबाद जिले में देव स्थित ऐतिहासिक सूर्य मंदिर अपनी कलात्मक भव्यता के लिए प्रसिद्ध है. यह देशी-विदेशी पर्यटकों, श्रद्धालुओं और छठव्रतिओं की अटूट आस्था का केंद्र बना हुआ है. इस...

    22 सौ साल पुरानी कौन सी मंदिर है जहाँ की मूर्तियाँ खजुराहो से मिलती...

    दिलीप कुमार कैमूर - बैजनाथ धाम के तर्ज पर कैमूर जिले में भगवान भोलेनाथ की भव्य मंदिर है। जहां सावन के महीने में शिव भगवान को जल चढ़ाने के लिए श्रद्धालु बिहार ही नहीं...

    पतेसर शरीफ में पूरी होती हर दुआ

    बिहार हमेशा से ही सूफी-संतों की कर्म और साधना स्थल रहा है. यहाँ सूफी-संतों ने मानव मन को वैचारिक पवित्रता प्रदान करने के लिए आध्यात्मिकता की अविरल धारा प्रवाहित की है. कैमूर की पावन...

    आस्था का पर्याय, माँ मुंडेश्वरी धाम!

    बिहार के कैमूर जिला मुख्यालय भभुआ से लगभग 15 किलोमीटर दूर कैमूर की पहाड़ियों पर स्थित माँ मुंडेश्वरी एवं महामंडलेश्वर महादेव का मंदिर है. यह मंदिर लगभग साढ़े सौ फीट की ऊंचाई पर है....

    दिलचस्प है चाय का इतिहास, वाह बिहार!

    असम और दार्जिलिंग की चाय के बारे में तो सब जानते हैं लेकिन किशनगंज और कटिहार ब्रांड बिहार चाय है. बिहार में चाय की खेती सर्वप्रथम 1982 में किशनगंज जिले में आधा हेक्टेयर भूमि...

    बड़ा अलबेला है बसैठी का यह मेला!

    अररिया - यहाँ के मंदिरों का कई इतिहास है. इसमें बसैठी का भी शिव मंदिर खास है. जिला मुख्यालय से 22 किमी दूर बसैठी में सत्रहवीं सदी में स्थापित यह मंदिर आस्था का केंद्र...

    लोक कलाकार भिखारी ठाकुर

    बिहार के भोजपुर जनपद में एक ऐसे कलाकार ने जन्म लिया, जिसने अपने गीत एवं नाट्य-नाच कला से तत्कालीन समाज-व्यवस्था को झकझोर दिया। वो और कोई नहीं बल्कि बिहार के सारण जिले में जन्मे...