शहाबुद्दीन मामला: कोर्ट ने ट्रायल में देरी पर बिहार सरकार को फटकारा

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पटना: सीवान के बाहुबली राजद नेता मो. शहाबुद्दीन की जमानत पर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। सीवान के चर्चित एसिड बाथ डबल मर्डर तथा इस मामले के गवाह हत्याकांड में मिली जमानत के खिलाफ तीन अलग-अलग याचिकाओं पर सुनवाई हई। शहाबुद्दीन के आग्रह पर कोर्ट ने उन्हें जवाब दाखिल करने के लिए आज तक का समय दिया था।

लंच के बाद दोबारा सुनवाई शुरू होने पर सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल में विलंब के लिए राज्य सरकार को भी दोषी ठहराते हुए सरकार के वकील को जमकर फटकार लगाई। शहाबुद्दीन मामले की सुनवाई कल भी जारी रहेगी।

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने बिहार सरकार से सवाल किया कि शहाबुद्दीन के ट्रायल पर रोक क्यों है। इसपर बिहार सरकार ने जवाब दिया कि शहाबुद्दीन को सीवान से भागलपुर जेल ट्रांसफर किये जाने के कारण ट्रायल नहीं हो पा रहा था। राज्य सरकार की इस दलील पर जमानत का विरोध कर रहे प्रशांत भूषण ने असहमति जताते हुए कहा कि पप्पू यादव की तरह शहाबुद्दीन का भी ट्रायल टेलीफोन कांफ्रेंसिंग से कराई जा सकती थी।

सुप्रीम कोर्ट में दाखिल चंदा बाबू व बिहार सरकार की याचिकाओं की सुनवाई करते हुए सोमवार को शहाबुद्दीन से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि क्यों न आपकी जमानत रद कर दी जाए? शहाबुद्दीन की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में कहा गया कि उन्हें मुकदमे के सभी कागजात शनिवार तक मिले, इसलिए उन्हें विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए समय चाहिए। इसपर कोर्ट ने सुनवाई की अगली तिथि 28 सितंबर निर्धारित कर दी।

वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि शहाबुद्दीन को दो मामलों में सजा हो चुकी है। वह आदतन अपराधी है, जिसे बाहर नहीं रखा जा सकता। उन्होंने कहा कि शहाबुद्दीन को सीवान से भागलपुर जेल ट्रांसफर कराने के बावजूद ट्रायल को नहीं रोकना चाहिए था। बिहार के ही सांसद पप्पू यादव की तरह शहाबुद्दीन की भी सुनवाई टेली कांफ्रेंसिंग से हो सकती थी।